क्या व्हाट्सऐप की चैट वाकई प्राइवेट है? मेटा पर बड़ा मुकदमा, ‘एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन’ को बताया ढोंग
Meta पर हुए बड़े मुकदमे ने WhatsApp के एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन दावों को कटघरे में खड़ा कर दिया है. क्या आपकी चैट वाकई सुरक्षित है? Meta पर दायर मुकदमे ने WhatsApp की एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या आपकी चैट सच में निजी है? जानिए पूरा मामला.
डिजिटल इंडिया के दौर में दुनिया की सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग WhatsApp हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. चाय की टपरी से लेकर कॉरपोरेट मीटिंग तक. अब इसी भरोसेमंद ऐप पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं. Meta पर दायर एक बड़े मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि WhatsApp का ‘एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन’ सिर्फ एक ढोंग है और यूजर्स की चैट पूरी तरह निजी नहीं है. अब इसकी गोपनीयता को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और मैक्सिको के कुछ यूजर्स ने अमेरिका की सैन फ्रांसिस्को कोर्ट में व्हाट्सऐप की पैरेंट कंपनी मेटा (Meta) के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. इस केस ने न सिर्फ टेक वर्ल्ड बल्कि आम भारतीय यूजर्स को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है. क्या हमारी पर्सनल बातें वाकई सुरक्षित हैं या कोई तीसरी आंख सब देख रही है?
क्या है व्हाट्सऐप का एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन?
व्हाट्सऐप दावा करता रहा है कि उसकी एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन तकनीक यह सुनिश्चित करती है कि भेजा गया मैसेज केवल भेजने वाला और पाने वाला ही पढ़ सकता है. यहां तक कि खुद व्हाट्सऐप या मेटा भी उन संदेशों को नहीं देख सकता, क्योंकि डिक्रिप्शन की चाबी (encryption key) यूजर्स के डिवाइस पर ही रहती है. लेकिन मुकदमे में कहा गया है कि यह दावा पूरी तरह सही नहीं है और मेटा के कर्मचारी इस सुरक्षा व्यवस्था को बायपास कर सकते हैं.
मुकदमे में क्या आरोप लगाए गए हैं?
23 जनवरी को दायर 51 पन्नों के इस मुकदमे में दावा किया गया है कि “मेटा का कोई कर्मचारी यदि यह कह दे कि उसे किसी यूजर की व्हाट्सऐप चैट देखने की जरूरत है, तो वह मेटा के इंजीनियर को एक ‘टास्क’ भेज देता है. इसके बाद इंजीनियर उस कर्मचारी को एक्सेस दे देता है, जिससे वह किसी भी यूजर की चैट देख सकता है.”
मुकदमे में यह भी कहा गया है कि चैट्स लगभग रियल टाइम में दिखाई देती हैं. डिलीट किए गए मैसेज भी देखे जा सकते हैं. एक्सेस की कोई समय-सीमा तय नहीं होती. यूजर की यूनिक आईडी से जुड़ा एक टूल (widget) इस्तेमाल किया जाता है. यानी दावा यह है कि व्हाट्सऐप की सुरक्षा दीवार के पीछे एक 'गुप्त दरवाजा' मौजूद है.
सबू नहीं, पर लगे गंभीर आरोप
हालांकि, इस मुकदमे में अभी तक कोई ठोस तकनीकी सबूत पेश नहीं किया गया है जो यह साबित करे कि मेटा वास्तव में एन्क्रिप्शन तोड़ सकता है. इसके बावजूद, मामला इसलिए गंभीर माना जा रहा है क्योंकि यह सीधे करोड़ों यूजर्स की प्राइवेसी से जुड़ा है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, यह मुकदमा अंतरराष्ट्रीय यूजर्स की ओर से किया गया है, जिससे मामला सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रह जाता.
मेटा का जवाब: ‘यह दावा पूरी तरह बेतुका’
मेटा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि “ये दावे झूठे और हास्यास्पद हैं.” कंपनी का कहना है कि वह व्हाट्सऐप मैसेज को डिक्रिप्ट नहीं कर सकती और उसके पास यूजर्स की निजी चैट पढ़ने की तकनीकी क्षमता नहीं है इसलिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पूरी तरह सुरक्षित है. मेटा ने यह भी कहा कि वह कोर्ट में इन आरोपों का मजबूती से जवाब देगी.
एलन मस्क की एंट्री: “व्हाट्सऐप सुरक्षित नहीं”
इस विवाद में टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क भी कूद पड़े हैं. सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने लिखा, “व्हाट्सऐप सुरक्षित नहीं है. यहां तक कि सिग्नल भी संदिग्ध है. X Chat इस्तेमाल करें.”
एलन मस्क की कंपनी xAI ने नवंबर 2025 में X प्लेटफॉर्म पर नया मैसेजिंग फीचर ‘X Chat’ लॉन्च किया था, जिसे व्हाट्सऐप और टेलीग्राम का विकल्प बताया जा रहा है.
X Chat क्या है?
X Chat को प्राइवेसी-फोकस्ड मैसेजिंग ऐप के तौर पर पेश किया गया है. इसमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, एडवांस मैसेज कंट्रोल, पुरानी डीएम और नई चैट को जोड़ने वाला यूनिफाइड इनबॉक्स, ज्यादा कस्टमाइजेशन विकल्प जैसी सुविधाएं दी गई हैं. एलन मस्क इसे ज्यादा सुरक्षित प्लेटफॉर्म के रूप में प्रचारित कर रहे हैं.
क्या यूजर्स की निजता खतरे में है?
- इस पूरे मामले ने फिर से एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.
- क्या टेक कंपनियां सच में यूजर्स की प्राइवेसी की रक्षा करती हैं?
- क्या ‘एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन’ सिर्फ एक मार्केटिंग टर्म बन गया है.
क्या सरकारें और कंपनियां जरूरत पड़ने पर चैट्स तक पहुंच बना सकती हैं?
डिजिटल एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह दुनिया की सबसे बड़ी डेटा प्राइवेसी स्कैंडल्स में से एक होगा.
आगे क्या होगा?
अब यह मामला अमेरिकी अदालत में चलेगा, जहां मेटा को अपने सिस्टम की सफाई देनी होगी और वादियों को अपने आरोपों के तकनीकी सबूत पेश करने होंगे. कोर्ट तय करेगा कि क्या व्हाट्सऐप की एन्क्रिप्शन नीति यूजर्स को गुमराह करती है या नहीं. जब तक फैसला नहीं आता, तब तक करोड़ों व्हाट्सऐप यूजर्स के मन में एक ही सवाल रहेगा - “क्या मेरी चैट सच में सिर्फ मेरी है?”





