27 साल तक NASA के साथ काम करने, तीन अंतरिक्ष मिशनों और कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिताने के बाद अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने रिटायरमेंट ले लिया है.
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स्पेस जाने वाली दूसरी भारतीय महिला
सुनीता विलियम्स का जन्म 19 सितंबर 1965 को अमेरिका में हुआ. वह स्पेस में जाने वाली दूसरी भारतीय महिला हैं.
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1998 में हुआ सेलेक्शन
1998 में सुनीता का नासा के अंतरिक्ष यात्री के तौर पर सेलेक्शन हुआ. सुनीता ने अपने करियर में तीन अंतरिक्ष मिशन पूरे किए.
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स्पेस में बिताए 608 दिन
सुनीता विलियम्स ने कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए, जो नासा के इतिहास में दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है.
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एक ही मिशन में 286 दिन
सुनीता एक ही मिशन में 286 दिन अंतरिक्ष में रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी हैं.
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पहला मिशने में बनीं फ्लाइट इंजीनियर
उनका पहला मिशन 9 दिसंबर 2006 को स्पेस शटल डिस्कवरी से शुरू हुआ. एक्सपीडिशन 14/15 में उन्होंने फ्लाइट इंजीनियर की भूमिका निभाई.
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चार स्पेसवॉक का रिकॉर्ड
स्पेस शटल डिस्कवरी के अपने पहले मिशन में ही उन्होंने चार स्पेसवॉक कर रिकॉर्ड बनाया.
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दूसरा मिशन
दूसरा मिशन 2012 में कजाखस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से लॉन्च हुआ. सुनीता विलियम्स इस मिशन का हिस्सा थीं.
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तकनीकी समस्या को किया ठीक
इस मिशन में उन्होंने ISS के अमोनिया लीक जैसी गंभीर तकनीकी समस्या को ठीक किया.
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मुश्किल था दूसरा मिशन
सुनीता विलियम्स का दूसरा मिशन तकनीकी रूप से सबसे चुनौतीपूर्ण मिशनों में गिना जाता है.
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तीसरा मिशन
उनका तीसरा और आखिरी मिशन जून 2024 में शुरू हुआ. यह मिशन बोइंग स्टारलाइनर के जरिए किया गया पहला क्रू फ्लाइट टेस्ट था.
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साढ़े नौ महीने चला मिशन
तीसरे मिशन का पीरियड 10 दिन तय था, लेकिन यह करीब साढ़े नौ महीने तक चला.
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2025 में लौटे पृथ्वी
अपने तीसरे मिशन से सुनीता और बुच विलमोर मार्च 2025 में पृथ्वी पर लौटे. यह समय उनके लिए काफी मुश्किल भरा था.
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9 स्पेसवॉक किए
सुनीता विलियम्स ने कुल 9 स्पेसवॉक किए, जिनकी अवधि 62 घंटे 6 मिनट रही. यह किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री द्वारा सबसे अधिक स्पेसवॉक समय है.
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स्पेस में मैरथन
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ने वाली पहली इंसान बनी हैं.
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150 से ज्यादा एक्सपेरिमेंट
इंटरनेशनल स्पेस सिस्टम पर रहते हुए उन्होंने 150 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोगों में भाग लिया.
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तीसरे स्पेस मिशन के दौरान उनके खाने में पाउडर दूध, पिज्जा, रोस्ट चिकन और टूना शामिल था.
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ट्रेलब्लेज़र का दिया टैग
नासा के प्रशासक जारेड आइजैकमैन ने सुनीता विलियम्स की तारीफ करते हुए उन्हें ह्यूमन स्पेस फ्लाइट की ट्रेलब्लेज़र का टैग दिया.
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1840 करोड़ रुपये हुए खर्च
नासा के अनुसार, तीसरे मिशन के दौरान सुनीता संग टीम की वापसी पर करीब 1840 करोड़ रुपये खर्च हुए.
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पूरी मिशन की लागत
वहीं, पूरे मिशन की अनुमानित लागत 1670 से 2500 करोड़ रुपये के बीच मानी जाती है.
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सबसे पसंदीदा जगह स्पेस
रिटायरमेंट पर सुनीता ने कहा कि अंतरिक्ष उनकी सबसे पसंदीदा जगह रही है और ISS भविष्य के मून व मार्स मिशनों की बुनियाद है.
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Nasa रचेगा नया इतिहास
सुनीता ने कहा कि भले ही वह अब किसी मिशन का प्रत्यक्ष हिस्सा न हों, लेकिन नासा और उसके साझेदारों को नई उपलब्धियां हासिल करते और इतिहास रचते देखना उनके लिए बेहद रोमांचक होगा.
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सुभांशु शुक्ला को लेकर कही ये बात
सुनीता ने इसरो के आने वाले अंतरिक्ष मिशन को लेकर भी खुशी जाहिर की, जिसमें भारतीय वायुसेना के पायलट सुभांशु शुक्ला की भागीदारी होगी.
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भारत स्पेस में बना रहा अपनी जगह
सुनीता विलियम्स ने कहा कि भारत तेजी से अंतरिक्ष के क्षेत्र में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है और वह इस मिशन में भारत का सहयोग करने के लिए पूरी तरह तत्पर हैं.
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खुद को धरती पर कैसे ढाला?
तीसरे मिशन से लौटने के बाद सुनीता विलियम्स को खुद को धरती पर ढालना मुश्किल हो रहा था. इसके लिए उन्हें कुछ एक्सरसाइज करने के लिए कहा था.
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हमेशा याद रखा जाएगा योगदान
सुनीता विलियम्स की सेवानिवृत्ति भले ही एक दौर के समाप्त होने का संकेत हो, लेकिन नासा और अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में उनका योगदान और विरासत हमेशा अमर रहेगी.