Exclusive: चुनावी स्टंट या चीन से तनाव? अग्निवीरों को 2 साल का एक्सटेंशन, स्थायी नौकरी पर कर्नल त्यागी का बड़ा खुलासा
| अग्निवीरों को 2 साल का एक्सटेंशन क्यों? क्या यह चुनावी रणनीति है या चीन से तनाव की वजह? कर्नल अमरदीप त्यागी ने स्थायी नौकरी पर उठाए सवाल.
अग्निवीर योजना को लेकर केंद्र सरकार के नए फैसले ने एक बार फिर सेना में भर्ती और युवाओं के भविष्य को लेकर बहस छेड़ दी है. चार साल की सेवा पूरी करने के बाद बाहर होने वाले अग्निवीरों को अब दो साल और सेना में काम करने का मौका मिलेगा. इसके बाद उन्हें नियमित सैनिक बनने का अवसर भी दिया जाएगा. सरकार के इस फैसले को जहां सेना की जरूरतों से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं. सवाल है कि क्या सरकार ने युवाओं की नाराजगी दूर करने के लिए यह कदम उठाया है या फिर चीन के साथ सीमा पर तनाव इसकी वजह है? भारतीय सेना से सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल अमरदीप त्यागी ने इस फैसले पर कई सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि छह साल सेवा लेने के बाद भी युवाओं को स्थायी नौकरी के लिए परीक्षा की शर्त में उलझाना उचित नहीं है.
सरकार की मंशा पर कर्नल त्यागी ने उठाए सवाल?
केंद्र सरकार के फैसले के मुताबिक, चार साल की सेवा पूरी करने वाले 25 प्रतिशत अग्निवीरों को योग्यता के आधार पर नियमित सेना में शामिल किया जाएगा. वहीं, बाकी 75 प्रतिशत अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त सेवा अवसर मिलेगा. इसके बाद वे निर्धारित चयन प्रक्रिया के जरिए नियमित सैनिक बनने का मौका पा सकेंगे. यानी छह साल की सेवा पूरी करने के बाद भी स्थायी नौकरी की गारंटी नहीं होगी. कर्नल अमरदीप त्यागी ने इसी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं.
उनका कहना है कि असली सवाल यह नहीं है कि अग्निवीरों को स्थायी नौकरी मिलनी चाहिए या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि ऐसी स्थिति पैदा ही क्यों हुई? उनके मुताबिक, थल सेना, वायु सेना और नौसेना अग्निवीर योजना के लिए तैयार नहीं थीं, इसके बावजूद सरकार ने दबाव डालकर इसे लागू कराया.
कर्नल त्यागी के मुताबिक जब सरकार स्थायी नौकरी का रास्ता खोल ही रही है तो फिर दो साल का इंतजार और उसके बाद परीक्षा की शर्त क्यों रखी जा रही है? पहले युवाओं को चार साल बाद बेरोजगार होने का डर था, अब छह साल सेवा के बाद भी उन्हें नौकरी की चिंता रहेगी. सरकार को युवाओं के भविष्य और देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सीधे नियमित सेवा में शामिल करने पर विचार करना चाहिए.
अग्निवीरों को पेंशन से दूर रखना चाहती है सरकार?
कर्नल त्यागी का मानना है कि अग्निपथ योजना के पीछे सरकार की एक बड़ी मंशा पेंशन की जिम्मेदारी से बचना भी हो सकती है. उनका कहना है कि नियमित सैनिकों को मिलने वाले पेंशन संबंधी लाभ अग्निवीरों को नहीं मिलते. इसी वजह से योजना की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं. दरअसल, अग्निपथ योजना के मूल प्रावधानों के तहत चार साल की सेवा पूरी करने के बाद बाहर होने वाले अग्निवीरों को पेंशन और ग्रेच्युटी का लाभ नहीं मिलता. उन्हें सेवा निधि पैकेज दिया जाता है. कर्नल त्यागी का कहना है कि अब दो साल का अतिरिक्त सेवा अवसर देने के बाद भी स्थायी नौकरी की गारंटी नहीं है. ऐसे में सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर युवाओं को छह साल तक सेवा कराने के बाद भी चयन की शर्त क्यों रखी जा रही है.
क्या सरकार ने खेला सियासी दांव?
अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त सेवा अवसर देने का फैसला ऐसे समय आया है, जब 2027 में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं. इनमें उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर, गुजरात और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं. इन राज्यों में सेना में भर्ती होने की तैयारी करने वाले युवाओं की अच्छी संख्या है. ऐसे में अग्निवीर योजना में बदलाव का मुद्दा चुनावी बहस का हिस्सा बन सकता है. कर्नल त्यागी का कहना है कि पिछले कुछ समय से सरकार के खिलाफ माहौल बनने की बात सामने आ रही है. ऐसे में यह भी संभव है कि सरकार ने चुनावों को ध्यान में रखते हुए अग्निवीरों को दो साल का विस्तार देने का फैसला किया हो, ताकि युवाओं के बीच नाराजगी कम की जा सके.
चीन के साथ सीमा पर तनाव तो नहीं फैसले की असली वजह?
अग्निवीरों की सेवा अवधि बढ़ाने के पीछे दूसरा संभावित कारण चीन के साथ सीमा पर तनाव भी हो सकता है. कर्नल त्यागी का दावा है कि भारत-चीन सीमा पर हालात को लेकर सरकार देश के सामने पूरी तस्वीर नहीं रख रही है. उनके मुताबिक, दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने की स्थिति में हैं. उन्होंने इसे आईबॉल-टू-आईबॉल (Eyeball-to-eyeball) स्थिति बताया है. उनका मानना है कि सीमा पर तनाव और सैनिकों की तैनाती की जरूरत को देखते हुए सरकार अनुभवी जवानों को सेना में बनाए रखना चाहती है. हालांकि, सरकार ने अग्निवीरों की सेवा अवधि बढ़ाने के फैसले को चीन के साथ तनाव से नहीं जोड़ा है. इसलिए इसे कर्नल त्यागी का आकलन ही माना जाना चाहिए.
क्या है आईबॉल-टू-आईबॉल वॉर, युद्ध से पहले कितनी गंभीर स्थिति?
आईबॉल-टू-आईबॉल (Eyeball-to-eyeball) एक सैन्य शब्द है. इसका इस्तेमाल ऐसी स्थिति के लिए होता है, जब दो देशों के सैनिक एक-दूसरे के बेहद करीब आमने-सामने तैनात हों और एक-दूसरे को सीधे देख सकें. ऐसी स्थिति में दोनों पक्षों के बीच तनाव काफी बढ़ जाता है. छोटी-सी घटना भी बड़े टकराव का कारण बन सकती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दोनों देशों के बीच युद्ध शुरू हो गया है या युद्ध होना तय है. यह आमने-सामने की सैन्य तनातनी और बेहद संवेदनशील हालात को बताता है. कर्नल त्यागी ने भारत-चीन सीमा के संदर्भ में इसी सैन्य शब्द का इस्तेमाल करते हुए सरकार की रणनीति पर सवाल उठाए हैं.