Budget 2026: क्या होते हैं डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स, बजट में आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर?
Budget 2026 में टैक्स से जुड़े फैसले आम आदमी की जेब, महंगाई और बाजार की दिशा तय करेंगे. डायरेक्ट टैक्स जैसे इनकम टैक्स का असर सीधे कमाई पर पड़ता है, जबकि इनडायरेक्ट टैक्स जैसे GST और कस्टम ड्यूटी रोजमर्रा की चीजों की कीमत तय करते हैं.;
आज आम बजट पेश होने वाला है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी. हर साल जब आम बजट आता है, तो टैक्स से जुड़े फैसले सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहते हैं. वजह साफ है. टैक्स ही वो पुल है जो सरकार की नीतियों को आम आदमी की जेब से जोड़ता है. बजट 2026 में भी डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स पर फैसले महंगाई, बाजार की चाल और कारोबार की सेहत तय करेंगे. इसलिए टैक्स को सिर्फ आंकड़ों के तौर पर नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी के असर के रूप में समझना जरूरी है.
डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स, दोनों सरकार की कमाई के अहम स्रोत हैं, लेकिन इनका असर अलग-अलग तरीके से पड़ता है. डायरेक्ट टैक्स सीधे आपकी आय पर लगता है, जबकि इनडायरेक्ट टैक्स सामान और सेवाओं की कीमतों में छुपा होता है. बजट में जरा-सा बदलाव भी या तो आपकी सैलरी स्लिप को प्रभावित करता है या फिर बाजार में चीजों के दाम बदल देता है.
डायरेक्ट टैक्स क्या होते हैं?
डायरेक्ट टैक्स वे कर हैं, जो व्यक्ति या कंपनी अपनी कमाई पर सीधे सरकार को चुकाती है. इसका बोझ किसी और पर नहीं डाला जा सकता. यही वजह है कि इन्हें ‘सीधा टैक्स’ कहा जाता है. इन टैक्सों का मकसद ज्यादा कमाने वालों से ज्यादा योगदान लेकर सामाजिक संतुलन बनाए रखना होता है. भारत में डायरेक्ट टैक्स की निगरानी और वसूली का काम आयकर विभाग करता है.
डायरेक्ट टैक्स के मुख्य प्रकार:
- इनकम टैक्स – सैलरी, बिजनेस या अन्य आय पर
- कॉरपोरेट टैक्स – कंपनियों के मुनाफे पर
- कैपिटल गेन टैक्स – शेयर, जमीन, सोना बेचने पर
- STT (सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स) – शेयर बाजार लेन-देन पर
- MAT/AMT – खास परिस्थितियों में कंपनियों और संस्थाओं पर
डायरेक्ट टैक्स का असर
डायरेक्ट टैक्स में बदलाव का असर सीधे आपकी बचत और निवेश पर पड़ता है. अगर टैक्स स्लैब में राहत मिलती है, तो हाथ में ज्यादा पैसा बचता है. इससे खर्च और निवेश बढ़ता है, जो अर्थव्यवस्था को गति देता है. वहीं, टैक्स बढ़ने पर उपभोग घटता है और बाजार में सुस्ती आ सकती है.
इनडायरेक्ट टैक्स क्या होते हैं?
इनडायरेक्ट टैक्स आपकी कमाई पर सीधे नहीं लगता, बल्कि उस वक्त वसूला जाता है जब आप कोई सामान या सेवा खरीदते हैं. दुकानदार या कंपनी यह टैक्स आपसे लेकर सरकार को जमा करती है. इसलिए अक्सर लोग इसे महसूस नहीं करते, लेकिन यही टैक्स महंगाई का बड़ा कारण बनता है.
मुख्य इनडायरेक्ट टैक्स:
- GST (वस्तु एवं सेवा कर) – लगभग सभी सामान और सेवाओं पर
- कस्टम ड्यूटी – आयातित सामान पर
- सेस – पेट्रोल, डीजल, तंबाकू, कोयला जैसी चीजों पर
इनडायरेक्ट टैक्स से सरकार की बड़ी कमाई
सरकार की कुल टैक्स आय का बड़ा हिस्सा इनडायरेक्ट टैक्स से आता है. GST लागू होने के बाद टैक्स सिस्टम आसान जरूर हुआ है, लेकिन कीमतों पर इसका असर लगातार बना रहता है. बजट में अगर GST या कस्टम ड्यूटी बदली जाती है, तो आम आदमी तुरंत उसका असर महसूस करता है.
महंगाई और बाजार से इनडायरेक्ट टैक्स का रिश्ता
इनडायरेक्ट टैक्स का असर सबसे पहले महंगाई पर पड़ता है.
- मोबाइल पार्ट्स पर कस्टम ड्यूटी घटे → मोबाइल सस्ते
- दवाइयों पर GST कम हो → इलाज सस्ता
- सिगरेट या कोल्ड ड्रिंक पर सेस बढ़े → दाम बढ़े
यानी इन टैक्सों से सरकार न सिर्फ राजस्व जुटाती है, बल्कि उपभोग की दिशा भी तय करती है.
बजट 2026 में टैक्स से क्या बदलेगा गेम?
बजट 2026 में सरकार के सामने चुनौती यह होगी कि डायरेक्ट टैक्स से मिडिल क्लास को राहत दी जाए और इनडायरेक्ट टैक्स के जरिए महंगाई को कंट्रोल में रखा जाए. संतुलन सही बैठा, तो बाजार को रफ्तार मिलेगी. गड़बड़ हुई, तो जेब पर दबाव और बाजार में अनिश्चितता बढ़ सकती है. यही वजह है कि बजट में टैक्स के फैसले सबसे ज्यादा मायने रखते हैं.