एलन मस्क का बयान भारत की घरेलू राजनीति के सबसे संवेदनशील नस कार्पोरेट मोनोपोली बनाम आम जनता पर जाकर लगा है. जहां एक तरफ राहुल गांधी इसे सरकार की नीतियों के खिलाफ वैश्विक मुहर बता रहे हैं, वहीं सरकार का तर्क है कि देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय संप्रभुता से किसी विदेशी अरबपति की जल्दबाजी के लिए समझौता नहीं किया जा सकता. जब तक सुरक्षा एजेंसियां हरी झंडी नहीं दे देतीं, मस्क का स्टारलिंक भारत के आसमान में उड़ान नहीं भर सकता.