क्या थे Agnivesh Agarwal के सपने जिन्हें अब पूरा करेंगे Anil Agarwal? कहा- बाप के कंधे पर बेटे की अर्थी देखना दर्दनाक
वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बड़े बेटे अग्निवेश अग्रवाल का 49 साल की उम्र में निधन हो गया है. यह दुखद घटना 7 जनवरी 2026 को अमेरिका में स्कीइंग ट्रिप के दौरान हुए हादसे के बाद हुई. गंभीर रूप से घायल अग्निवेश को न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां वे रिकवरी कर रहे थे, लेकिन अचानक कार्डियक अरेस्ट ने उनकी जान ले ली.;
Agnivesh Agarwal passes away: कॉरपरेट वर्ल्ड में हलचल मचाने वाली खबर सामने आई. वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बड़े बेटे अग्निवेश अग्रवाल (Agnivesh Agarwal) का 49 साल की उम्र में अचानक निधन हो गया, जिसने पूरे कॉर्पोरेट वर्ल्ड को सदमे में डाल दिया. यह दुखद घटना 7 जनवरी 2026 को हुई, जब अग्निवेश अमेरिका में दोस्तों के साथ स्कीइंग ट्रिप पर थे. एक भयानक हादसे में घायल होने के बाद उन्हें न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. डॉक्टरों का कहना था कि वे ठीक हो रहे थे और खतरे से बाहर थे, लेकिन अचानक कार्डियक अरेस्ट ने सब कुछ बदल दिया. परिवार को उम्मीद थी कि सब सामान्य हो जाएगा, लेकिन किस्मत ने क्रूर मजाक किया और अग्निवेश हमेशा के लिए दुनिया छोड़ गए.
अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर इमोशनल पोस्ट शेयर करते हुए इसे 'अपने जीवन का सबसे दर्दनाक दिन' बताया. उन्होंने लिखा, 'एक बाप के कंधे पर बेटे की अर्थी जाए, इससे बुरा क्या हो सकता है?. अग्निवेश न केवल अनिल की शान थे, बल्कि उनका दोस्त और सपनों का साथी भी. इस खबर ने वेदांता ग्रुप के हजारों कर्मचारियों को झकझोर दिया, जो उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानते थे. कॉर्पोरेट सर्कल में तहलका मच गया, क्योंकि अग्निवेश वेदांता की कई कंपनियों में प्रमुख भूमिका निभा रहे थे. उनके निधन से भारत के खनन और ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है.
कौन थे अग्निवेश अग्रवाल?
अग्निवेश अग्रवाल, जिन्हें प्यार से 'अग्नि' कहा जाता था, एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिनकी जिंदगी एनर्जी, संघर्ष, सफलता और मानवता से भरी हुई थी. 3 जून 1976 को बिहार की राजधानी पटना में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे अग्निवेश, वेदांता ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बड़े बेटे थे. उनकी मां किरण अग्रवाल और बहन प्रिया के साथ उनका परिवार एक मजबूत बांड रहा. बचपन से ही अग्निवेश चंचल, शरारती और हमेशा मुस्कुराते रहने वाले बच्चे थे, जो अपनी बहन प्रिया के प्रति प्रोटेक्टिव रहे. उनके पिता अनिल अग्रवाल ने उन्हें एक साधारण लाइफस्टाइल सिखाई, जो बाद में उनकी व्यक्तित्व की नींव बनी.
प्रोफेशनल लाइफ में भी खूम कमाया नाम
एजुकेशन फील्ड में अग्निवेश ने राजस्थान के प्रतिष्ठित मेयो कॉलेज, अजमेर से अपनी पढ़ाई पूरी की, जहां उन्होंने न केवल एकेडेमिक एक्सीलेंस दिखाई बल्कि खेलकूद और कला में भी अपने टैलेंट का परिचय दिया. वे बॉक्सिंग चैंपियन बने, हॉर्सराइडिंग के शौकीन थे और एक स्किल्ड म्यूजिशियन भी. उनकी स्ट्रांग पर्सनालिटी ने उन्हें हमेशा चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रखा. प्रोफेशनल लाइफ में कदम रखते हुए, अग्निवेश ने दुबई में 'Fujairah Gold' नामक कंपनी की स्थापना की, जो खनन और मेटल इंडस्ट्री में एक बड़ा नाम बन गई. वे हिंदुस्तन जिंक लिमिटेड के चेयरमैन भी रहे, जहां उन्होंने कंपनी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. इसके अलावा, वे वेदांता ग्रुप की सहायक कंपनी तलवंडी सबो पावर लिमिटेड (टीएसपीएल) के बोर्ड मेंबर और चेयरमैन के रूप में सक्रिय थे, जहां उन्होंने अपना योगदान दिया.
उसकी विरासत ज़िंदा रहेगी
अनिल अग्रवाल की फेसबुक पोस्ट के मुताबिक, अग्निवेश की सबसे बड़ी खासियत उनकी सादगी और डाउन टू अर्थ नेचर था. सफल बिजनेसमैन होने के बावजूद, वे हमेशा अपने दोस्तों, कलीग्स के बीच रहते थे. वे यारों के यार थे, जो किसी को भी अपना बना लेते थे. उनकी जिंदादिली और इंसानियत ने उन्हें सबका फेवरेट बना दिया. अग्निवेश का सपना भारत को आत्मनिर्भर बनाना था. वे अक्सर कहते थे, 'पापा, हमारे देश में क्या नहीं है? फिर हम किसी से पीछे क्यों रहें?.' उनके पिता अनिल के साथ मिलकर उन्होंने सामाजिक कार्यों पर जोर दिया, जैसे बच्चों को खाना-एजुकेशन और महिलाओं को मजबूत बनाना और युवाओं को रोजगार देना. अग्निवेश ने अपने पिता से वादा किया था कि परिवार की संपत्ति का 75% से अधिक हिस्सा समाज सेवा में लगाया जाएगा, और वे इस वादे पर अटल रहे. अनिल ने अपनी पोस्ट के अंत में लिखा, 'एक पिता के दोस्त, एक भाई के प्रोटेक्टर और एक बिजनेसमैन के रूप में प्रेरणा स्रोत, अग्निवेश का जीवन अधूरा रह गया, लेकिन उनकी विरासत वेदांता ग्रुप और उनके सपनों में जीवित रहेगी.