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कौन हैं पाकिस्तानी नेता मौलाना फजलुर रहमान, जिन्होंने असीम मुनीर को दी सीधी चुनौती? बोले- वर्दी उतारो और मैदान में आओ

पाकिस्तान के एक प्रमुख विपक्षी नेता ने सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को वर्दी उतारकर चुनाव लड़ने की चुनौती दी है। उन्होंने सेना पर राजनीति में दखल देने और बलूचिस्तान संकट से निपटने में विफल रहने का आरोप लगाया। इस बयान के बाद पाकिस्तान में सिविल-मिलिट्री संबंधों को लेकर बहस तेज हो गई है।

Maulana Fazlur Rehman  Challenges  Asim Munir to Quit Army and Contest Elections
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 Maulana Fazlur Rehman ने Asim Munir को दी चुनौती

( Image Source:  File Photo )

Who is Maulana Fazlur Rehman: पाकिस्तान में सेना और राजनीतिक नेतृत्व के बीच तनातनी एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है. विपक्षी नेता मौलाना फजलुर रहमान ने सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें वर्दी उतारकर चुनाव लड़ने की चुनौती दे दी है. उन्होंने कहा कि अगर जनरल मुनीर को अपनी लोकप्रियता और जनता के समर्थन पर भरोसा है तो उन्हें सेना छोड़कर अपनी राजनीतिक पार्टी बनानी चाहिए और आम चुनाव में उतरना चाहिए.

एक सार्वजनिक रैली को संबोधित करते हुए मौलाना फजलुर रहमान ने आरोप लगाया कि जनरल असीम मुनीर पर्दे के पीछे रहकर देश की राजनीति और आर्थिक फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "अगर आपको लगता है कि जनता आपकी नीतियों और आपकी पसंद की सरकार के साथ है, तो वर्दी उतारिए, अपनी पार्टी बनाइए और चुनाव मैदान में आइए. फिर पाकिस्तान की जनता तय करेगी कि आपको समर्थन मिलता है या नहीं."

'विपक्षी दलों को किया जा रहा कमजोर'

मौलाना ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था लगातार राजनीति में दखल दे रही है. विपक्षी दलों को कमजोर किया जा रहा है और स्वतंत्र मीडिया पर भी दबाव बनाया जा रहा है. उनका कहना था कि लोकतंत्र में सत्ता का फैसला जनता को करना चाहिए, न कि सरकारी तंत्र के जरिए जनादेश तैयार किया जाए.

बलूचिस्तान को लेकर भी साधा निशाना

रैली के दौरान मौलाना फजलुर रहमान ने बलूचिस्तान की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को लेकर भी सेना और सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों, सरकारी ढांचे और परिवहन नेटवर्क पर लगातार हमले बढ़े हैं, लेकिन सरकार हालात संभालने में नाकाम रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने राजनीतिक बातचीत की बजाय सैन्य कार्रवाई और दमन का रास्ता चुना, जिससे बलूचिस्तान और केंद्र सरकार के बीच दूरी और बढ़ गई.

मौलाना ने कहा, "आप सेना मुख्यालय में तानाशाह की तरह घूमते हैं, लेकिन आपके कार्यकाल में राज्य की पकड़ कमजोर होती गई. जिस दिन राजनीतिक संवाद की जगह दमन ने ले ली, उसी दिन बलूचिस्तान हमारे हाथ से निकल गया. किसी क्षेत्र को उसके लोगों को दुश्मन समझकर नहीं जीता जा सकता."

सवालों के घेरे में सेना

यह बयान ऐसे समय में आया है, जब जनरल असीम मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तान की सेना को देश की सुरक्षा चुनौतियों, आर्थिक संकट और राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ती भूमिका को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि पाकिस्तान में सेना देश की सबसे प्रभावशाली संस्थाओं में गिनी जाती है और सुरक्षा, विदेश नीति तथा कई घरेलू मामलों में उसकी अहम भूमिका रहती है. इसके बावजूद हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर सेना की भूमिका को लेकर बहस तेज हुई है.

पाकिस्तान की सेना ने क्या कहा?

फिलहाल पाकिस्तान की सेना के मीडिया विंग आईएसपीआर (ISPR) ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. पाकिस्तान में पहले भी सेना की सार्वजनिक आलोचना करने वाले नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कानूनों के तहत कार्रवाई की जा चुकी है.

कौन हैं मौलाना फजलुर रहमान?

  1. मौलाना फजलुर रहमान पाकिस्तान के एक अत्यंत प्रभावशाली और वरिष्ठ दक्षिणपंथी राजनेता व इस्लामी विद्वान हैं. वह पाकिस्तान की प्रमुख धार्मिक-राजनीतिक पार्टी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (JUI-F) के अध्यक्ष हैं.
  2. देश की सत्ता और राजनीति में किंगमेकर की भूमिका निभाने के कारण रहमान को 'मौलाना डीजल' और 'पाकिस्तानी राजनीति का मौसम वैज्ञानिक' भी कहा जाता है.
  3. मौलाना फजलुर रहमान विपक्षी दलों के बड़े ऐतिहासिक गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (PDM) के संस्थापक अध्यक्ष रहे हैं. इसी गठबंधन ने 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान को सत्ता से बेदखल किया था.
  4. मौलाना 1988 से 2018 के बीच कई बार पाकिस्तान की नेशनल असेंबली (संसद) के सदस्य रह चुके हैं. इसके अलावा, वे 2004 से 2007 तक पाकिस्तान संसद में विपक्ष के नेता
    (Leader of the Opposition)
    भी रहे हैं. वर्तमान में भी वह नेशनल असेंबली के सक्रिय सदस्य हैं.
  5. मौलाना फजलुर रहमान को वैचारिक रूप से कट्टरपंथी और अफगानिस्तान की तालिबान सरकार का खुला समर्थक माना जाता है. उनके मदरसों के नेटवर्क से निकले कई छात्र तालिबान आंदोलन का हिस्सा रहे हैं, जिसके कारण अफगानिस्तान के साथ उनके गहरे राजनीतिक संबंध हैं.
पाकिस्तानआसिम मुनीर
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