दुनिया की अर्थव्यवस्था एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में दिखाई दे रही है. Iran और United States के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात अब सिर्फ भू-राजनीतिक संघर्ष तक सीमित नहीं रहे, बल्कि इसका असर वैश्विक बाजारों और निवेश पर भी साफ दिखने लगा है. तेल की कीमतों में उछाल, बढ़ती महंगाई और संभावित मंदी की आशंकाओं ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों को हिला दिया है.