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लेबनान पर अड़ी ज़िद, ट्रंप बोले नहीं लौट पाओगे अपने देश! US-Iran Talks में भारी बवाल, Pointers में जानें मामला और आगे क्या होगा?
स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता ट्रंप की चेतावनी के बाद तनावपूर्ण हो गई. लेबनान, हिज्बुल्लाह, प्रतिबंधों में राहत और ईरान की फ्रीज संपत्तियों को लेकर बातचीत के बीच ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने वॉकआउट कर दिया.
( Image Source:
X-@ANI )
पश्चिम एशिया में कई महीनों से जारी तनाव और संघर्ष को खत्म करने के उद्देश्य से स्विट्जरलैंड में शुरू हुई अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के पहले दौर में अचानक तनाव पैदा हो गया. बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणी के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने विरोध जताते हुए कुछ समय के लिए वार्ता स्थल छोड़ दिया. हालांकि बाद में ईरान ने स्पष्ट किया कि बातचीत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, बल्कि केवल अस्थायी रूप से रोकी गई है.
करीब 80 मिनट तक चली इस वार्ता में युद्ध समाप्त करने, प्रतिबंधों में राहत देने और ईरान की जमी हुई विदेशी संपत्तियों को जारी करने जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. हालांकि लेबनान की स्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए, जिससे बातचीत का माहौल तनावपूर्ण हो गया.
प्वांट्स में जानें बातचीत से जुड़ी पूरी डिटेल?
- स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का पहला दौर आयोजित किया गया. बैठक करीब 80 मिनट तक चली.
- चर्चा का मुख्य फोकस पश्चिम एशिया में संघर्ष खत्म करने, प्रतिबंधों में राहत और ईरान की जमी हुई संपत्तियों को जारी करने पर था.
- वार्ता के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि वह लेबनान में अपने समर्थक समूहों की गतिविधियां बंद करे, वरना गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं.
- ट्रंप ने कहा कि ईरान होर्मुज खोले वरना कभी अपने देश नहीं लौट पाओगे. ये ईरान पर एक मिलिट्री अटैक की धमकी थी.
- ट्रंप की इस टिप्पणी के बाद ईरानी डेलिगेशन ने विरोध में मीटिंग छोड़ दी
- ईरानी मीडिया के अनुसार, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने अस्थायी रूप से बैठक छोड़ी.
- बाद में ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वार्ता रद्द नहीं हुई है, बल्कि केवल रोकी गई है.
- ईरान का कहना है कि आगे की प्रोग्रेस अमेरिका द्वारा अंतरिम समझौते की शर्तों को लागू करने पर निर्भर करेगी.
दोनों देशों के बीच क्या विवाद?
- हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच एक अंतरिम समझौता हुआ था.
- इस समझौते का मकसद लगभग चार महीने से जारी तनाव और संघर्ष को समाप्त करना था.
- इसके बावजूद लेबनान को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं.
- तेहरान का कहना है कि लेबनान में इजरायल के हमले संघर्ष बढ़ना समझौते की भावना के खिलाफ है.
- ईरानी वार्ता दल के एक सदस्य ने कहा कि जब तक लेबनान में युद्ध समाप्त नहीं होता, तब तक अन्य मुद्दों पर आगे बढ़ना मुश्किल होगा.
- ईरान ने साफ संकेत दिया है कि लेबनान उसके लिए प्राथमिक मुद्दा बना हुआ है.
अमेरिका का क्या है रुख?
- अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्थिति को कठिन लेकिन सामान्य कूटनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया.
- उन्होंने कहा कि मतभेदों के बावजूद बातचीत में प्रगति हो रही है.
- वेंस ने क्षेत्रीय शांति और व्यापक समझौते के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता दोहराई.
- लेबनान क्यों बना सबसे बड़ा मुद्दा?
- बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब लेबनान में युद्धविराम बेहद नाजुक स्थिति में है.
- इजरायल ने हाल के दिनों में लेबनान पर हमले जारी रखे हैं, जिनमें कई लोगों की मौत हुई है.
- ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इन्हीं हमलों का हवाला देते हुए होर्मुज को बंद करने की घोषणा की.
ईरान ने अमेरिका पर क्या आरोप लगाया?
- ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार मोहम्मद मुखबर ने अमेरिका पर अंतरिम समझौते की पहली शर्त लागू न करने का आरोप लगाया.
- उनके मुताबिक समझौते की पहली शर्त सभी मोर्चों पर युद्धविराम थी, जिसमें लेबनान भी शामिल था.
- उन्होंने कहा कि यदि समझौता लागू नहीं हुआ तो क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होती रहेगी.
इजरायल ने क्या कहा?
- इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल दक्षिणी लेबनान में अपनी मौजूदगी बनाए रखेगा.
- उन्होंने कहा कि इजरायल ने वहां एक सुरक्षा क्षेत्र स्थापित किया है और लोगों की सुरक्षा के लिए वह इसे बनाए रखेगा.




