Oscar 2026 में भारत को झटका, भारतीय मूल की फिल्म डायरेक्टर Geeta Gandbhir ने हारे दो अवार्ड
ऑस्कर 2026 में भारत को बड़ा झटका लगा जब नीरज घयवान की फिल्म 'होमबाउंड' अंतिम नॉमिनेशन में जगह नहीं बना सकी. वहीं भारतीय मूल की फिल्ममेकर गीता गांधबीर ने इतिहास रचते हुए दो कैटेगरी में नॉमिनेशन पाया, लेकिन जीत से चूक गईं.
Oscar 2026: भारत की तरफ से इस बार ऑस्कर में काफी उम्मीदें थीं, लेकिन नतीजे थोड़े निराशाजनक रहे. भारत ने अपनी आधिकारिक एंट्री के तौर पर नीरज घयवान की फिल्म 'होमबाउंड' को चुना था. इस फिल्म में ईशान खट्टर, विशाल जेठवा और जाह्नवी कपूर जैसे कलाकारों ने लीड रोल निभाया हैं. यह फिल्म बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी में नॉमिनेशन पाने की दौड़ में थी, लेकिन अफसोस कि यह नॉमिनेशन की अंतिम लिस्ट में जगह नहीं बना सकी. यानी भारत की इस बड़ी उम्मीद को झटका लगा.
अब सारी नजरें भारतीय-अमेरिकी फिल्ममेकर गीता गांधबीर पर टिक गई थीं. गीता ने इस साल इतिहास रच दिया था. वे एक ही साल में दो अलग-अलग डॉक्यूमेंट्री कैटेगरी में नॉमिनेशनपाने वाली पहली महिला बनी. एक नॉमिनेशन उन्हें बेस्ट डॉक्यूमेंट्री फीचर के लिए मिला, और दूसरा बेस्ट डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट के लिए. यह बहुत बड़ी अचीवमेंट थी, क्योंकि पहले ऐसा कोई महिला नहीं कर पाई थी.
गीता गांधबीर ने दो फिल्मों पर काम किया:
'द डेविल इज बिजी' (The Devil Is Busy) – यह एक छोटी डॉक्यूमेंट्री फिल्म है, जो सिर्फ 31 मिनट लंबी है. इसे गीता ने क्रिस्टलिन हैम्पटन के साथ मिलकर निर्देशित किया. फिल्म अमेरिका के जॉर्जिया राज्य के अटलांटा शहर में एक महिला स्वास्थ्य क्लिनिक की सुरक्षा इंचार्ज ट्रेसी के एक दिन की जिंदगी दिखाती है. वहां गर्भपात पर सख्त कानून हैं और रोजाना विरोध प्रदर्शन होते रहते हैं. ट्रेसी क्लिनिक में आने वाली मरीजों और वहां काम करने वाले स्टाफ की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखती है. यह फिल्म महिलाओं के अधिकारों और चुनौतियों को बहुत करीब से दिखाती है. इस कैटेगरी में इसकी टक्कर अन्य फिल्मों से थी, जैसे 'ऑल द एम्प्टी रूम्स', 'आर्म्ड ओनली विद अ कैमरा: द लाइफ एंड डेथ ऑफ ब्रेंट रेनॉड', 'चिल्ड्रन नो मोर: वेयर एंड आर गॉन' और 'परफेक्टली अ स्ट्रेंजनेस'. लेकिन जीत 'ऑल द एम्प्टी रूम्स' की टीम को मिली. गीता की यह फिल्म जीत नहीं पाई.
'द परफेक्ट नेबर' (The Perfect Neighbor) – यह नेटफ्लिक्स पर अवेलेबल एक लंबी डॉक्यूमेंट्री है. यह जून 2023 में फ्लोरिडा के ओकाला शहर में हुई एक दर्दनाक घटना पर आधारित है. एक श्वेत महिला सुसान लुईस लोरिन्ज़ ने अपनी अश्वेत पड़ोसन अजाइक ओवेन्स (जिन्हें अज के नाम से जाना जाता था) को गोली मारकर हत्या कर दी थी. फिल्म पुलिस की बॉडी कैमरा फुटेज, पूछताछ के वीडियो और गवाहों के बयानों के जरिए पूरी घटना को समझाती है. गीता ने इस फिल्म को अलीसा पायने, निकॉन क्वांटू और सैम बिस्बी के साथ मिलकर बनाया. इस कैटेगरी में इसकी कम्पटीशन 'द अलाबामा सॉल्यूशन', 'कम सी मी इन द गुड लाइट', 'कटिंग थ्रू रॉक्स' और 'मिस्टर नोबडी अगेंस्ट पुतिन' जैसी फिल्मों से थी. लेकिन यहां भी गीता को हार का सामना करना पड़ा. जीत 'मिस्टर नोबडी अगेंस्ट पुतिन' की टीम को मिली.
कौन हैं गीता गांधबीर?
गीता गांधबीर भारतीय मूल की हैं. उनके माता-पिता 1960 के दशक में भारत से अमेरिका गए थे. वहां बसकर उन्होंने परिवार बसाया. गीता ने पिछले करीब 20 सालों में डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के क्षेत्र में बहुत नाम कमाया है. उन्होंने कई एमी अवॉर्ड और पीबॉडी अवॉर्ड जीते हैं. उनकी कुछ मशहूर फिल्में हैं:
'आई एम एविडेंस' (2017)- जिसमें अमेरिका में बलात्कार के केसों में सबूतों की जांच में होने वाली देरी और सिस्टम की खामियों को उजागर किया गया.
'लोन्डेस काउंटी एंड द रोड टू ब्लैक पावर' (2022)- यह ऐतिहासिक और मजबूत कहानी वाली फिल्म थी, जिसकी बहुत तारीफ हुई।
'थ्रू आवर आइज़: अपार्ट' (2022) – यह भी एक एमी जीतने वाली छोटी फिल्म थी
गीता ने सैम पोलार्ड और स्पाइक ली जैसे बड़े निर्देशकों के साथ काम किया है. इस बार ऑस्कर में नॉमिनेशन मिलना उनके लिए बहुत बड़ा सम्मान था, भले ही जीत न मिली हो. उनकी मेहनत और फिल्मों के जरिए महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाना सराहनीय है. भारत के लिए यह गर्व की बात है कि एक भारतीय मूल की फिल्ममेकर ने इतना बड़ा इतिहास रचा.




