भारत ने स्वदेशी रक्षा तकनीक की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 350 किलोग्राम थ्रस्ट वाला पहला स्वदेशी टर्बोजेट इंजन विकसित किया है. इसे DRDO की GTRE लैब और हैदराबाद की आजाद इंजियरिंग ने मिलकर तैयार किया है. यह इंजन भविष्य के स्टेल्थ ड्रोन, क्रूज मिसाइल और अन्य रक्षा प्रणालियों के लिए अहम साबित हो सकता है. अब तक भारत जेट इंजन तकनीक के लिए विदेशी देशों पर काफी हद तक निर्भर था. इस सफलता से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है. हालांकि, यह अभी फाइटर जेट इंजन का विकल्प नहीं है, बल्कि उच्च क्षमता वाले स्वदेशी इंजनों के विकास की शुरुआती सीढ़ी माना जा रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार, इस उपलब्धि से भारतीय निजी उद्योग की क्षमता भी सामने आई है. यह कदम भविष्य में स्वदेशी रक्षा तकनीक को मजबूत बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है.