नए साल के दूसरे दिन गिग वर्कर्स को सरकार ने दिया बड़ा तोहफा, बीमा-पेंशन से लेकर मिलेंगे ये लाभ; जानें नियम
भारत में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स की सामाजिक सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है. नए सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत इन श्रमिकों को मिलने वाले लाभों के लिए न्यूनतम कार्य-दिवसों की सीमा तय करने का प्रस्ताव किया गया है. श्रम मंत्रालय द्वारा सार्वजनिक टिप्पणी के लिए जारी किए गए मसौदा नियमों में गिग इकोनॉमी से जुड़े करोड़ों वर्कर्स को औपचारिक सुरक्षा दायरे में लाने की रूपरेखा पेश की गई है.;
भारत में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स की सामाजिक सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है. नए सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत इन श्रमिकों को मिलने वाले लाभों के लिए न्यूनतम कार्य-दिवसों की सीमा तय करने का प्रस्ताव किया गया है. श्रम मंत्रालय द्वारा सार्वजनिक टिप्पणी के लिए जारी किए गए मसौदा नियमों में गिग इकोनॉमी से जुड़े करोड़ों वर्कर्स को औपचारिक सुरक्षा दायरे में लाने की रूपरेखा पेश की गई है.
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इन प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को स्वास्थ्य, बीमा और भविष्य की पेंशन जैसी सुविधाएं प्रदान करना है, ताकि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों को भी संगठित सुरक्षा मिल सके. इसके साथ ही एग्रीगेटर्स की जवाबदेही तय करने और वर्कर्स का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने पर भी जोर दिया गया है.
90-120 दिन करना होगा काम
मसौदा नियमों के अनुसार, किसी गिग या प्लेटफॉर्म वर्कर को सामाजिक सुरक्षा लाभों का पात्र बनने के लिए एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 90 दिनों तक किसी एक एग्रीगेटर के साथ जुड़े रहना होगा. वहीं, यदि कोई वर्कर एक से अधिक एग्रीगेटर्स के साथ काम करता है, तो उसके लिए यह सीमा 120 दिन तय की गई है.
आय शुरू होते ही मानी जाएगी सेवा अवधि
नियमों में स्पष्ट किया गया है कि जिस दिन से कोई कर्मचारी आय अर्जित करना शुरू करता है, उसी दिन से उसे कार्यरत माना जाएगा, चाहे कमाई की राशि कितनी भी कम क्यों न हो. यदि कोई गिग वर्कर एक ही दिन में कई प्लेटफॉर्म्स से जुड़ा रहता है, तो प्रत्येक एग्रीगेटर के लिए वह दिन अलग-अलग गिना जाएगा. उदाहरण के तौर पर, एक दिन में तीन एग्रीगेटर्स से जुड़े वर्कर के लिए उसे तीन कार्य-दिवस माना जाएगा.
प्रस्तावित नियमों के तहत पात्र गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स की परिभाषा को व्यापक रखा गया है. इसमें एग्रीगेटर द्वारा सीधे, उसकी सहयोगी या सहायक कंपनी, सीमित देयता साझेदारी (LLP) या किसी तीसरे पक्ष के माध्यम से नियोजित सभी वर्कर्स को शामिल किया जाएगा.
स्वास्थ्य, बीमा और पेंशन का मिलेगा लाभ
नए श्रम कानूनों के तहत गिग वर्कर्स के लिए स्वास्थ्य बीमा, जीवन बीमा और व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा को अनिवार्य किया गया है. इसके अलावा, प्लेटफॉर्म और गिग वर्कर्स के योगदान के आधार पर भविष्य में पेंशन की व्यवस्था भी की जा सकती है. सरकार द्वारा प्रस्तावित अन्य कल्याणकारी योजनाएं भी इन वर्कर्स पर लागू होंगी.
ई-श्रम पोर्टल पर अनिवार्य पंजीकरण
श्रम मंत्रालय ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स का पंजीकरण ‘ई-श्रम’ पोर्टल पर शुरू कर दिया है. पंजीकृत वर्कर्स को ‘आयुष्मान भारत’ योजना का लाभ भी मिलेगा. नियमों के अनुसार, 16 वर्ष से अधिक आयु के सभी गिग वर्कर्स के लिए आधार से जुड़ा पंजीकरण अनिवार्य होगा.
यूनिवर्सल अकाउंट नंबर और पहचान पत्र
प्रत्येक एग्रीगेटर को अपने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स का विवरण केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित पोर्टल पर साझा करना होगा. इसका उद्देश्य प्रत्येक वर्कर के लिए एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर तैयार करना है, बशर्ते कि वह पहले से पंजीकृत न हो. इसके साथ ही हर पात्र पंजीकृत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर को एक पहचान पत्र जारी करने का भी प्रस्ताव है, जो डिजिटल या किसी अन्य स्वरूप में हो सकता है.
कब होंगे वर्कर्स अपात्र?
नियमों के मुताबिक, कोई गिग वर्कर 60 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद सामाजिक सुरक्षा लाभों के लिए अपात्र हो जाएगा. इसके अलावा, यदि किसी वर्कर ने पिछले वित्तीय वर्ष में किसी एक एग्रीगेटर के साथ 90 दिनों तक या कई एग्रीगेटर्स के साथ कुल 120 दिनों तक काम नहीं किया है, तो वह भी इन लाभों के दायरे से बाहर हो जाएगा.