सोने की कीमत क्या 15 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच जाएगी? मशहूर अरबपति के दावे से मचा हड़कंप
सोने की कीमतों को लेकर अरबपति निवेशक और Electrum के चेयरमैन Thomas Kaplan ने बड़ा अनुमान जताया है. उनका कहना है कि आने वाले समय में सोने की कीमत करीब ₹15 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती है. हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि यह स्तर कब तक हासिल हो सकता है.
Gold Price Prediction: क्या 15 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक सोना पहुंचा जाएगा? यह सवाल इसलिए कि एक बड़े बिजनेसमैन ने यह अनुमान जताया है कि सोने की कीमतों में पिछले कुछ समय में भले ही गिरावट देखने को मिली हो, लेकिन लंबे समय के लिए यह गिरावट नहीं रहेगी. सोने की कीमत में तेजी से इजाफा होगा. यह दावा अरबपति निवेशक Thomas Kaplan ने दिया है, जिससे सोने की कीमत को लेक बाजार में चर्चा तेज हो गई है.
Kaplan का मानना है कि आने वाले वर्षों में सोने की कीमत $30,000, $40,000 और यहां तक कि $50,000 प्रति औंस तक पहुंच सकती है. उन्होंने इसे महज एक संभावना नहीं, बल्कि लंबे समय में लगभग अपरिहार्य तेजी के तौर पर देखा है.
'सोना $50,000 तक जा सकता है'
Thomas Kaplan ने Kitco News को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि उन्हें सोने के $30,000-$50,000 प्रति औंस तक जाने में कोई बड़ी परेशानी नजर नहीं आती. उन्होंने कहा कि मौजूदा स्तर से सोने की कीमत में करीब 10 गुना वृद्धि उन्हें केवल संभावित ही नहीं, बल्कि अपरिहार्य लगती है. हालांकि, Kaplan ने इस अनुमान के लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई है. इसलिए उनके बयान को किसी तय तारीख या निश्चित मूल्य लक्ष्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.
$50,000 प्रति औंस भारतीय रुपये में कितना होगा?
दिए गए अनुमान को अगर समझने के लिए $1 = ₹95 की औसत विनिमय दर मानें, तो $50,000 प्रति औंस सोने की कीमत लगभग ₹47.5 लाख प्रति ट्रॉय औंस होगी. एक ट्रॉय औंस करीब 31.1 ग्राम होता है. इस हिसाब से कीमत लगभग ₹15.3 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बैठती है. यानी अगर कभी सोना $50,000 प्रति औंस तक पहुंचता है, तो भारतीय बाजार में 10 ग्राम सोने की कीमत मौजूदा स्तरों की तुलना में कई गुना ज्यादा हो सकती है. हालांकि वास्तविक भारतीय कीमत पर डॉलर-रुपया विनिमय दर, आयात शुल्क, टैक्स, स्थानीय प्रीमियम और बाजार की स्थिति जैसे कई कारकों का असर पड़ेगा.
अभी सोने में क्यों आई गिरावट?
सोने ने 2025 में शानदार तेजी दिखाई थी और रिकॉर्ड स्तरों के आसपास पहुंच गया था. इसके बाद हाल के महीनों में कीमतों में कुछ करेक्शन देखने को मिला है. इस गिरावट के बाद बाजार में यह सवाल उठने लगा कि क्या सोने का लंबा बुल रन खत्म हो गया है। Kaplan इस गिरावट को अलग नजरिए से देखते हैं. उनके मुताबिक यह एक बड़े और लंबे बुल मार्केट के बीच आने वाला करेक्शन भी हो सकता है. उन्होंने मौजूदा स्थिति की तुलना 1987 के Black Monday से की है.
1987 के क्रैश का उदाहरण क्यों दिया?
Kaplan का कहना है कि किसी बड़े बुल मार्केट के दौरान आने वाली भारी गिरावट को उस समय निवेशक बहुत गंभीर मान सकते हैं, लेकिन लंबे समय के चार्ट पर बाद में वही गिरावट छोटी दिखाई दे सकती है. 1987 में अमेरिकी शेयर बाजार में Black Monday के दौरान Dow Jones में करीब 36 फीसदी की गिरावट आई थी. उस समय यह गिरावट बेहद बड़ी और विनाशकारी लग रही थी, लेकिन दशकों के लंबे चार्ट में यह गिरावट अपेक्षाकृत छोटी नजर आती है. Kaplan इसी उदाहरण के जरिए समझाते हैं कि अगर सोने में भी बड़ी गिरावट आती है, तो उसे हमेशा लंबे समय की तेजी खत्म होने का संकेत नहीं माना जाना चाहिए.
'करेक्शन खरीदारी का मौका हो सकता है'
Kaplan इससे पहले भी कह चुके हैं कि सोने और चांदी में बड़ी गिरावट आती है तो उसे संकट के बजाय खरीदारी के अवसर के रूप में देखा जा सकता है. उन्होंने कहा कि उन्हें यह निश्चित नहीं पता कि मौजूदा करेक्शन खत्म हो चुका है या सोना फिर से नीचे जाकर अपने निचले स्तर को टेस्ट करेगा। लेकिन लंबी और मध्यम अवधि को लेकर उनका नजरिया सकारात्मक बना हुआ है. उनका मानना है कि लंबे समय में सोना और चांदी मौजूदा स्तरों से काफी ऊपर जा सकते हैं.
सिर्फ Thomas Kaplan ही नहीं, दूसरे निवेशक भी बुलिश
सोने और चांदी को लेकर सकारात्मक नजरिया रखने वाले Kaplan अकेले नहीं हैं. Rich Dad Poor Dad के लेखक Robert Kiyosaki भी लंबे समय से सोने और चांदी को लेकर तेजी का रुख रखते हैं. Kiyosaki ने निवेशक Jim Rogers के विचारों का भी हवाला दिया है. Rogers का मानना है कि लंबी अवधि में सोने और चांदी में बड़ी तेजी आ सकती है, हालांकि इस रास्ते में तेज गिरावट और करेक्शन भी देखने को मिल सकते हैं.
Kaplan को सोने पर इतना भरोसा क्यों है?
Kaplan ने सोने और चांदी को अपने परिवार की संपत्ति का महत्वपूर्ण आधार बनाया है. 2007 में Leor Energy की बिक्री के बाद उन्होंने कीमती धातुओं और माइनिंग सेक्टर में अपना फोकस बढ़ाया. वह Electrum Group के चेयरमैन हैं और NOVAGOLD तथा Sunshine Silver Mining and Refining से भी जुड़े हैं.
हालांकि यहां यह समझना जरूरी है कि $50,000 प्रति औंस का अनुमान एक व्यक्तिगत बाजार पूर्वानुमान है, कोई निश्चित भविष्यवाणी नहीं. सोने की कीमतें ब्याज दरों, महंगाई, केंद्रीय बैंकों की खरीद, भू-राजनीतिक तनाव, डॉलर की मजबूती और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों समेत कई कारकों से प्रभावित होती हैं. इसलिए आम निवेशकों के लिए केवल किसी विशेषज्ञ के बड़े price target के आधार पर निवेश का फैसला करना उचित नहीं होगा.




