कब थमेंगे हिंदुओं पर अत्याचार! बांग्लादेश में भीड़ ने हिंदू शख्स को पहले पेट में मारा चाकू, फिर जलाकर मार डाला
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे हमलों की कड़ी लगातार लंबी होती जा रही है. शरियतपुर जिले से सामने आए ताजे मामले में एक हिंदू शख्स को भीड़ ने निशान बनाया और उस पर चाकू से हमला किया फिर आखिर में आग के हवाले कर दिया.
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. ताजा मामला शरियतपुर जिले से सामने आया है, जहां एक हिंदू व्यक्ति को भीड़ ने बेरहमी से निशाना बनाया. पहले उसके पेट में चाकू घोंपा गया, फिर उस पर पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया गया.
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यह दिल दहला देने वाली वारदात न सिर्फ इंसानियत को शर्मसार करती है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि आखिर बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा कितनी मजबूत है. लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि अल्पसंख्यक समुदाय पर हो रहे अत्याचार कब रुकेंगे.
दुकान बंद कर लौट रहे थे घर
परिजनों और स्थानीय मीडिया की जानकारी के अनुसार, 31 दिसंबर की रात खोकन दास रोज की तरह दुकान बंद कर अपने घर जा रहे थे. रास्ते में अचानक कुछ लोगों की हिंसक भीड़ ने उन्हें रोक लिया. पहले उनके पेट के निचले हिस्से में चाकू से हमला किया गया, फिर सिर पर वार किया गया. इसके बाद हमलावरों ने बेरहमी की हद पार करते हुए उन पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी.
तालाब में कूदकर बचाने की कोशिश
आग की लपटों में घिरे खोकन दास ने जान बचाने के लिए किसी तरह पास के तालाब में छलांग लगा दी. इससे आग तो बुझ गई, लेकिन तब तक वह गंभीर रूप से झुलस चुके थे. गांव के लोगों ने तुरंत उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां से हालत नाजुक होने पर ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया. अधिक जलने और ज्यादा खून बहने की वजह से आखिरकार उनकी जान नहीं बच सकी.
“मेरे पति की किसी से दुश्मनी नहीं थी”
खोकन दास की पत्नी का दर्द शब्दों में साफ झलक रहा था. उन्होंने रोते हुए कहा कि उनके पति एक बेहद साधारण और शांत स्वभाव के इंसान थे, जिनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी. उन्हें आज भी समझ नहीं आ रहा कि आखिर इतनी निर्दयता से उनके पति को क्यों मार दिया गया. उन्होंने कहा कि अब उनके पास बस न्याय की उम्मीद बची है. उनका यह दर्द भरा सवाल आज पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर रहा है.
दो हफ्तों में चौथा हमला
यह मामला पिछले दो हफ्तों में किसी हिंदू पर हुआ चौथा गंभीर हमला माना जा रहा है. इससे पहले 24 दिसंबर को अमृत मंडल को एक भीड़ ने बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला था. वहीं 18 दिसंबर को दीपु चंद्र दास को झूठे ईशनिंदा के आरोप में मार दिया गया, उसके बाद शव को पेड़ से लटकाकर आग लगा दी गई. इन लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद, मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार कई बार यह कहकर जिम्मेदारी से बचती नजर आई कि इन हमलों के पीछे सांप्रदायिक नहीं, बल्कि आपराधिक वजहें हैं.
बांग्लादेश में हिंदुओं पर कब तक हमला
मानवाधिकार संगठनों और पीड़ित परिवारों का कहना है कि बार-बार हिंदुओं को ही शिकार बनाया जाना सिर्फ इत्तेफाक नहीं हो सकता. सवाल साफ है. अगर यह सांप्रदायिक हिंसा नहीं है, तो फिर मरने वाले ज्यादातर हिंदू ही क्यों हैं? खोकन दास की मौत ने एक बार फिर बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.





