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भारत पर 500% टैरिफ, खामेनेई को मारने की सलाह और PAK को लेकर नसीहत, कौन थे ट्रंप के करीबी लिंडसे ग्राहम, जो नहीं रहे, कहा जाता था वार हॉक

अमेरिकी सीनेटर और डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी लिंडसे ग्राहम का 71 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. यही वो नेता थे जिन्होंने भारत पर 500 फीसद टैरिफ लगाने का बयान दिया था.

भारत पर 500% टैरिफ, खामेनेई को मारने की सलाह और PAK को लेकर नसीहत, कौन थे ट्रंप के करीबी लिंडसे ग्राहम, जो नहीं रहे, कहा जाता था वार हॉक
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( Image Source:  @ANI )
समी सिद्दीकी
By: समी सिद्दीकी9 Mins Read

Updated on: 13 July 2026 1:29 PM IST

अमेरिका के साउथ कैरोलिना से रिपब्लिकन पार्टी के वरिष्ठ सीनेटर और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी लिंडसे ग्राहम का शनिवार शाम 71 वर्ष की उम्र में aortic डिसेक्शन नाम की बीमारी से मौत हो गई. वह भारत को लेकर एक प्रस्ताव परके कारण लगातार सुर्खियों में थे.

उनके कार्यालय ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट जारी कर उनके निधन की पुष्टि की. ग्राहम अपने लंबे राजनीतिक जीवन के दौरान विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर दिए गए तीखे बयानों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहे. लिंडसे ग्राहम के कार्यालय ने X पर जारी पोस्ट में उनके निधन की पुष्टि की. बताया गया कि शनिवार शाम एक संक्षिप्त और अचानक हुई बीमारी के बाद उनका निधन हो गया.

लिंडसे ग्राहम ने अमेरिकी राजनीति में तीन दशक से अधिक समय तक सक्रिय भूमिका निभाई. वह 2003 से अपनी मृत्यु तक अमेरिकी सीनेट में साउथ कैरोलिना का प्रतिनिधित्व करते रहे. इससे पहले वह 1995 से 2003 तक अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में साउथ कैरोलिना के तीसरे संसदीय जिले का प्रतिनिधित्व कर चुके थे. हाल ही में उन्होंने 2026 के चुनाव के लिए रिपब्लिकन पार्टी का नामांकन भी जीत लिया था, लेकिन आम चुनाव से पहले ही उनका निधन हो गया.

किस बीमारी से थे पीड़ित?

लिंडसे ग्राहम aortic dissection नाम की बीमारी से पीड़ित थे. इसमें दिल की अहम artery के अंदरूनी हिस्से में फटन पैदा हो जाती है. ये एक बेहद घातक कंडीशन है.

भारत पर किस बयान से बटौरी थी सुर्खियां?

इस साल जनवरी में लिंडसे ग्राहम ने कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्राहम-ब्लूमेंथल प्रतिबंध विधेयक (Graham-Blumenthal Sanctions Bill) को मंजूरी दे दी है. ग्राहम के मुताबिक, इस बिल पर उन्होंने कई महीनों तक काम किया था. उन्होंने कहा था कि इस बिल के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिलेगा, जो रूस से तेल खरीदते हैं. इस सूची में भारत का भी नाम शामिल था.

ग्राहम का कहना था कि इस कानून के जरिए ट्रंप उन देशों को सजा दे सकेंगे, जो सस्ता रूसी तेल खरीदकर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की युद्ध मशीन को आर्थिक मदद पहुंचा रहे हैं. फरवरी में ग्राहम ने दावा किया था कि भारत ने रूस से तेल खरीद में "काफी कमी" की है. उन्होंने भारत पर लगाए गए अमेरिकी टैरिफ को यह दिखाने वाला उदाहरण बताया था कि नीतिगत फैसलों के जरिए किसी देश के व्यवहार को प्रभावित किया जा सकता है.

किन और देशों पर दिया थे कड़े बयान?

भारत के अलावा वह ईरान और पाकिस्तान के खिलाफ तल्ख बयान दे चुके हैं. फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम Sunday Morning Futures में दिए गए एक इंटरव्यू के दौरान ग्राहम ने ईरान को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की नीति का समर्थन किया था. उन्होंने उस समय ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को "आधुनिक दौर का हिटलर", "धार्मिक नाजी" और "भयानक व्यक्ति" बताया था.

ग्राहम ने कहा था कि अब उनके जाने का समय आ गया है और ईरानी जनता भी यही चाहती है. उन्होंने ट्रंप से कहा था कि जो नेतृत्व अपने ही लोगों को मार रहा है, उसे खत्म कर देना चाहिए. ग्राहम का यह भी कहना था कि ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व को हटाने से क्षेत्र में शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी.

पाकिस्तान को लेकर क्या दिया बयान?

मई में ग्राहम ने अमेरिका-ईरान संघर्ष में पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका पर सवाल उठाए थे. उन्होंने पाकिस्तान से इजरायल को कूटनीतिक मान्यता देने की भी अपील की थी. X पर लिखे एक पोस्ट में उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान को मध्यस्थ मानना उनके लिए लंबे समय से चिंता का विषय रहा है. उन्होंने दावा किया था कि पाकिस्तान का इजरायल के प्रति विरोध जगजाहिर है.

ग्राहम ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया था कि पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर ईरानी सैन्य विमानों को सुरक्षित जगह दी गई थी, ताकि वे अमेरिकी हवाई हमलों से बच सकें. हालांकि पाकिस्तान ने इन दावों को खारिज कर दिया था.

लिंडसे ग्राहम की मौत पर क्या बोले ट्रंप?

लिंडसे ग्राहम के निधन पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें "सच्चा अमेरिकी देशभक्त" बताया और कहा कि उनकी कमी हमेशा महसूस की जाएगी. CNN से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि उन्हें इस खबर से गहरा दुख पहुंचा है. उन्होंने बताया कि निधन से कुछ समय पहले ही ग्राहम ने उन्हें फोन किया था. ट्रंप के मुताबिक, ग्राहम यूक्रेन की यात्रा से लौटे थे और उन्होंने यात्रा के बारे में विस्तार से बातचीत की थी.

ट्रंप ने कहा कि ग्राहम काफी मेहनत कर रहे थे. उन्होंने फोन पर केवल इतना कहा था कि लंबी यात्रा की वजह से वह थके हुए हैं, लेकिन बाकी सब कुछ सामान्य था. ट्रंप ने कहा कि कुछ ही देर बाद मेडिकल टीम पहुंची, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. उन्होंने इसे देश के लिए बड़ी क्षति बताया.

कौन थे लिंडसे ग्राहम?

  • लिंडसे ओलिन ग्राहम का जन्म 9 जुलाई 1955 को साउथ कैरोलिना के सेंट्रल शहर में हुआ था. उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ कैरोलिना से पढ़ाई की और वहीं से कानून (लॉ) की डिग्री हासिल की.
  • 1982 से 1989 तक उन्होंने अमेरिकी वायुसेना (US Air Force) की जज एडवोकेट जनरल (JAG) शाखा में सर्विस दी. इस दौरान उन्होंने रक्षा वकील और यूरोप में एयर फोर्स के मुख्य अभियोजक के रूप में काम किया.
  • बाद में उन्होंने साउथ कैरोलिना एयर नेशनल गार्ड और अमेरिकी एयर फोर्स रिजर्व में भी सेवा दी और 2015 में कर्नल के पद से सेवानिवृत्त हुए. 2014 में इराक और अफगानिस्तान में सैन्य अभियानों से जुड़े कानूनी कार्यों के लिए उन्हें ब्रॉन्ज स्टार मेडल से सम्मानित किया गया.

अमेरिकी राजनीति में कैसे रहा सफर?

  • लिंडसे ग्राहम को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान तब मिली जब वह हाउस ज्यूडिशियरी कमेटी के सदस्य बने और तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के महाभियोग (Impeachment) ट्रायल में हाउस इम्पीचमेंट मैनेजर की भूमिका निभाई.
  • 2002 में वह पहली बार अमेरिकी सीनेट के लिए चुने गए. इसके बाद 2008, 2014 और 2020 में लगातार दोबारा निर्वाचित हुए. जून 2026 में उन्होंने पांचवें कार्यकाल के लिए रिपब्लिकन पार्टी का नामांकन भी जीत लिया था.
  • लिंडसे ग्राहम ने 2016 में रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी भी पेश की थी, लेकिन प्राइमरी चुनाव शुरू होने से पहले ही अपना नाम वापस ले लिया.
  • हालांकि 2016 के चुनाव अभियान के दौरान वह डोनाल्ड ट्रंप के मुखर आलोचक रहे थे, लेकिन बाद के वर्षों में दोनों के बीच करीबी बढ़ी और ग्राहम ट्रंप के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में शामिल हो गए. उन्होंने ट्रंप के दोनों कार्यकाल के दौरान उनका लगातार समर्थन किया.

लिंडसे को क्यों कहा जाता था वार हॉक?

लिंडसे ग्राहम को अमेरिकी राजनीति में "वार हॉक" यानी आक्रामक विदेश नीति के समर्थक नेता के रूप में जाना जाता था. वह इजरायल, यूक्रेन और नाटो के प्रबल समर्थक थे. राष्ट्रीय सुरक्षा, आव्रजन और विदेश नीति से जुड़े कई मुद्दों पर उन्होंने रिपब्लिकन और डेमोक्रेट नेताओं के साथ मिलकर भी काम किया.

वह सीनेटर जॉन मैक्केन और जो लिबरमैन के साथ अपनी करीबी राजनीतिक साझेदारी के लिए भी जाने जाते थे. तीनों नेताओं को अमेरिकी राजनीति में "थ्री अमीगोज" (Three Amigos) के नाम से जाना जाता था.

2019 से 2021 तक ग्राहम अमेरिकी सीनेट की न्यायिक समिति (Senate Judiciary Committee) के अध्यक्ष रहे. इसके बाद 2025 से अपने निधन तक वह सीनेट बजट समिति (Senate Budget Committee) के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत थे. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नामित कई न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही.

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