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मौत भी जोड़े में! 'डबल डच सरको' ने अपने 'सुसाइड पॉड' में डाल दी AI की ताकत, डरा रहा ये अपग्रेड इन्वेंशन

विवादित सरको सुसाइड पॉड के आविष्कारक फिलिप नित्शके ने AI-पावर्ड ‘डबल डच’ वर्जन का खुलासा किया. जानिए कैसे कपल्स के लिए बनाई जा रही है नई इच्छामृत्यु मशीन और क्यों बढ़ा विवाद.

मौत भी जोड़े में! डबल डच सरको ने अपने सुसाइड पॉड में डाल दी AI की ताकत, डरा रहा ये अपग्रेड इन्वेंशन
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( Image Source:  sora ai )
नवनीत कुमार
Edited By: नवनीत कुमार

Published on: 26 Jan 2026 11:38 AM

दुनिया को चौंकाने वाले ‘सरको पॉड’ को पहली बार इस्तेमाल हुए अभी एक ही साल बीता है, लेकिन यह डिवाइस एक बार फिर वैश्विक बहस के केंद्र में आ गई है. सितंबर 2024 में स्विट्ज़रलैंड के एक जंगल में एक 64 वर्षीय अमेरिकी महिला की मौत के बाद यह मशीन सुर्खियों में आई थी. अब इसके आविष्कारक फिलिप नित्शके ने एक और नया दावा किया है, जिसने नैतिकता, कानून और तकनीक तीनों पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.

द डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, स्विट्ज़रलैंड के शैफहाउज़ेन इलाके में महिला ने इस 3D-प्रिंटेड कैप्सूल में प्रवेश किया और कुछ ही मिनटों में उसकी मौत हो गई. इसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए डिवाइस जब्त की, मौके पर मौजूद लोगों को हिरासत में लिया और जांच शुरू की. हालांकि बाद में जानबूझकर हत्या के आरोप खारिज कर दिए गए, लेकिन यह घटना ‘सरको पॉड’ को वैश्विक विवाद का प्रतीक बना गई.

विवादों से घिरे डॉक्टर की लंबी कहानी

ऑस्ट्रेलिया में जन्मे फिलिप नित्शके लंबे समय से इच्छामृत्यु के समर्थक रहे हैं. वे ‘एग्ज़िट इंटरनेशनल’ नामक संस्था से जुड़े हैं, जो इच्छामृत्यु से जुड़े मुद्दों पर जानकारी देती है. उनके मुताबिक, सरको पॉड का मकसद लोगों को अपनी मौत पर नियंत्रण देना है, लेकिन आलोचक इसे अमानवीय और खतरनाक प्रयोग मानते हैं. पहली घटना के बाद स्विस पुलिस की सख्ती से नित्शके हैरान रह गए. डिवाइस आज भी पुलिस के कब्जे में है और जांच पूरी नहीं हुई है. नित्शके का कहना है कि कानूनी अस्पष्टता के चलते उनका अगला कदम रुका हुआ है, भले ही तकनीकी विकास आगे बढ़ चुका हो.

मौत को भी जोड़े में देखने की सोच

नित्शके अब ‘डबल डच सरको’ नाम के नए संस्करण पर काम कर रहे हैं. यह पहले वाले पॉड से बड़ा होगा और खास तौर पर उन कपल्स के लिए डिजाइन किया गया है, जो एक साथ अपनी जिंदगी खत्म करना चाहते हैं. उनका दावा है कि कई बुज़ुर्ग जोड़ों ने अकेले मरने के विचार को असहज बताया था, जिससे यह नया विचार जन्मा. इस नए पॉड में दो लोगों के लिए जगह होगी और दोनों को एक साथ बटन दबाना होगा. अगर एक भी व्यक्ति पीछे हटता है, तो मशीन काम नहीं करेगी. नित्शके इसे ‘साझा निर्णय’ का प्रतीक बताते हैं, हालांकि आलोचकों के लिए यह सोच और भी डरावनी है.

मानसिक क्षमता का फैसला अब मशीन करेगी?

सबसे विवादास्पद पहलू है इसमें जोड़ा गया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस. नित्शके का दावा है कि भविष्य में मानसिक क्षमता की जांच मनोचिकित्सक नहीं, बल्कि AI सिस्टम करेगा. यह तकनीक तय करेगी कि व्यक्ति अपने फैसले के लिए मानसिक रूप से सक्षम है या नहीं, जिसने चिकित्सा और नैतिक जगत में गहरी बहस छेड़ दी है.

स्विट्ज़रलैंड क्यों बना केंद्र?

दुनिया के ज्यादातर देशों में इच्छामृत्यु सख्त मेडिकल शर्तों से जुड़ी है, लेकिन स्विट्ज़रलैंड में नियम अपेक्षाकृत ढीले हैं. यही वजह है कि नित्शके का मानना है कि ‘डबल डच सरको’ जैसी मशीनों का भविष्य फिलहाल सिर्फ वहीं संभव है.

आलोचना, दर्द और व्यक्तिगत त्रासदी

इच्छामृत्यु विरोधी संगठनों ने इस डिवाइस को ‘व्यक्तिगत गैस चैंबर’ तक कहा है. उनका तर्क है कि तकनीक के नाम पर मौत को आसान बनाना समाज को गलत दिशा में ले जाएगा. दूसरी ओर, नित्शके कहते हैं कि वे सिर्फ उन लोगों की मांग का जवाब दे रहे हैं, जो अपने जीवन के अंतिम फैसले पर नियंत्रण चाहते हैं. इस पूरे विवाद के बीच नित्शके के करीबी सहयोगी डॉक्टर फ्लोरियन विलेट की मौत ने मामले को और गंभीर बना दिया. लंबे समय तक हिरासत और मानसिक तनाव के बाद उनकी मौत ने पुलिस जांच और सिस्टम पर सवाल खड़े किए. नित्शके इसे प्रशासनिक दबाव का नतीजा मानते हैं.

भविष्य की ओर बढ़ रही तकनीक

सरको के अलावा नित्शके ‘कायरोस कॉलर’ और अन्य डिवाइस पर भी काम कर रहे हैं. उनका मानना है कि उम्रदराज लोग ‘पूर्ण नियंत्रण’ चाहते हैं, ताकि उन्हें भविष्य की अनिश्चितता का डर न सताए. लेकिन कानूनी अड़चनें इन योजनाओं को फिलहाल प्रयोगशाला तक सीमित रखे हुए हैं. सरको पॉड और उसका नया ‘डबल डच’ संस्करण सिर्फ एक तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि यह सवाल है कि इंसान को अपनी मौत पर कितना अधिकार होना चाहिए. यह कहानी तकनीक बनाम नैतिकता, आज़ादी बनाम कानून और इंसानी करुणा बनाम डर की है, जिसका अंतिम फैसला शायद अभी बहुत दूर है.

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