January 29, 2026
लद्दाख के हैंले डार्क स्काई रिज़र्व में 19 और 20 जनवरी को आसमान खूनी लाल हो गया, जिसे देखकर सोशल मीडिया पर लोग हैरान हो गए. लेकिन इस खूबसूरती के पीछे वैज्ञानिक सच डरावना है, जो भारत के लिए खतरे की बात है.
हैंले में दिखाई देने वाली लाल रोशनी सोलर एक्टिविटी के कारण हुई. 18 जनवरी को X-क्लास सोलर फ्लेयर फटा और साथ में कॉरोनल मास इजेक्शन (CME) निकला, जो 1,700 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से पृथ्वी की ओर आया.
सौर कणों के पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराने पर G4 लेवल का भू-चुंबकीय तूफ़ान पैदा हुआ. इस तरह के तूफ़ान पृथ्वी की मैग्नेटिक शील्ड को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं.
ISRO के अनुसार, सूर्य की गतिविधियां अधिक बार और तेज होती जा रही हैं क्योंकि हम सोलर मैक्सिमम के करीब हैं.
दरअसल भू-चुंबकीय तूफ़ान बिजली ग्रिड, GPS, बैंकिंग सिस्टम और सैटेलाइट पर असर डाल सकते हैं. वायुमंडल फैलने से सैटेलाइट ऑर्बिट्स भी प्रभावित हो सकते हैं.
भारत सौर तूफ़ानों की पूर्व चेतावनी के लिए Aditya-L1 मिशन का उपयोग कर रहा है. CME को पहले पहचानकर 24-48 घंटे का अलर्ट दिया जा सकता है.