Begin typing your search...

कौन है पाकिस्तान का वो बिजनेसमैन जिसने 125 साल पुराने गुरुद्वारे को कर दिया ध्वस्त, क्या इतनी है पावर, भारत ने क्या कहा?

पाकिस्तान में एक 125 साल पुराने गुरुद्वारे को तोड़ने का मामला सामने आया है. रिपोर्ट के मुताबिक एक स्थानीय बिजनेसमैन ने अवैध रूप से रात को इस घटना को अंजाम दिया, जिसपर बवाल मचा हुआ है.

125 years old gurudwara demolition
X

125 years old gurudwara demolition

( Image Source:  X/ @cihs_india )

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के फारूकाबाद में एक बड़े विवाद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ा दिया है. लाहौर से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित 125 साल पुराने ऐतिहासिक ‘गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब’ को एक स्थानीय व्यवसायी और कथित भू-माफिया द्वारा अवैध रूप से ध्वस्त कर दिए जाने का मामला सामने आया है.

यह घटना 24 जून 2026 की रात को अंजाम दी गई, जिसके बाद भारत सरकार और सिख समुदाय ने कड़ी नाराजगी और विरोध जताया है. आरोप है कि बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के इस गुरुद्वारे को जमीन कब्जाने की नीयत से गिरा दिया गया.

कैसे ढहाया गया ऐतिहासिक गुरुद्वारा?

सूत्रों और स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब को एक प्रभावशाली स्थानीय कारोबारी और भू-माफिया नेटवर्क ने मिलकर निशाना बनाया. दावा है कि इस पूरी कार्रवाई के लिए किसी भी प्रकार की आधिकारिक अनुमति (NOC) नहीं ली गई थी. देर रात अंधेरे में गुरुद्वारे के मुख्य हिस्सों को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया. इस घटना ने पाकिस्तान में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

कौन है जिम्मेदार कारोबारी?

फिलहाल इस पूरे मामले में शामिल कथित व्यवसायी की आधिकारिक पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है. पाकिस्तान सरकार और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा ने जांच के आदेश दिए हैं. अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई एक स्थानीय कारोबारी द्वारा की गई, जिसका उद्देश्य जमीन पर अवैध कब्जा करना था. पाकिस्तानी मीडिया में भी आरोपी को केवल स्थानीय व्यवसायी (Local Businessman) के रूप में ही संबोधित किया जा रहा है.

क्या इतनी ताकतवर है भू-माफिया लॉबी?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपी ने इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) से कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) नहीं लिया था. स्थानीय सिख संगठनों का आरोप है कि घटना के बाद शुरुआती समय में पुलिस और प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे यह संकेत मिलता है कि आरोपी का स्थानीय तंत्र में प्रभाव हो सकता है. हालांकि, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और सिख समुदाय के विरोध के बाद मामला तूल पकड़ गया.

ननकाना साहिब के सिख प्रतिनिधि भूपिंदर सिंह और स्थानीय समुदाय द्वारा सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर विरोध जताए जाने के बाद मामला गंभीर हो गया. इसके बाद पाकिस्तान पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज को मामले का संज्ञान लेना पड़ा और जांच के निर्देश जारी किए गए.

क्या है भारत का रुख?

भारत सरकार ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए पाकिस्तान से तुरंत कार्रवाई और जांच की मांग की है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा "हमें पाकिस्तान के फारूकाबाद में स्थित ऐतिहासिक 125 वर्षीय पवित्र गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब को ध्वस्त किए जाने की बेहद दुखद खबरें मिली हैं. हम सिखों के इस पूजनीय तीर्थस्थल पर की गई इस घोर निंदनीय और लक्षित बर्बरता की कड़ी निंदा करते हैं. इसका विध्वंस, साथ ही स्थानीय अधिकारियों या इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न किए जाने की खबरें, गंभीर चिंता का विषय हैं."

अगला लेख