Begin typing your search...

नेपाल की नीयत में खोट! चीनी कैमरों से भारत में अंदर तक झांक रहा, बॉर्डर पर इंडिया कितना अलर्ट, 5 पॉइंट में जानें सब

नेपाल ने भारत-नेपाल सीमा के कुछ हिस्सों में चीन निर्मित थर्मल निगरानी कैमरे लगाने शुरू किए हैं. इन कैमरों की क्षमता को लेकर कई दावे किए जा रहे हैं, जबकि भारत भी सीमा सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत बना रहा है.

नेपाल की नीयत में खोट! चीनी कैमरों से भारत में अंदर तक झांक रहा, बॉर्डर पर इंडिया कितना अलर्ट, 5 पॉइंट में जानें सब
X
( Image Source:  AI Created )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय2 Mins Read

Updated on: 8 Jun 2026 12:54 PM IST

भारत और नेपाल की सीमा पर सुरक्षा और निगरानी को लेकर एक नया अपडेट सामने आया है. बताया जा रहा है कि नेपाल ने उत्तराखंड से सटी अपनी सीमा के कुछ हिस्सों पर चीन में बने थर्मल निगरानी कैमरे (Thermal Surveillance Cameras) लगाने शुरू कर दिए हैं. इन कैमरों को लेकर दावा किया जा रहा है कि ये बेहद आधुनिक हैं और भारतीय क्षेत्र के भीतर लगभग 10 किलोमीटर तक की गतिविधियों पर नज़र रखने और उन्हें रिकॉर्ड करने की क्षमता रखते हैं.

साथ ही, इनके संचालन के लिए चीनी इंटरनेट नेटवर्क के इस्तेमाल की बात भी कही जा रही है. हालांकि, भारतीय और नेपाली अधिकारियों द्वारा '10 किलोमीटर तक की निगरानी' और 'चीनी नेटवर्क के उपयोग' से जुड़े दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, और इन्हें फिलहाल अफवाह ही माना जा रहा है. ऐसा करने का मकसद सिर्फ यह है कि नेपाल द्वारा अपनी सीमा सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाया जाए.

इस पूरे मामले को आप नीचे दिए गए 5 मुख्य बिंदुओं में आसानी से समझ सकते हैं:

  1. चीन निर्मित कैमरों की तैनाती: नेपाल ने उत्तराखंड से लगी भारत-नेपाल सीमा पर चीन में बने आधुनिक थर्मल कैमरे लगाने की शुरुआत की है, जो दिन और रात दोनों समय लंबी दूरी तक निगरानी करने में सक्षम हैं.
  2. निगरानी क्षमता और चीनी नेटवर्क का दावा: रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ये कैमरे भारतीय क्षेत्र के 10 किमी अंदर तक देख सकते हैं और चीनी इंटरनेट नेटवर्क पर काम करते हैं; हालांकि, दोनों देशों के अधिकारियों ने अभी तक इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.
  3. पुरानी योजनाओं का हिस्सा: यह परियोजना नेपाल और चीन के बीच 2016 में हुए तकनीकी सहयोग समझौते और 2019 में स्वीकृत हुए फंड का हिस्सा है, जिसके तहत झूलाघाट सहित कई सीमा बिंदुओं का सर्वेक्षण किया गया था।
  4. सीमा विवाद के बाद बुनियादी ढांचे में तेजी: साल 2020 के कालापानी-लिपुलेख विवाद के बाद नेपाल ने छांगरू के पास सशस्त्र पुलिस बल का मुख्यालय बनाया और 15 से अधिक नई सीमा चौकियां स्थापित कर उन्हें इस तकनीक से जोड़ा है।
  5. भारत की जवाबी तैयारी: उत्तराखंड के पिथौरागढ़, चंपावत और उधम सिंह नगर जिलों से लगी 275 किमी लंबी सीमा पर भारतीय एजेंसियों ने भी डिजिटल रिकॉर्डिंग सिस्टम, कड़े स्क्रीनिंग उपकरण और एसएसबी (SSB) व स्थानीय पुलिस की संयुक्त गश्त को बढ़ा दिया है.
अगला लेख