बालकनी से गिरकर मौत और एक अधूरी प्रेम कहानी, मनमोहन देसाई जिन्हें बिन शादी अपना पति मानती थी नंदा
बॉलीवुड के दिग्गज निर्देशक मनमोहन देसाई और एक्ट्रेस नंदा की प्रेम कहानी सगाई तक पहुंची, लेकिन शादी से पहले ही मौत ने सब खत्म कर दिया. उनकी मौत आज भी रहस्य बनी हुई है, जबकि नंदा ने ताउम्र अकेलेपन को अपना लिया.
मनमोहन देसाई 1970 और 1980 के दशक में बॉलीवुड के कमर्शियल सिनेमा के सबसे बड़े नामों में से एक थे. वे उस दौर के ऐसे निर्देशक थे जिन्होंने मसाला फिल्मों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया और दर्शकों को मनोरंजन का ऐसा तड़का दिया कि लोग थिएटरों में खूब भीड़ लगाते थे. उनकी कई फिल्में सुपरहिट हुईं, जैसे 'अमर अकबर एंथनी', 'कुली' , 'धर्मवीर', 'सच्चा झूठा', 'नसीब' और 'मर्द'. खास तौर पर अमिताभ बच्चन के साथ उनकी जोड़ी कमाल की थी. अमिताभ को सुपरस्टार बनाने में मनमोहन देसाई का बहुत बड़ा हाथ था. उनकी फिल्मों में एक्शन, ड्रामा, कॉमेडी, गाने, डांस और इमोशन का ऐसा मिश्रण होता था कि लोग बार-बार देखने जाते थे.
मनमोहन देसाई का जन्म 26 फरवरी 1937 को मुंबई में हुआ था. वे फिल्म इंडस्ट्री में असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में आए और धीरे-धीरे अपना नाम बनाया. 1960-70 के दशक में उन्होंने कई ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं. 1977 में 'अमर अकबर एंथनी' ने तो इतना धमाल मचाया कि आज भी लोग इसे क्लासिक मानते हैं. इसी तरह कूल्ली में अमिताभ बच्चन के साथ उनका काम इतना शानदार था कि फिल्म सुपरहिट हो गई. उन्होंने कमर्शियल सिनेमा को एक नया रूप दिया. जहां कहानी में सब कुछ होता था, लेकिन दर्शक खुश रहते थे.
निजी जीवन और पहली शादी
मनमोहन देसाई का निजी जीवन फिल्मों जितना रंगीन नहीं था. उनकी पहली शादी जीवनप्रभा देसाई से हुई थी. दोनों की शादी खुशहाल थी, लेकिन दुर्भाग्य से शादी के महज 10 साल बाद ही जीवनप्रभा का निधन हो गया. उनके एक बेटे का नाम केतन देसाई है, जो बाद में खुद एक सफल फिल्म डायरेक्टर बने. पत्नी के जाने के बाद मनमोहन काफी अकेले पड़ गए थे. वे काम में डूबे रहते थे, लेकिन घर में उदासी छाई रहती थी.
नंदा के साथ प्यार की कहानी
मनमोहन देसाई की जिंदगी में फिर से प्यार तब आया जब वे 50 के पार हो चुके थे. एक्ट्रेस नंदा जिनका पूरा नाम नंदिनी कर्नाटकी था उस दौर की बहुत बड़ी और सम्मानित स्टार थीं. उन्होंने छोटी बहन, जब जब फूल खिले, हम दोनों, गुमनाम, इत्तेफाक जैसी कई हिट फिल्में की थीं. लेकिन नंदा बहुत शर्मीली और सिद्धांतवादी थीं. कई ऑफर आए, लेकिन उन्होंने कभी शादी नहीं की. मनमोहन देसाई को नंदा बहुत पसंद थीं. वे उनसे प्यार करते थे, लेकिन खुद बात करने में हिचकिचाते थे क्योंकि नंदा बहुत शर्मीली थीं. आखिरकार उनके बेटे केतन देसाई और कॉमन फ्रेंड वाहिदा रहमान ने बीच में कदम उठाया.
कैसे वहीदा रहमान ने मिलवाया?
वाहिदा जी ने एक छोटा-सा डिनर अरेंज किया, जहां मनमोहन ने अपनी फीलिंग्स जाहिर कीं. नंदा ने परिवार से बात की और हां कर दी. 1992 में, जब दोनों 50 से ज्यादा उम्र के थे, उनकी सगाई हो गई. ये एक छोटी-सी, सादगी भरी सेरेमनी थी. दोनों बहुत खुश थे और जल्दी शादी करने की सोच रहे थे. नंदा ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें ऐसा साथी चाहिए जो किसी के सामने न झुके, और मनमोहन देसाई अमिताभ बच्चन जैसे बड़े सितारे के साथ भी बराबरी से बात करते थे. लेकिन किस्मत ने कुछ और ही लिखा था. सबसे पहले नंदा की मां को कैंसर हुआ और उनकी मौत हो गई. इस वजह से शादी टल गई. दोनों दुखी थे, लेकिन उम्मीद रखे हुए थे.
ट्रेजिक अंत और मौत का रहस्य
1 मार्च 1994 को मनमोहन देसाई की अचानक मौत हो गई. वे अपने गिरगांव स्थित फ्लैट की बालकनी पर थे. रेलिंग टूट गई और वे नीचे गिर पड़े मौत हो गई. ये हादसा इतना अचानक हुआ कि पूरे बॉलीवुड में सदमा फैल गया. उनकी मौत आज भी एक रहस्य बनी हुई है. कुछ लोग कहते हैं कि ये महज हादसा था रेलिंग पुरानी थी और टूट गई. कुछ का मानना है कि उन्होंने आत्महत्या की, क्योंकि आखिरी दिनों में उनकी कुछ फिल्में फ्लॉप हो रही थीं, सेहत भी ठीक नहीं थी और वे डिप्रेशन में थे. पुलिस जांच में इसे हादसा ही माना गया.
नंदा का दर्द और अकेलापन
मनमोहन की मौत ने नंदा को पूरी तरह तोड़ दिया. वे उन्हें अपना पति मान चुकी थीं. उन्होंने कहा था, 'मैंने उन्हें पति माना है और अब वैसे भी...' इसके बाद नंदा ने कभी शादी नहीं की. रंग-बिरंगे कपड़े, हीरे-जवाहरात, मेकअप सब छोड़ दिया. जिंदगी भर सादगी से, सफेद कपड़ों में रहीं. वे अकेले, शांत जीवन जीती रहीं और 25 मार्च 2014 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया. मनमोहन देसाई ने स्क्रीन पर हजारों खुशियां बांटीं मां-बाप-बच्चों के मिलन, चमत्कार, खुशी के अंत. लेकिन उनकी अपनी जिंदगी में खुशी अधूरी रह गई.