9 मार्च 2004… भारत-पाकिस्तान मुल्तान टेस्ट का वो दिन, जिसे भारतीय क्रिकेट फैंस आज भी गुस्से, सवालों और बहस के साथ याद करते हैं. सचिन तेंदुलकर 194 रन पर नाबाद थे - अपने करियर के पहले डबल सेंचुरी से महज़ 6 रन दूर. पूरा देश सांस रोके बैठा था, तभी ड्रेसिंग रूम से एक ऐसा फैसला आया जिसने इतिहास बदल दिया. कप्तान राहुल द्रविड़ ने पारी घोषित कर दी. यह सिर्फ एक declaration नहीं थी, बल्कि एक ऐसा निर्णय था जिसने “टीम बनाम खिलाड़ी” की बहस को जन्म दे दिया. सवाल उठे - क्या यह टीम इंडिया की रणनीति थी या सचिन के साथ नाइंसाफी? बाद में इस फैसले पर कई दिग्गजों ने खुलकर बात की. आकाश चोपड़ा ने इसे टेस्ट मैच की जरूरत बताया, जबकि सौरव गांगुली ने कहा कि उस वक्त जीत सबसे बड़ी प्राथमिकता थी. खुद सचिन तेंदुलकर ने अपनी किताब Playing It My Way में इस पल को बेहद संयम और परिपक्वता के साथ याद किया. क्या सचिन और द्रविड़ के बीच वाकई कोई टकराव हुआ था? या यह सिर्फ एक क्रिकेटिंग फैसला था, जिसे भावनाओं ने विवाद बना दिया? मुल्तान टेस्ट की यह कहानी आज भी क्रिकेट इतिहास की सबसे चर्चित और संवेदनशील घटनाओं में गिनी जाती है.