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Rape से लेकर प्राइवेट पार्ट्स तक को नुकसान, यूक्रेन के खिलाफ रूस का ये कैसा हथियार, जेल की चारदीवारी में क्या-क्या कर रहा?

यूक्रेन युद्ध में रूसी हिरासत केंद्रों से रेप, यौन हिंसा और प्राइवेट पार्ट्स को नुकसान पहुंचाने के आरोप सामने आए हैं. जानिए UN रिपोर्ट क्या कहती है.

sexual violence in the Russia-Ukraine war
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रूस-यूक्रेन युद्ध में मिसाइल, ड्रोन और टैंक युद्ध की सबसे दिखाई देने वाली तस्वीर हैं, लेकिन संयुक्त राष्ट्र की जांच एक ऐसे मोर्चे की ओर भी इशारा करती है जो युद्ध के मैदान से बाहर है. और वो मोर्चे हैं- जेल, डिटेंशन सेंटर और कब्जे वाले इलाकों में हिरासत की जगह. UN Human Rights Monitoring Mission ने रूसी सशस्त्र और सुरक्षा बलों से जुड़े 310 मामलों में conflict-related sexual violence के आरोप लगाए हैं. हालांकि, हालांकि, इसको लेकर अभी सबूत सामने नहीं आए हैं. इनमें 280 पुरुष, 26 महिलाएं और 4 लड़कियां शामिल हैं.

UN की ​जांच रिपोर्ट के मुताबिक इन मामलों में रेप, गैंग रेप, जननांगों को नुकसान पहुंचाना, जननांगों पर बिजली के झटके और जननांगों पर मारपीट जैसी हिंसा शामिल थी. इन घटनाओं में रूसी सशस्त्र बलों के अलावा Federal Penitentiary Service और Federal Security Service से जुड़े कर्मियों पर भी आरोप दर्ज हैं.

75% मामलों में पुरुष यौन हिंसा के शिकार

सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इन 310 मामलों में 232 मामलों यानी करीब 74.8% में यौन हिंसा के पीड़ित पुरुष पाए गए, जबकि 195 मामलों यानी 62.9% में हिंसा एक से ज्यादा बार हुई. UN के मुताबिक कई घटनाओं का इस्तेमाल युद्धबंदियों और नागरिक बंदियों को सजा देने, अपमानित करने या कबूलनामा हासिल करने के लिए किया गया. यानी मामला केवल यौन अपराध तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि कई मामलों में यह हिरासत में यातना और मनोवैज्ञानिक दबाव का हिस्सा भी था.

क्या जेल की चारदीवारी युद्ध का दूसरा मोर्चा बन गई है?

UN के आंकड़े बताते हैं कि यौन हिंसा के कई सत्यापित मामले युद्धबंदी बनने के बाद हिरासत में हुए. 2025 में ही कम से कम 52 मामले ऐसे सत्यापित किए गए, जिनमें पुरुष युद्धबंदी और नागरिक बंदी प्रभावित हुए. UN के अनुसार इनमें से कई घटनाएं पीड़ितों को एक हिरासत केंद्र से दूसरे केंद्र में स्थानांतरित किए जाने के बाद हुईं. बाकी मामले 2022 से दिसंबर 2024 के बीच हुए थे, जिन्हें 2025 में सत्यापित और दस्तावेजीकृत किया गया.

इससे कहानी का फोकस युद्ध के मैदान से हटकर उस जगह पर चला जाता है, जहां कैदियों के पास हथियार नहीं होते हैं, उनकी आवाजाही नियंत्रित होती है और बाहरी निगरानी सीमित रहती है. सितंबर 2025 की UN रिपोर्ट में भी रूस के कब्जे वाले इलाकों में हिरासत में लिए गए नागरिकों के साथ व्यापक और व्यवस्थित यातना व दुर्व्यवहार की बात कही गई थी.

UN ने जून 2023 से जिन 215 रिहा किए गए नागरिक बंदियों के इंटरव्यू किए, उनमें ज्यादातर ने गंभीर पिटाई, बिजली के झटके, नकली फांसी, लंबे समय तक तनावपूर्ण स्थिति में रखने, मौत की धमकी और यौन हिंसा के अनुभव बताए.

310 मामलों में 280 पुरुष क्यों हैं?

युद्धकालीन यौन हिंसा को अक्सर महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ होने वाले अपराध के रूप में देखा जाता है, लेकिन यूक्रेन के सत्यापित मामलों में तस्वीर अलग है. UN के 310 मामलों में 280 पुरुष यानी करीब 90% पीड़ित पुरुष हैं. महिलाओं की संख्या 26 और लड़कियों की संख्या 4 है. यह पैटर्न खास तौर पर हिरासत में लिए गए पुरुष युद्धबंदियों और नागरिक बंदियों के मामलों से जुड़ा दिखाई देता है.

इसका अर्थ यह नहीं है कि महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा कम गंभीर है. UN ने महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ भी रेप और दूसरी यौन हिंसा के मामलों को दर्ज किया है. 2025 में UN की जांच में महिला युद्धबंदियों और नागरिक महिलाओं के खिलाफ रेप के मामले भी सामने आए, जिनमें कुछ घटनाओं में डंडों और दूसरी वस्तुओं का इस्तेमाल किया गया. इसके अलावा, कब्जे वाले इलाकों में घरों, चेकपॉइंट्स और अवैध हिरासत के दौरान महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ बार-बार रेप और सामूहिक रेप के पैटर्न भी दस्तावेजीकृत किए गए.

मकसद शरीर पर हमला नहीं, मानसिक रूप से तोड़ना था?

UN के दस्तावेज में इस सवाल का महत्वपूर्ण जवाब मिलता है. 310 मामलों में 195 मामलों में यौन हिंसा एक से ज्यादा घटनाओं के रूप में हुई. रिपोर्ट कहती है कि ऐसी हिंसा का इस्तेमाल कई बार युद्धबंदियों और नागरिक बंदियों को punish यानी सजा देने, humiliate यानी अपमानित करने या confession यानी कबूलनामा हासिल करने के लिए किया गया.

यानी एक कैदी के लिए हिंसा केवल एक बार का हमला नहीं थी. कई मामलों में शारीरिक हिंसा के साथ जबरन नग्न करना, जननांगों पर हमला, बिजली के झटके और दूसरी यातनाएं जुड़ी थीं. इससे यौन हिंसा और सामान्य torture के बीच की सीमा भी धुंधली होती दिखाई देती है—खासकर उन मामलों में जहां इसका इस्तेमाल पूछताछ, सजा या डर पैदा करने के लिए किया गया.

क्या ये हिंसा किसी पैटर्न की तरफ इशारा करता है?

UN की रिपोर्ट में अलग-अलग मामलों में रेप, गैंग रेप, जननांगों को नुकसान, जननांगों पर बिजली के झटके और जननांगों पर मारपीट जैसे कई तरीके दर्ज हैं. 232 मामलों में एक से ज्यादा प्रकार की यौन हिंसा मिली.

UN ने एक पुरुष युद्धबंदी का उदाहरण भी दर्ज किया है जिसे 2022 में पकड़े जाने के बाद रूसी सैनिकों ने चाकू से रेप किया. इसके बाद 2025 में रिहाई तक उसे रूसी penitentiary staff की ओर से बार-बार यौन हिंसा, जबरन नग्न किए जाने, मारपीट और जननांगों पर बिजली के झटके जैसी यातनाओं का सामना करना पड़ा. यह उदाहरण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें हिंसा केवल गिरफ्तारी के समय नहीं रुकी, बल्कि हिरासत की अलग-अलग अवस्थाओं में जारी रही.

सिर्फ सैनिकों के साथ हुआ या आम आदमी भी सामने आए?

यह हिंसा केवल युद्धबंदियों तक सीमित नहीं थी. UN की रिपोर्ट के अनुसार 2022 में रूस के पूर्ण पैमाने पर हमले के बाद यूक्रेनी युद्धबंदियों के साथ-साथ civilian detainees यानी नागरिक बंदियों के खिलाफ भी व्यापक यातना और दुर्व्यवहार दर्ज हुआ, जिसमें यौन हिंसा शामिल थी.

सितंबर 2025 की UN रिपोर्ट में 215 रिहा किए गए नागरिक बंदियों के इंटरव्यू का जिक्र है. इनमें ज्यादातर लोगों ने कैद के दौरान गंभीर पिटाई, बिजली के झटके, नकली फांसी, तनावपूर्ण शारीरिक स्थितियों में रखने, मौत या परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी और यौन हिंसा के बारे में बताया. UN ने इन घटनाओं को रूस के कब्जे वाले इलाकों में widespread and systematic torture और ill-treatment के पैटर्न के रूप में वर्णित किया था.

क्या 2025 में भी यौन हिंसा जारी रही?

हां. UN की 2026 रिपोर्ट के मुताबिक 310 सत्यापित मामलों में कम से कम 52 मामले 2025 में हुए, जिनमें पुरुष युद्धबंदी और नागरिक बंदी प्रभावित हुए. खास बात यह है कि कई मामले पीड़ितों को नई हिरासत सुविधा में ट्रांसफर किए जाने के बाद हुए. बाकी मामलों की घटनाएं फरवरी 2022 से दिसंबर 2024 के बीच हुई थीं, जिन्हें 2025 में सत्यापित और दस्तावेजीकृत किया गया.

इसका मतलब है कि रिपोर्ट में दर्ज यौन हिंसा केवल युद्ध के शुरुआती महीनों की घटनाओं का रिकॉर्ड नहीं है. UN के पास 2025 में भी नए मामलों के सत्यापन का आधार है. साथ ही, UN ने कहा कि 2025 में कब्जे वाले यूक्रेनी इलाकों और रूस में यौन हिंसा के पैटर्न का दस्तावेजीकरण जारी रहा.

क्या रूस की जेल व्यवस्था भी इन आरोपों में शामिल है?

UN की रिपोर्ट में केवल रूसी सेना का नाम नहीं है. 310 सत्यापित मामलों में रूसी armed and security forces के साथ Federal Penitentiary Service और Federal Security Service से जुड़े कर्मियों का भी उल्लेख है.

इसलिए कहानी केवल “सैनिकों ने युद्ध के दौरान अपराध किया” तक सीमित नहीं रहती. कुछ दस्तावेजीकृत मामलों में हिंसा हिरासत प्रणाली के भीतर हुई और कुछ मामलों में penitentiary staff पर भी आरोप हैं. यही तथ्य इस पूरे मामले को युद्ध के मैदान से निकालकर detention system और institutional accountability के सवाल तक ले जाता है.

क्या असली संख्या 310 से ज्यादा हो सकती है?

UN के जांचकर्ता खुद बताते हैं कि ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग में बड़ी बाधाएं हैं. रूसी अधिकारियों ने UN monitors को कब्जे वाले इलाकों और हिरासत केंद्रों तक लगातार पहुंच नहीं दी. परिणामस्वरूप UN जांचकर्ता कई मामलों में पीड़ितों से तभी गोपनीय इंटरव्यू कर सके जब वे रिहा होकर बाहर आए.

पीड़ितों के सामने दूसरी बड़ी समस्या stigma और retaliation यानी सामाजिक बदनामी और बदले की कार्रवाई का डर है. UN के मुताबिक कुछ पीड़ित इसलिए भी शिकायत नहीं कर पाते क्योंकि उनके परिवार के सदस्य अभी भी रूस के कब्जे वाले इलाकों में रह रहे हैं और उन्हें उनके खिलाफ कार्रवाई का डर होता है.

इसलिए 310 संख्या को पूरे युद्ध में हुई यौन हिंसा की अंतिम संख्या मानना उचित नहीं होगा. यह उन मामलों की संख्या है जिन्हें UN की मानवाधिकार निगरानी टीम ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर verify किया है.

क्या महिलाओं के खिलाफ भी यौन हिंसा का अलग पैटर्न सामने आया?

हां. UN की रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ भी यौन हिंसा के मामले सामने आए. Independent International Commission of Inquiry on Ukraine ने चार रेप मामलों का दस्तावेजीकरण किया- एक महिला युद्धबंदी और तीन नागरिक महिलाओं से जुड़े मामले. इनमें डंडों और दूसरी वस्तुओं से रेप के मामले शामिल थे और पीड़ितों को लंबे समय तक शारीरिक तथा मानसिक नुकसान हुआ.

इसके अलावा सेवा प्रदाताओं ने महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ repeated rape, collective rape और sexual violence as torture के पैटर्न भी दर्ज किए. ये घटनाएं निजी घरों, अवैध हिरासत और रूसी कब्जे वाले इलाकों में चेकपॉइंट्स के दौरान होने की बात रिपोर्ट में कही गई है.

क्या रूस ने जांच में UN से सहयोग दिया?

UN की रिपोर्ट के अनुसार रूसी अधिकारियों ने UN monitors को कब्जे वाले क्षेत्रों और हिरासत केंद्रों तक पहुंच नहीं दी. इसी कारण स्वतंत्र जांचकर्ता कई मामलों में प्रत्यक्ष रूप से घटनास्थल तक नहीं पहुंच सके और रिहा किए गए युद्धबंदियों तथा नागरिक बंदियों की गवाही पर निर्भर रहे.

UN ने रूस से यौन हिंसा रोकने, credible allegations की जांच करने, जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने और अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों तथा detention facilities में monitoring और survivors को सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निर्बाध पहुंच देने की मांग दोहराई है.

रूस का पक्ष क्या?

रूस ने यूक्रेन से जुड़े युद्ध अपराधों और यौन हिंसा के आरोपों को पहले खारिज किया है और UN की रिपोर्टिंग पर भी आपत्ति जताई है. दूसरी ओर UN का कहना है कि उसने मामलों को मानवाधिकार निगरानी और पीड़ितों की गवाही के आधार पर सत्यापित किया है. इसलिए पत्रकारिता में “रूस ने किया” और “UN ने रूसी बलों से जुड़े मामले सत्यापित किए” के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है.

क्या यूक्रेन की ओर से लगे आरोपों की UN ने जांच की?

UN ने यूक्रेनी armed forces, Security Service और penitentiary staff से जुड़े 31 conflict-related sexual violence cases भी दस्तावेज तैयार किए हैं. इनमें 27 पुरुष और 4 महिलाएं प्रभावित हुए. अधिकांश मामले 2025 से पहले के थे, जबकि 9 मामले 2025 में हुए. इनमें जननांगों पर बिजली के झटके, मारपीट और जबरन नग्न करने जैसी घटनाएं शामिल थीं.

‘सेक्सुअल बैटलफील्ड’ जेलों के अंदर बन गया?

UN के आंकड़े कम से कम इतना जरूर दिखाते हैं कि युद्ध के दौरान यौन हिंसा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा detention और captivity के संदर्भ में दर्ज हुआ है. 310 सत्यापित मामलों में 280 पुरुष पीड़ित हैं; 232 मामलों में यौन हिंसा के कई रूप और 195 में कई घटनाएं दर्ज हुईं. 2025 में भी कम से कम 52 नए मामले सत्यापित हुए. इन घटनाओं में केवल रेप नहीं, बल्कि जननांगों पर हमला, बिजली के झटके, जबरन नग्न करना और दूसरी यातनाएं भी शामिल थीं.

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