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भारत आने वाला Zakir Naik! रिजीम चेंज का इंतजार... AUDIO लीक होने पर सोशल में मचा बवाल! मोदी-राहुल को लेकर भी कही ये बात

मलेशिया में रह रहे विवादित इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक को एक बार फिर से चर्चा में बन गए जिसके सोशल मीडिया पर जाकिर का रिजीम चेंज और भारत की वापसी का आडियो है. जिसे भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा ने उस पर बयान दिए हैं विपक्ष को भी लपेटे में लिया है. तो आइए जानते हैं कि असली कहानी क्या है?

भारत आने वाला Zakir Naik! रिजीम चेंज का इंतजार... AUDIO लीक होने पर सोशल में मचा बवाल! मोदी-राहुल को लेकर भी कही ये बात
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सागर द्विवेदी
सागर द्विवेदी8 Mins Read

Updated on: 21 Oct 2026 9:26 PM IST

विवादित इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक एक बार फिर चर्चा में है. मलेशिया में रह रहे जाकिर नाइक को लेकर रिपब्लिक टीवी ने स्टिंग ऑपरेशन किया है. चैनल की ओर से जारी फुटेज में जाकिर नाइक कथित तौर पर कहता दिखाई देता है कि वह भारत तभी लौटेगा, जब BJP सत्ता से बाहर हो जाएगी. रिपोर्ट के मुताबिक, उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी और देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर भी अपनी राय रखी और उसने ये भी कहा कि वह भारत इसलिए नहीं जा रहा है.

अभी अगर वह भारत जाता है तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा यानी उसका कहना साफ है कि वे सत्ता परिवर्तन का इंतजार कर रहा है अब सोशल मीडिया पर जाकिर नाइक काफी ट्रेडिंग में छाया हुआ तो आइए उसकी कुंडली पर एक नजर डालते हैं कि आखिर उसने ऐसा क्या कांड किया था कि 10 साल से मलेशिया में रह रहा है और भारत आने के नाम पर खौफ में चला जाता है.

भारत आने वाला है जाकिर नाइक?

चैनल के मुताबिक 21 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, संवाददाता अनिरुद्ध भकत ने मलेशिया के पुत्राजया स्थित तमारा रेजिडेंस में जाकिर नाइक तक पहुंच बनाई. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संवाददाता ने उसके एक सहयोगी से WhatsApp के जरिए संपर्क किया और टावर C की 21वीं मंजिल पर उससे मुलाकात की. चैनल के अनुसार, यह मुलाकात करीब एक घंटे 45 मिनट तक चली. रिपोर्ट में सामने आए कथित बयानों के मुताबिक, जाकिर नाइक ने भारत लौटने के सवाल पर कहा कि वह BJP के सत्ता से बाहर होने के बाद ही वापस आएगा. उसने यह भी दावा किया कि BJP 2029 के लोकसभा चुनाव तक सत्ता में नहीं रह सकती. रिपोर्ट के मुताबिक दावा किया जा रहा है कि जाकिर ने राहुल गांधी को मोदी से बेहतर बताया और कांग्रेस के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार को एक विकल्प के तौर पर पसंद किया.

कौन है जाकिर नाइक?

जाकिर नाइक का पूरा नाम डॉ. जाकिर अब्दुल करीम नाइक है. वह मुंबई में इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (IRF) नामक संस्था चलाता था और धार्मिक व्याख्यानों के जरिए पहचान बनाने लगा. वह इस्लाम, दूसरे धर्मों और धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या पर सार्वजनिक भाषण देता था. उसके व्याख्यानों के वीडियो इंटरनेट और विभिन्न मीडिया मंचों पर प्रसारित होते रहे. हालांकि, उसके कई भाषणों और गतिविधियों को लेकर विवाद खड़े हुए. भारतीय सरकार ने आरोप लगाया कि उसके भाषण धार्मिक समुदायों के बीच वैमनस्य और नफरत को बढ़ावा देते थे. इन्हीं आरोपों और IRF की गतिविधियों के आधार पर केंद्र सरकार ने नवंबर 2016 में संस्था को गैरकानूनी घोषित किया. जाकिर नाइक इन आरोपों को खारिज करता रहा है.

2016 में भारत छोड़कर क्यों चला गया जाकिर नाइक?

जाकिर नाइक के भारत छोड़ने की कहानी जुलाई 2016 में बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुए आतंकी हमले के बाद चर्चा में आई. ढाका के होली आर्टिजन बेकरी कैफे पर हुए हमले के बाद मीडिया रिपोर्टों में सामने आया कि हमले में शामिल एक आरोपी ने सोशल मीडिया पर जाकिर नाइक के भाषणों से जुड़ी सामग्री साझा की थी. इसके बाद जाकिर नाइक के भाषणों और उसकी संस्था की गतिविधियों को लेकर भारत में भी जांच तेज हुई. हालांकि, किसी हमलावर द्वारा उसके भाषण साझा करने की बात अपने आप में यह साबित नहीं करती कि जाकिर नाइक ने उस हमले की योजना बनाई थी या उसमें प्रत्यक्ष भूमिका निभाई थी. 2016 में वह भारत से बाहर चला गया और तब से भारत वापस नहीं लौटा है. वह मलेशिया में रह रहा है. उसके भारत से बाहर रहने और जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बीच संबंध को समझने के लिए उस समय की कानूनी घटनाओं पर नजर डालना जरूरी है.

जाकिर नाइक के खिलाफ NIA ने क्या कार्रवाई की?

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 18 नवंबर 2016 को जाकिर नाइक और इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन से जुड़े मामले में केस दर्ज किया था. एजेंसी के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 153A और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की धाराओं 10, 13 और 18 के तहत दर्ज किया गया. NIA ने आरोप लगाया कि जाकिर नाइक और उससे जुड़े लोगों के भाषणों तथा गतिविधियों के जरिए विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच दुश्मनी और नफरत को बढ़ावा दिया गया और गैरकानूनी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया गया. एजेंसी ने अक्टूबर 2017 में मामले में आरोपपत्र दाखिल किया था. NIA के उपलब्ध रिकॉर्ड में मामले की स्थिति 'ट्रायल शुरू' बताई गई है. यहां ध्यान रखना जरूरी है कि जांच एजेंसी की ओर से लगाए गए आरोप और अदालत में दोषसिद्धि दो अलग बातें हैं. किसी मामले में आरोपपत्र दाखिल होना अपने आप में आरोपी को दोषी ठहराया जाना नहीं है.

IRF को क्यों प्रतिबंधित किया गया?

जाकिर नाइक की संस्था इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (IRF) पर केंद्र सरकार ने 17 नवंबर 2016 को UAPA के तहत प्रतिबंध लगाया था. सरकार ने आरोप लगाया कि संस्था और उसके सदस्यों की गतिविधियां विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच वैमनस्य बढ़ाने वाली थीं और देश की सुरक्षा के लिए नुकसानदेह थीं. गृह मंत्रालय के आदेश के बाद संस्था को गैरकानूनी संगठन घोषित किया गया. इसके बाद प्रतिबंध को लेकर कानूनी प्रक्रिया भी चली. वर्ष 2022 के सरकारी राजपत्र में दर्ज न्यायाधिकरण संबंधी कार्यवाही में NIA के आरोपपत्र और संस्था की गतिविधियों से संबंधित सामग्री का उल्लेख किया गया है. इस कार्रवाई का अर्थ यह है कि प्रतिबंध IRF पर लगाया गया था. जाकिर नाइक के खिलाफ व्यक्तिगत आपराधिक मामलों की कानूनी स्थिति को अलग से समझना चाहिए.

जाकिर नाइक पर मनी लॉन्ड्रिंग के क्या आरोप हैं?

IRF और जाकिर नाइक से जुड़े मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी जांच शुरू की थी. दिसंबर 2016 में ED ने मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत मामला दर्ज किया. एजेंसी की जांच का उद्देश्य कथित तौर पर अपराध से प्राप्त धन, वित्तीय लेनदेन और संस्था से जुड़े पैसों के स्रोत की पड़ताल करना था. जाकिर नाइक ने भारतीय एजेंसियों की कार्रवाई और अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है. रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, उसने स्टिंग के दौरान भी भारतीय कानूनी जांचों और आरोपों को खारिज किया. लेकिन किसी आरोपी का आरोपों को नकारना और जांच एजेंसियों का आरोप लगाना, दोनों को कानूनी प्रक्रिया के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए. मामले का अंतिम निष्कर्ष अदालत की कार्यवाही से तय होगा.

क्या भारत ने जाकिर नाइक को वापस लाने की कोशिश की?

हां. भारत सरकार ने मलेशिया से जाकिर नाइक की गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण से संबंधित अनुरोध किए थे. गृह मंत्रालय की ओर से 25 जुलाई 2018 को संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक, भारत ने जनवरी 2018 में मलेशिया को अस्थायी गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण से संबंधित अनुरोध भेजा था. सरकार ने यह भी बताया था कि जाकिर नाइक के खिलाफ इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने का अनुरोध किया गया था, लेकिन उस समय इंटरपोल ने इसे समय से पहले की कार्रवाई माना था. बाद में भारत की ओर से नया अनुरोध भेजा गया. इससे साफ है कि जाकिर नाइक की वापसी का मुद्दा केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रिया भी शामिल रही है.

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