क्या बच्चों के नाम पर म्यूचुअल फंड में निवेश किया जा सकता है? जानिए नियम, प्रोसेस और फायदे
Mutual Fund in Child Name: भारत में नाबालिग बच्चों के नाम पर म्यूचुअल फंड अकाउंट खोला जा सकता है, जिसे गार्जियन संचालित करता है. लंबी अवधि में यह शिक्षा और करियर के लिए मजबूत फंड बना सकता है.;
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(Image Source: Sora AI )Mutual Fund in Child Name: आज के दौर में बच्चों की पढ़ाई और करियर पर होने वाला खर्च तेजी से बढ़ रहा है. अच्छे स्कूल, प्रोफेशनल कोर्स और विदेश में पढ़ाई का सपना पूरा करने के लिए केवल बैंक में बचत करना काफी नहीं रह गया है.
इसी वजह से अब कई माता-पिता बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए म्यूचुअल फंड में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं. अच्छी बात यह है कि भारत में नाबालिग बच्चों के नाम पर भी म्यूचुअल फंड अकाउंट खोला जा सकता है.
नाबालिग के नाम पर म्यूचुअल फंड फोलियो कैसे खुलता है?
18 साल से कम उम्र के बच्चे के नाम पर म्यूचुअल फंड फोलियो खोला जा सकता है. लेकिन नियम यह है कि बच्चा उस अकाउंट का एकमात्र होल्डर होगा. यानी जॉइंट अकाउंट की सुविधा नहीं मिलती. अकाउंट को माता-पिता या कोर्ट द्वारा नियुक्त लीगल गार्जियन संचालित करता है. जब तक बच्चा नाबालिग रहता है, तब तक निवेश से जुड़े सभी फैसले गार्जियन ही लेता है. SIP शुरू करना, फंड बदलना या जरूरत पड़ने पर पैसा निकालना - इन सभी पर नियंत्रण गार्जियन का होता है. जैसे ही बच्चा 18 साल का होता है, अकाउंट का पूरा अधिकार अपने आप बच्चे के नाम ट्रांसफर हो जाता है.
अकाउंट खोलने के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत होती है?
नाबालिग के नाम पर म्यूचुअल फंड अकाउंट खोलने के लिए उम्र का प्रमाण देना जरूरी होता है. इसके लिए जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट या बच्चे का पैन कार्ड मान्य दस्तावेज माने जाते हैं. साथ ही गार्जियन का KYC पूरा होना चाहिए. निवेश के लिए पैसा या तो बच्चे के बैंक अकाउंट से जा सकता है या फिर माता-पिता/गार्जियन के अकाउंट से भी निवेश किया जा सकता है.
क्या निवेश के तरीकों पर कोई पाबंदी होती है?
नाबालिग के नाम पर निवेश करने में ज्यादा रोक-टोक नहीं होती. गार्जियन SIP, एकमुश्त निवेश, STP, स्विच और रिडेम्पशन जैसी सभी सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकता है. निवेश के लिए इक्विटी फंड, डेट फंड, हाइब्रिड फंड, गोल्ड या इंटरनेशनल फंड जैसे सभी विकल्प खुले रहते हैं. यानी फंड कैटेगरी के मामले में कोई विशेष प्रतिबंध नहीं होता.
बच्चा 18 साल का होते ही क्या बदल जाता है?
जैसे ही बच्चा बालिग होता है, फोलियो को अस्थायी रूप से फ्रीज कर दिया जाता है. चल रही SIP और STP अपने आप बंद हो जाती हैं. फिर बच्चे को खुद KYC पूरा करना होता है और फोलियो स्टेटस बदलवाने की एप्लिकेशन देनी होती है. इसके बाद अकाउंट दोबारा एक्टिव हो जाता है और अब निवेश से जुड़े सभी फैसले बच्चा खुद ले सकता है.
माता-पिता बच्चों के नाम पर निवेश क्यों करते हैं?
बच्चों के नाम पर निवेश करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि पैसा तय उद्देश्य के लिए सुरक्षित रहता है. जब निवेश बच्चे के नाम पर होता है, तो उसे घरेलू खर्चों में इस्तेमाल करने का मोह कम हो जाता है. इसके अलावा, लंबी अवधि का समय मिलने से कंपाउंडिंग का लाभ ज्यादा मिलता है. यही कारण है कि शिक्षा, शादी या स्टार्टअप जैसे बड़े लक्ष्यों के लिए यह तरीका कारगर माना जाता है.
टैक्स के नियम कैसे लागू होते हैं?
जब बच्चा नाबालिग होता है और म्यूचुअल फंड से कोई मुनाफा होता है, तो वह माता-पिता की आय में जोड़ दिया जाता है. उस पर टैक्स भी माता-पिता के टैक्स स्लैब के अनुसार लगता है. लेकिन जैसे ही बच्चा 18 साल का होता है, वह अलग टैक्सपेयर बन जाता है. चूंकि आमतौर पर उसकी आय कम होती है, इसलिए वह 3 लाख रुपये तक की बेसिक टैक्स छूट और इक्विटी फंड पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की तय सीमा तक टैक्स छूट का फायदा ले सकता है. इससे कुल टैक्स बोझ कम हो सकता है.
क्या यह बच्चों के भविष्य के लिए सही रणनीति है?
अगर सही समय पर निवेश शुरू किया जाए, अच्छे फंड चुने जाएं और बच्चे को फाइनेंशियल समझ दी जाए, तो नाबालिग के नाम पर म्यूचुअल फंड निवेश मजबूत फाइनेंशियल नींव बना सकता है. यह न सिर्फ पैसे की अहमियत सिखाता है बल्कि भविष्य की बड़ी जरूरतों के लिए तैयारी भी कराता है.
यहां जानिए बच्चों के म्यूचुअल फंड से जुड़े FAQs
FAQ 1: क्या बच्चे के नाम पर म्यूचुअल फंड अकाउंट कानूनी रूप से मान्य है?
हां, भारत में सेबी और एएमसी के नियमों के तहत नाबालिग के नाम पर म्यूचुअल फंड फोलियो खोलना पूरी तरह वैध है, बशर्ते अकाउंट को गार्जियन ऑपरेट करे.
FAQ 2: क्या बच्चे के अकाउंट में माता-पिता पैसा डाल सकते हैं?
हां, निवेश बच्चे के बैंक अकाउंट से भी किया जा सकता है और माता-पिता या गार्जियन के बैंक अकाउंट से भी.
FAQ 3: क्या बच्चे के नाम पर SIP चालू रह सकती है?
जब तक बच्चा नाबालिग है, SIP चल सकती है. लेकिन 18 साल पूरा होते ही SIP अपने आप बंद हो जाती है और दोबारा शुरू करने के लिए बच्चे को KYC कराना होता है.
FAQ 4: क्या टैक्स बचाने के लिए बच्चे के नाम पर निवेश करना फायदेमंद है?
नाबालिग अवस्था में टैक्स माता-पिता के नाम जुड़ता है, लेकिन बालिग होने के बाद बच्चा अलग टैक्सपेयर बनता है. इस वजह से लॉन्ग टर्म में टैक्स प्लानिंग में मदद मिल सकती है.
FAQ 5: किस उद्देश्य के लिए यह निवेश सबसे ज्यादा उपयोगी है?
बच्चों की उच्च शिक्षा, प्रोफेशनल कोर्स, शादी या बिजनेस शुरू करने जैसे बड़े लक्ष्यों के लिए यह निवेश सबसे ज्यादा उपयोगी माना जाता है.