सिंधु जल संधि पर रोक से छटपटा रहा पाकिस्तान! कनाडा से लगाई बड़ी गुहार, क्या है ये Treaty और भारत ने इसे क्यों किया था स्थगित?
पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि की बहाली के लिए कनाडा से समर्थन मांगा है. जानिए आखिर सिंधु जल संधि क्या है, भारत ने इसे क्यों स्थगित किया, पाकिस्तान की मांग क्या है और इस पूरे विवाद पर भारत का ताजा रुख क्या है?
पाकिस्तान ने सोमवार को कनाडा से भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty-IWT) को दोबारा लागू कराने में समर्थन देने की अपील की. पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने कनाडा से आग्रह किया कि वह भारत पर 1960 की इस ऐतिहासिक जल बंटवारा संधि को तत्काल बहाल करने के लिए समर्थन दे.
इशाक डार ने यह बात इस्लामाबाद में कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान कही. अनीता आनंद दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर पाकिस्तान पहुंची थीं. आखिर सिंधु जल संधि क्या है और भारत ने इसके क्यों रद्द किया था, आइये जानते हैं इसके पीछे की पूरी डिटेल.
क्या है सिंधु जल संधि?
सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली के जल बंटवारे को लेकर किया गया एक ऐतिहासिक समझौता है. इस संधि पर 19 सितंबर 1960 को वर्ल्ड की मध्यस्थता में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान ने कराची में हस्ताक्षर किए थे. इस समझौते के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों का बंटवारा दोनों देशों के बीच किया गया.
पूर्वी नदियां- ब्यास, रावी, सतलुज- इन तीनों नदियों के पानी के उपयोग का लगभग पूरा अधिकार भारत को दिया गया.
पश्चिमी नदियां- सिंधु, झेलम और चिनाब. इन नदियों का पानी मुख्य रूप से पाकिस्तान को आवंटित किया गया, हालांकि भारत को इन नदियों पर कृषि, पनबिजली उत्पादन और कुछ अन्य सीमित उपयोगों की अनुमति दी गई.
भारत ने संधि को क्यों किया स्थगित?
विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई इस संधि को भारत ने अप्रैल 2025 में स्थगित (Abeyance) कर दिया था. यह फैसला जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के एक दिन बाद लिया गया था, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी. उस समय भारत ने स्पष्ट किया था कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ "विश्वसनीय" कार्रवाई नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि स्थगित रहेगी.
इशाक डार ने भारत के फैसले पर क्या कहा?
सोमवार को मीडिया को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने आरोप लगाया कि भारत के इस फैसले ने पहले से संवेदनशील क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल को और अधिक अस्थिर बना दिया है. उन्होंने कहा कि अप्रैल 2025 में भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित करने की घोषणा ने पहले से ही अस्थिर सुरक्षा स्थिति में एक नया आयाम जोड़ दिया है.
कनाडा से क्या की अपील?
इशाक डार ने अंतरराष्ट्रीय समर्थन की मांग करते हुए खास तौर पर कनाडा से अपील की कि वह भारत से सिंधु जल संधि को तुरंत बहाल करने की मांग का समर्थन करे. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने मित्र देशों, जिनमें कनाडा भी शामिल है, से भारत द्वारा सिंधु जल संधि की तत्काल बहाली, पानी को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की नीति समाप्त करने और अंतरराष्ट्रीय कानून व संधि संबंधी दायित्वों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए समर्थन चाहता है.
इतना क्यों छटपटा रहा पाकिस्तान?
सिंधु, झेलम और चिनाब नदियां पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा मानी जाती हैं. देश की लगभग 90 फीसदी कृषि इन नदियों के पानी पर निर्भर है. 1960 की सिंधु जल संधि के तहत इन पश्चिमी नदियों के कुल जल का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा पाकिस्तान के हिस्से में आता है, जो उसकी खाद्य सुरक्षा और बिजली उत्पादन के लिए बेहद अहम है.
मौजूदा हालात पर क्या है भारत का रुख?
द टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर अपना रुख और सख्त कर लिया है. रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भारत का मानना है कि यह संधि अब अपने मौजूदा स्वरूप में आगे नहीं चल सकती. रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल भारत विश्व बैंक की मध्यस्थता वाली इस संधि से पूरी तरह बाहर निकलने पर सक्रिय रूप से विचार नहीं कर रहा है, लेकिन मौजूदा ढांचे के तहत इसे जारी रखना देश के हित में नहीं मानता.
सूत्रों के अनुसार, यदि भविष्य में नदी जल बंटवारे से जुड़ा कोई नया प्रावधान लागू होता है तो वह मौजूदा संधि के तहत नहीं बल्कि किसी नए ढांचे के तहत होगा. रिपोर्ट के अनुसार, भारत का कहना है कि सिंधु जल संधि के स्थगन की कोई समय-सीमा तय नहीं है. यह तब तक स्थगित रहेगी, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को "विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय" तरीके से समाप्त नहीं करता.




