Sonali Bendre और Goldie Behl को किसानों की जमीन हड़पने का आरोप, कोर्ट पहुंचा मामला
पुणे के मावल तालुका में एक किसान परिवार ने सोनाली बेंद्रे और गोल्डी बहल के खिलाफ जमीन विवाद का मुकदमा दायर किया है. परिवार का दावा है कि वे दशकों से संरक्षित किरायेदार हैं और उनकी जमीन पर अवैध निर्माण की कोशिश की गई.
पुणे के एक साधारण किसान और उनकी बुजुर्ग मां ने बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे (Sonali Bendre) और उनके पति, फिल्म निर्माता गोल्डी बहल (Goldie Behl) के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया है. यह मामला 30 गुंठा जमीन को लेकर है, जो मावल तालुका के उक्सान गांव में स्थित है. इस विवाद में गंभीर आरोप लगाए गए हैं. मुकदमा दायर करने वाले लोग हैं चंद्रकांत बालू शिंदे (उम्र 50 साल) और उनकी 75 साल की मां कमलबाई शिंदे. दोनों पुणे जिले के मावल तालुका के उक्सान गांव में रहते हैं.
उनका मुख्य आरोप यह है कि वे पिछले कई दशकों से इस 30 गुंठा जमीन (लगभग 32,000 वर्ग फुट से ज्यादा) पर संरक्षित किरायेदार (protected tenant) के रूप में खेती करते आ रहे हैं. उनका कहना है कि 1940 के दशक से ही उनका परिवार इस जमीन पर काम कर रहा है. लेकिन 2012 में जमीन के मूल मालिकों ने इसे एक स्थानीय व्यक्ति को बेच दिया. फिर मार्च 2021 में उस व्यक्ति ने जमीन का एक हिस्सा गोल्डी बहल को बेच दिया. शिंदे परिवार का दावा है कि यह बिक्री पूरी तरह अवैध है, क्योंकि उनके किरायेदारी के अधिकार कभी भी कानूनी रूप से खत्म नहीं किए गए थे. उनके अधिकारों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया.
दिसंबर 2025 में घटना क्या हुई?
यह मामला सिर्फ कागजों का विवाद नहीं है. शिंदे परिवार का आरोप है कि 14 दिसंबर 2025 को सोनाली बेंद्रे और उनके पति गोल्डी बहल मजदूरों और भारी मशीनरी लेकर जमीन पर पहुंचे. उन्होंने वहां अवैध निर्माण शुरू करने की कोशिश की. परिवार के मुताबिक, जब वे वहां गए तो दोनों पक्षों में काफी बहस हुई. शिंदे परिवार का कहना है कि सोनाली बेंद्रे और गोल्डी बहल ने उनसे सीधे झगड़ा किया. यह घटना उनके दीवानी मुकदमे में एक महत्वपूर्ण आरोप है.
शिंदे परिवार का नाम भूमि रिकॉर्ड से कैसे हटाया गया?
शिंदे परिवार का आरोप है कि 1980 के दशक में बिना किसी सूचना दिए और बिना सही प्रक्रिया अपनाए उनके नाम को राजस्व रिकॉर्ड (7/12 उतारा) से गलत तरीके से हटा दिया गया था. उनका कहना है कि उनके दावे को खारिज करने के लिए जाली दस्तावेज इस्तेमाल किए गए. महाराष्ट्र के किरायेदारी कानून के अनुसार, संरक्षित किरायेदार के अधिकारों को आसानी से किसी भी निजी बिक्री से खत्म नहीं किया जा सकता. इसलिए अदालत को इस बात की गहराई से जांच करनी होगी.
ANI
पुलिस ने मदद की या नहीं?
शिंदे परिवार का आरोप है कि सोनाली बेंद्रे और गोल्डी बहल ने अपने प्रभाव और स्थानीय पुलिस से अच्छे संबंधों का फायदा उठाकर उन पर जमीन खाली करने का दबाव डाला. परिवार ने इस मामले को पहले पुलिस के पास भी उठाया था, लेकिन पुलिस ने इसे सिर्फ सिविल (दीवानी) मामला बताकर मदद नहीं की. अब उन्होंने वडगांव मावल सिविल कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने जमीन पर रोक लगाने की मांग की है.
सोनाली बेंद्रे का जवाब क्या है?
सोनाली बेंद्रे ने इन सभी आरोपों से साफ इनकार कर दिया है. उनका कहना है कि सरकारी दस्तावेजों और भूमि खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड में उनका नाम कहीं नहीं है. उन्होंने आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि यह शिंदे परिवार द्वारा सिर्फ बदनाम करने और पैसे कमाने के लिए किया गया प्रयास है. उनकी वकील राजू शिंदे ने भी कहा कि शिकायतकर्ता पहले तहसीलदार और एसडीओ (उप-विभागीय अधिकारी) जैसे कई सरकारी अधिकारियों के पास गए थे, लेकिन उनकी सभी अपीलें खारिज हो चुकी हैं.
मामले की अभी क्या स्थिति है?
यह मुकदमा पुणे के वडगांव मावल सिविल कोर्ट में चल रहा है। अगली सुनवाई 20 अप्रैल 2026 को होनी है. शिंदे परिवार ने अदालत से मांग की है कि जमीन पर रोक लगाई जाए, ताकि अदालत के फैसले तक कोई निर्माण कार्य न हो सके और जमीन का कब्जा भी नहीं बदला जा सके.
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
यह सिर्फ सोनाली बेंद्रे और गोल्डी बहल से जुड़ा मामला नहीं है. यह महाराष्ट्र के गांवों में लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी समस्या को उजागर करता है. कई छोटे किसान और कुल (किरायेदार) किसान दशकों से अपनी जमीन पर खेती करते हैं, लेकिन उनके नाम 7/12 के रिकॉर्ड से बिना बताए हटा दिए जाते हैं. जब शहरी इलाकों के पास जमीन महंगी हो जाती है और बड़े लोग या सेलिब्रिटी उस जमीन को खरीदते हैं, तो ये गरीब किसान बेबस हो जाते हैं. पुणे के आसपास तेजी से हो रहे शहरी विकास में छोटे किसानों के अधिकारों की रक्षा का यह एक उदाहरण है. अब देखना होगा कि अदालत इस मामले में क्या फैसला देती है और क्या आरोप साबित होते हैं.