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नेपाल में चीन सीमा से आया मौत का सैलाब, मौत का आंकड़ा पहुंचा 150 पार; 133 भारतीय कहां? 10 Updates में जानिए पूरी कहानी

नेपाल के रसुवा में 26 अगस्त को अचानक आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है. करीब 157 लोगों की मौत और 403 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है.

नेपाल में चीन सीमा से आया मौत का सैलाब, मौत का आंकड़ा पहुंचा 150 पार; 133 भारतीय कहां? 10 Updates में जानिए पूरी कहानी
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26 अगस्त 2026 की सुबह नेपाल के लिए एक ऐसी त्रासदी लेकर आई, जिसकी तस्वीरें और आंकड़े लंबे समय तक लोगों को डराते रहेंगे. चीन की सीमा से सटे रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी अचानक मौत का सैलाब बन गई. कुछ ही मिनटों में पानी का बहाव इतना तेज हो गया कि लोगों को संभलने, घरों से निकलने और अपने परिवार को सुरक्षित करने तक का वक्त नहीं मिला.

देखते ही देखते सड़कें गायब हो गईं, वाहन पानी में बह गए और कई बस्तियों में चीख-पुकार मच गई. इस हादसे करीब मौत का आंकड़ा 150 पार हो चुका है. तो वहीं भारत के यूपी और बिहार के कई जिलों में अलर्ट जारी है यानी किसी वक्त नदी के आसपास वाले इलाके में कुछ भी हो सकता है वहीं दोनों राज्य के मुख्यमंत्री इस पर नजर रखे हुए हैं. इसी के साथ आइए पूरी तबाही का घटना क्रम जानते हैं अब तक क्या हुआ है.

  1. कुछ मिनटों में बदल गई पूरी तस्वीर- 26 अगस्त की सुबह रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी का पानी अचानक बढ़ गया. स्थानीय समयानुसार करीब 9 बजे आए तेज बहाव ने लोगों को संभलने का मौका तक नहीं दिया. देखते ही देखते सड़कें, वाहन और कई ढांचे पानी की चपेट में आ गए.
  2. नेपाल बाढ़ हादसे में अब तक कितना पहुंचा मौत का आंकड़ा?
    नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के अनुसार बाढ़ की इस भयावह घटना में अब तक 98 लोगों की मौत हो चुकी है. तो वहीं कुछ रिपोर्ट के मुताबिक मौत का आंकड़ा 150 पार हो चुका है. नेपाल पर्यटन बोर्ड के मुताबिक 403 लोग अभी भी लापता हैं. इनमें 62 नेपाली और 341 विदेशी नागरिक बताए जा रहे हैं.
  3. लापता विदेशी नागरिकों में 133 भारतीय- 403 लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिक भी शामिल बताए गए हैं. इस खबर के बाद भारत में भी उन परिवारों की चिंता बढ़ गई है, जिनके अपने लोग नेपाल में मौजूद थे और अब उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है.
  4. चीन के तिब्बत क्षेत्र से आया अचानक पानी- रसुवा चीन के तिब्बत क्षेत्र से सटा हुआ है. अधिकारियों के शुरुआती विवरण के मुताबिक, तिब्बत की ओर से अचानक पानी का तेज बहाव नेपाल की तरफ आया और भोटेकोशी नदी में तबाही मचा दी. चीन के सरकारी मीडिया CCTV ने भी तिब्बत में नुकसान की जानकारी दी है.
  5. भोटेकोशी बनी तबाही की धारा- तिमुरे और स्याफ्रुबेसी इलाके में पानी ने बेहद तेजी से अपना असर दिखाया. नदी के किनारे मौजूद घर, वाहन और दूसरी संरचनाएं इसकी चपेट में आईं. कई जगहों पर सड़क और संपर्क व्यवस्था प्रभावित हुई, जिससे राहत दलों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा.
  6. भूकंप और हिमस्खलन की आशंका- नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने प्रतिनिधि सभा में बताया कि रसुवा की आपदा के पीछे भूकंप के साथ आया हिमस्खलन संभावित कारण हो सकता है. हालांकि, अभी घटना की अंतिम वैज्ञानिक वजह स्पष्ट नहीं हुई है. ग्लेशियल झील के टूटने समेत अन्य संभावनाओं की भी जांच जरूरी है.
  7. बाढ़ का असर आगे भी बढ़ा- भोटेकोशी नदी का पानी आगे त्रिशूली नदी बेसिन की ओर बढ़ा. इसके चलते नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन समेत कई इलाकों के लिए भी सावधानी बरतने की चेतावनी दी गई. नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई.
  8. नेपाल ने सेना और पुलिस को उतारा- प्रधानमंत्री बालेन शाह ने आपात बैठक बुलाकर हालात की समीक्षा की. नेपाल सरकार ने नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को राहत एवं बचाव अभियान में लगाया है. प्रभावित इलाकों में हेलीकॉप्टर भी भेजे गए हैं.
  9. भारत ने भेजी 10 टन राहत सामग्री- भारत ने नेपाल की मदद के लिए 10 टन मानवीय सहायता, आपदा राहत सामग्री और जरूरी दवाइयां भेजी हैं. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत नेपाल के साथ खड़ा है. वहीं, केरल से नेपाल गया 36 सदस्यों का एक दल सुरक्षित बताया गया है.
  10. नेपाल में फिलहाल कैसे हैं हालात? बाढ़ प्रभावित इलाकों की ताजा स्थिति पर राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के प्रवक्ता जगदीश खरेल ने कहा कि नेपाल इस समय बेहद दर्दनाक स्थिति से गुजर रहा है. उन्होंने दावा किया कि तिब्बत की ओर से ग्लेशियल झील के फटने से अचानक आए पानी ने नेपाल में बड़े पैमाने पर जान-माल को नुकसान पहुंचाया है. उन्होंने बताया कि रसुवा, नुवाकोट, गोरखा, धादिंग और चितवन समेत छह से ज्यादा जिले बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. नदी किनारे मौजूद ज्यादातर बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है. सरकार के नेतृत्व में खोज, बचाव और राहत अभियान तेजी से चलाया जा रहा है और संबंधित सभी तंत्रों को प्रभावित इलाकों में भेजकर राहत कार्य में लगाया गया है.

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