Budget 2026: इनकम टैक्स में नहीं हुआ कोई बदलाव, लेकिन ITR रिविजन में राहत, समझें पूरा कैलकुलेशन
Budget 2026 में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन टैक्सपेयर्स के लिए ITR रिविजन में बड़ी राहत दी गई है. अब रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन 31 मार्च तक बढ़ा दी गई है. इससे टैक्सपेयर्स को अपनी इनकम डिटेल्स अपडेट करने और गलती होने पर पेनाल्टी से बचने का अतिरिक्त समय मिलेगा.;
Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार देश का बजट पेश की हैं. इस बार बजट में आम आदमी के लिए इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है और इस तरह आम टैक्सपेयर जिस राहत की उम्मीद लगाए बैठा था, उसे वो नहीं मिली. वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है. वहीं इनकम टैक्स एक्ट 2025 को लागू करने की तारीख भी वित्त मंत्री ने बता दी. इनकम टैक्स एक्ट (IT Act 2025) एक अप्रैल 2025 से लागू होगा.
बजट में इनकम टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत दी है. अब टैक्सपेयर्स को अपने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में बदलाव या सुधार करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा. बजट के अनुसार रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 मार्च तक बढ़ा दी गई है, जो पहले 31 दिसंबर थी. इस बदलाव से टैक्सपेयर्स को अपनी इनकम डिटेल्स अपडेट करने या पहले दाखिल किए गए रिटर्न में नई जानकारी जोड़ने के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय मिलेगा. इससे संभावित गलती या पेनाल्टी का जोखिम भी काफी कम हो जाएगा.
वित्त मंत्री ने यह भी एलान किया कि इनकम टैक्स एक्ट (IT Act 2025) एक अप्रैल 2025 से लागू होगा.
बजट 2026 में इनकम टैक्स से जुड़े अहम एलान
- ITR फाइलिंग टाइमलाइन: TR-1 और ITR-2 फाइल करने की डेडलाइन 31 जुलाई तक रहेगी.
- रिवाइज्ड रिटर्न: अब 31 मार्च तक रिवाइज्ड रिटर्न फाइल किया जा सकेगा, इसके लिए मामूली शुल्क लगेगा.
- गलत जानकारी पर पेनाल्टी: इनकम की गलत जानकारी देने पर पेनाल्टी बढ़ाकर टैक्स की रकम का 100% कर दिया गया है.
- विदेशी संपत्तियों का खुलासा: छोटे टैक्सपेयर्स छह महीने तक विदेशी संपत्तियों का खुलासा कर सकते हैं.
- अचल संपत्तियों का खुलासा: अब अचल संपत्तियों का खुलासा न करने पर जुर्माना लगेगा.
- ओवरसीज टूर पैकेज पर TCS में कटौती: विदेशी टूर पैकेज पर लगने वाले TCS को घटाकर 2% कर दिया गया है (पहले 5%-20% था).
- NRI के लिए अचल संपत्ति बिक्री: अब NRI द्वारा अचल संपत्तियों की बिक्री पर TDS लागू होगा.
- शेयर बायबैक पर टैक्स: सभी शेयरहोल्डर्स के लिए शेयर बायबैक पर कैपिटल गेन टैक्स देना अनिवार्य होगा.
वित्त मंत्री ने 2025 में 12.75 लाख रुपये तक की आय वाले लोगों को टैक्स फ्री किया था. इस घोषणा के तहत जिनकी आय 12 लाख रुपये तक थी, उन्हें कोई टैक्स नहीं देना था. 75,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन को जोड़ने के बाद यह छूट 12.75 लाख रुपये तक पहुंच गई थी.
साल 2025-26 का टैक्स स्लैब
₹0 – ₹4 लाख: शून्य टैक्स (0%)
₹4 लाख – ₹8 लाख: 5%
₹8 लाख – ₹12 लाख: 10%
₹12 लाख – ₹16 लाख: 15%
₹16 लाख – ₹20 लाख: 20%
₹20 लाख – ₹24 लाख: 25%
₹24 लाख से अधिक: 30%
मुख्य बिंदु और राहतें-
12 लाख तक की आय पर शून्य टैक्स: सेक्शन 87A के तहत 12 लाख रुपये तक की आय कर-मुक्त.
स्टैंडर्ड डिडक्शन: नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए ₹75,000 की छूट. कुल कर-मुक्त आय 12.75 लाख तक.
30% का स्लैब: अब केवल ₹24 लाख से अधिक आय पर लागू.
पुराना टैक्स स्लैब: Old Tax Regime में कोई बदलाव नहीं.
मध्यम वर्ग और मेहनतकश परिवारों को राहत: निवेश और टैक्स छूट के जरिए आर्थिक सहूलियत.
नया आयकर अधिनियम 2025
बजट में घोषणा की गई है कि आयकर अधिनियम 2025 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होगा. इसके तहत सभी आयकर फॉर्म और नियम सरलीकृत रूप में अधिसूचित किए जाएंगे, ताकि आम करदाता आसानी से समझकर उनका पालन कर सकें. फॉर्म और प्रक्रियाओं को इस तरह डिजाइन किया गया है कि करदाता अपने टैक्स दायित्व को सहजता से पूरा कर सकें और लंबे समय तक जटिलताओं का सामना न करना पड़े.
टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन रिफॉर्म्स
कर प्रशासन को और प्रभावी बनाने के लिए भारतीय लेखांकन मानक (IndAS) में आय परिकलन और प्रकटन मानकों को शामिल करने हेतु कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की संयुक्त समिति का गठन प्रस्तावित है. वित्त वर्ष 2027-28 से ICDS आधारित Separate accounting requirements को खत्म कर दिया जाएगा. इसके अलावा, सेफ हार्बर नियमावली के तहत लेखाकार यानी अकाउंटेंट की परिभाषा को तर्कसंगत बनाकर प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप भारत को वैश्विक अग्रणी स्वदेशी लेखांकन केंद्र बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं.