चॉल का टपोरी जब बना सुपरस्टार! Jackie Shroff की फिल्मी कहानी; 33 साल चॉल में कटे, बसस्टैंड पर खुली थी किस्मत
मुंबई की चकाचौंध के पीछे छुपी है जैकी श्रॉफ उर्फ 'जग्गू दादा' की प्रेरणादायक कहानी। तीन बत्ती की चॉल में पले-बढ़े जैकी ने गरीबी, पारिवारिक संकट और निजी दुखों का सामना किया. पढ़ाई छोड़कर ताज होटल में काम किया, ट्रैवल एजेंसी में नौकरी की और फिर एक बस स्टैंड पर किस्मत ने करवट ली. मॉडलिंग से फिल्मों तक का सफर आसान नहीं था, लेकिन ‘हीरो’ ने उन्हें स्टार बना दिया.;
मुंबई की चकाचौंध वाली दुनिया में जहां सितारे रातोंरात चमकते हैं, वहां एक ऐसा शख्स है जिसकी कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं. हम बात कर रहे हैं 'जग्गू दादा' यानी जैकी श्रॉफ की, जिन्होंने 1980 के दशक में बॉलीवुड को अपना 'हीरो' दिया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये सुपरस्टार बनने से पहले क्या करते थे? और कैसे एक साधारण बस स्टैंड ने उनकी जिंदगी का रुख मोड़ दिया? आज हम आपको बताते हैं जैकी की कुछ अनकही कहानियां वो संघर्ष, वो किस्मत और वो जज्बा जो उन्हें सड़क से सिल्वर स्क्रीन तक ले गया. ये है एक ऐसी न्यूज स्टोरी, जो आपको इंस्पायर करेगी और सोचने पर मजबूर कर देगी कि किस्मत कब, कहां और कैसे पलटती है.
जैकी श्रॉफ का जन्म 1 फरवरी 1957 को मुंबई में हुआ था. उनका असली नाम जयकिशन काकुभाई श्रॉफ है. उनके पिता गुजराती थे, जबकि मां एक उइघुर महिला थीं, जो कजाखस्तान से एक राजनीतिक उथल-पुथल के दौरान भागकर भारत आईं. कहा जाता है कि जैकी के पिता अपने समय के बड़े व्यापारी थे लेकिन स्टॉक मार्किट में उन्हें बड़ा नुकसान हुआ और ऐसे में वह बुरी तरह से दिवालिया हो गए. जैकी मुंबई के 'तीन बत्ती' इलाके की तंग चॉल में पले-बढ़े, जहां गरीबी और संघर्ष रोज की कहानी थी. परिवार की आर्थिक हालत इतनी खराब थी कि जैकी ने 11वीं क्लास के बाद पढ़ाई छोड़ दी. जैकी जिनकी जिंदगी 33 साल चॉल में कटी कई हिट फिल्में देने के बाद भी.
मुंबई का टपोरी भाई
एक्टर बनने से पहले जैकी की जिंदगी किसी एक्शन फिल्म की तरह थी. वे लोकल टपोरी के तौर पर जाने जाते थे मतलब इलाके के वो लड़के जो छोटी-मोटी दबंगई और झगड़ों में पड़ते थे. लेकिन ये सिर्फ अफवाहें नहीं, जैकी खुद मानते हैं कि उन्होंने कई तरह के काम ट्राई किए. ताज होटल में अप्रेंटिस शेफ के रूप में काम किया, जहां वे खाना बनाना सीखते थे. फिर एक ट्रैवल एजेंसी में जॉब की, जहां टूरिस्ट्स को घुमाने-फिराने का काम था. लेकिन जिंदगी का असली ट्विस्ट तो और इंतजार कर रहा था. एक अनकही कहानी ये भी है कि जब जैकी सिर्फ 10 साल के थे, तब उनके बड़े भाई की मौत हो गई. भाई सेंचुरी मिल्स में मजदूर थे और एक दोस्त को बचाने की को.
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बस स्टैंड से बॉलीवुड का दरवाजा
अब आते हैं उस पल पर जो जैकी की जिंदगी बदल गया. एक दोपहर, जैकी मुंबई के किसी बस स्टैंड पर खड़े थे. तभी एक एडवरटाइजिंग एजेंसी के अकाउंटेंट की नजर उन पर पड़ी. उनकी लंबी कद-काठी और रफ-टफ लुक ने उस शख्स को इंप्रेस किया, और उन्होंने जैकी को मॉडलिंग का ऑफर दे दिया. ये वो मौका था जो जैकी इंतजार कर रहे थे. मॉडलिंग से कमाए पैसों से उन्होंने एक्टिंग कोर्स जॉइन किया, और जल्द ही छोटे-मोटे रोल मिलने लगे. उनकी पहली फिल्म थी देव आनंद की 'स्वामी दादा' (1982), जहां उन्हें सेकंड लीड रोल ऑफर हुआ, लेकिन आखिर में छोटा सा पार्ट मिला. लेकिन असली ब्रेकआउट आया 1983 में, जब डायरेक्टर सुभाष घाई ने उन्हें 'हीरो' में लीड रोल दिया. ये फिल्म सुपरहिट हुई, और जैकी रातोंरात स्टार बन गए. मजेदार बात ये कि सुभाष घाई ने ही उन्हें 'जैकी' नाम दिया, जो उनका स्क्रीन नेम बन गया. हिट्स देने के बाद भी जैकी चॉल में रहते रहे, क्योंकि उनकी जड़ें वहीं थीं.
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33 साल चॉल फिर मिला आलीशान घर
1983 में जैकी की फिल्म 'हीरो' रिलीज हुई और वो रातोरात सुपरस्टार बन गईं. लोग उन्हें देखने के लिए लाइन में लग जाते हैं, उनके घर के बाहर इंतजार करने लगते हैं. उन्होंने खुद कई इंटरव्यू में बताया कि वे कुल 33 साल तक चॉल में रहे. चॉल में सिर्फ एक छोटा सा कमरा था, जहां सब साथ मिलकर रहते थे. 30 लोगों के लिए केवल तीन वॉशरूम थे. लेकिन बाद जैकी ने मुंबई के कार्टर रोड में किराए का घर लिया. इसके बाद कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ते हुए उन्होंने अपना पहला घर खरीदा आठ कमरों वाला घर मुंबई की खार रोड पर खरीदा. जिसकी कीमत आज के समय में 31,000 करोड़ रुपये है. लेकिन वह यह भी मानते है कि चॉल से निकलने के बाद परिवार में दूरियां भी आई, क्योंकि चॉल में सब मिलकर रहते थे और बड़े घर में शिफ्ट होने के बाद सबके अपने कमरे हो गए सबकी अपनी प्राइवेसी हो गई.
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आयशा संग फिल्मी लव स्टोरी
जैकी ने जब आयशा को पहली बार देखा तो वह एक 14-15 साल की स्कूल गर्ल थी. दोनों की मुलाकात बस में हुई थी, जब आयशा बस से उतरी तो जैकी ने उनसे बात करना चाहा. उन दिनों जैकी सिर्फ 17 साल के थे. दोनों की दोस्ती हुई और एक दूसरे प्यार हो गया. लेकिन सबसे बड़ी दीवार थी उनका फैमिली स्टेट्स। जहां आयशा एक अमीर घर से वहीं जैकी एक चॉल के रहने वालों में से थे. लेकिन दोनों ने हार नहीं मानी एक्टर बनने के बाद जैकी ने आयशा से साल 1987 में शादी रचाई और दोनों एक जॉइंट फैमिली के साथ चॉल में रहने लगे. 1990 में आयशा और जैकी पहली बार माता-पिता बनें, उनके घर जन्म हुआ टाइगर श्रॉफ का. वहीं साल 1993 में पैदा हुई जैकी की छोटी बेटी कृष्णा श्रॉफ.
हो गए थे दिवालिया
हालांकि जैकी की सफलता के बीच एक ऐसा दौर आया जब वह आयशा की वजह से दिवालिया हो गए. आयशा ने एक ब्लैक कॉमेडी फिल्म 'बूम' बनाई जिसमें कैटरीना कैफ, अमिताभ बच्चन, गुलशन ग्रोवर और खुद जैकी लीड रोल में थे. लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से फ्लॉप रही और जैकी पर भारी कर्ज हो गया. एक्टर को उन्हें अपना घर तक बेचना पड़ा. किसी तरह वह जैकी और आयशा ने कर्ज चुकाया. उस बीच जैकी के माता-पिता का निधन हुआ और वह टूट गए. जैकी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें पिता के निधन के बाद शूटिंग पर अगले दिन जाना पड़ा था. अगर वह नहीं जाते तो प्रोड्यूसर का काफी नुकसान होता. उन्होंने माना जिंदगी इसी का नाम है.