12 साल बाद आंध्र प्रदेश की अपनी राजधानी, Amaravati को ऐसे किया जा रहा तैयार, क्या था 3 कैपिटल फॉर्मूला; जानें डिटेल में
करीब 12 साल के लंबे इंतजार के बाद आंध्र प्रदेश को अपनी स्थायी राजधानी के रूप में अमरावती को कानूनी मान्यता मिल गई है. 2014 के बंटवारे के बाद राजधानी को लेकर लगातार विवाद चलता रहा, जिसमें तीन राजधानी मॉडल भी प्रस्तावित हुआ था. अब नए संशोधन बिल के जरिए अमरावती को एकमात्र राजधानी बनाने का रास्ता साफ हो गया है.
आंध्र प्रदेश की राजधानी को लेकर पिछले 12 साल से चल रहा सियासी और प्रशासनिक घमासान अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है. Amaravati को अब राज्य की एकमात्र और स्थायी राजधानी बनाने के लिए संसद से बिल पास हो चुका है, जिससे लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता खत्म होने की उम्मीद है.
2014 में राज्य के बंटवारे के बाद से ही राजधानी को लेकर विवाद, राजनीति, किसान आंदोलन और कोर्ट की लड़ाई लगातार जारी रही. अब केंद्र सरकार के इस कदम को राज्य के भविष्य के लिहाज से बड़ा बदलाव माना जा रहा है. आइए इस खबर में विस्तार से 3 कैपिटल का फॉर्मूला विस्तार से जानते हैं
आखिर आंध्र प्रदेश की राजधानी का विवाद शुरू कैसे हुआ?
2014 में आंध्र प्रदेश के बंटवारे के बाद Hyderabad को 10 साल के लिए संयुक्त राजधानी बनाया गया था. इसके बाद आंध्र प्रदेश को अपनी नई राजधानी तय करनी थी. तब सत्ता में आई Telugu Desam Party सरकार ने N Chandrababu Naidu के नेतृत्व में अमरावती को नई राजधानी के तौर पर चुना.
अमरावती को ही राजधानी क्यों चुना गया?
सरकार ने इसके लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाई, जिसकी सिफारिश पर अमरावती को चुना गया. यह क्षेत्र विजयवाड़ा और गुंटूर के बीच स्थित है और इसे भविष्य के "वर्ल्ड क्लास कैपिटल" के तौर पर विकसित करने की योजना बनाई गई. इसके लिए हजारों किसानों से करीब 32,000 एकड़ से ज्यादा जमीन लैंड पूलिंग स्कीम के तहत ली गई.
क्या जमीन अधिग्रहण पर विवाद हुआ?
अमरावती प्रोजेक्ट की शुरुआत से ही विवादों में रही. कई किसानों ने जमीन देने से इनकार किया, जबकि विपक्ष ने आरोप लगाया कि इससे खास जाति को फायदा पहुंचाया जा रहा है. पर्यावरण विशेषज्ञों ने भी इस फैसले का विरोध किया और मामला National Green Tribunal तक पहुंचा, लेकिन 2019 में ट्रिब्यूनल ने सरकार के फैसले को बरकरार रखा.
फिर 3 कैपिटल फॉर्मूला क्या था?
2019 में सत्ता बदलने के बाद YS Jagan Mohan Reddy की सरकार ने एक नया प्रस्ताव रखा- 3 राजधानी मॉडल. इसमें-
- Visakhapatnam को प्रशासनिक राजधानी
- Amaravati को विधायी राजधानी
- Kurnool को न्यायिक राजधानी बनाने की बात कही गई
सरकार का तर्क था कि इससे राज्य का संतुलित विकास होगा.
3 कैपिटल प्लान पर इतना विवाद क्यों हुआ?
इस फैसले के खिलाफ अमरावती के किसानों ने बड़ा आंदोलन शुरू किया, जिसे “सेव अमरावती” अभियान का नाम दिया गया. मामला हाई कोर्ट पहुंचा और 2022 में कोर्ट ने साफ कहा कि सरकार सिर्फ अपनी मर्जी से तीन राजधानियां नहीं बना सकती और अमरावती के विकास को जारी रखने का आदेश दिया.
क्या भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे थे?
अमरावती प्रोजेक्ट पर जमीन खरीद-फरोख्त में अनियमितताओं के आरोप लगे. कहा गया कि कुछ नेताओं को पहले से राजधानी का लोकेशन पता था और उन्होंने सस्ती जमीन खरीदकर फायदा उठाया. इसकी जांच के लिए SIT भी बनाई गई थी.
अब नया बिल क्या कहता है?
अब संसद में पास हुए संशोधन बिल के जरिए साफ कर दिया गया है कि Amaravati ही आंध्र प्रदेश की एकमात्र और स्थायी राजधानी होगी. यह संशोधन Andhra Pradesh Reorganisation Act 2014 की धारा 5 में बदलाव करता है, जिससे राजधानी को लेकर कानूनी स्पष्टता मिल गई है.
आगे अमरावती को कैसे विकसित किया जाएगा?
सरकार का दावा है कि अमरावती को एक आधुनिक, हाई-टेक और वैश्विक स्तर की राजधानी के रूप में विकसित किया जाएगा. यहां इंफ्रास्ट्रक्चर, आईटी, शिक्षा और प्रशासनिक ढांचे पर बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है. करीब 90 हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू किया जा चुका है और इसे "ग्रीनफील्ड कैपिटल" के रूप में विकसित किया जा रहा है.