दिशा सालियान और उसके ठीक 6-7 दिन बाद ही एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की ‘मौत’ संदिग्ध या सुसाइड तो कतई नहीं थी. वह डबल मर्डर था. बस महाराष्ट्र पुलिस और वहां की राजनीति के डरावने पंजों ने इन दोनो बदकिस्मतों की मौत को इस तरह के खुद में जकड़ लिया था, जो आज तक दोनो ही मौतों को ‘संदिग्ध’ कहा या गाया जा रहा है. जबकि यह दोनो एक दूसरे से जुड़े हुए कत्ल हैं. मैं दावे के साथ कह रहा हूं कि अगर अब बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर दिशा सालियान की मौत की जांच में जुटी सीबीआई अब भी अपनी ‘सरकारी तोते’ की बदनाम छवि से बाहर आना चाहती है तो वह इस जांच में दूध का दूध पानी का पानी करके अपनी खोई हुई इज्जत वापिस पा सकती है. यह तमाम बातें बेबाकी से बयान की हैं स्टेट मिरर हिंदी के एडिटर क्राइम इनवेस्टीगेशन संजीव चौहान के साथ विशेष बातचीत म् 1974 बैच के पूर्व आईपीएस अधिकारी और उत्तर प्रदेश के रिटायर्ड पुलिस महानिदेशक डॉ. विक्रम सिंह ने. उन्होंने तो यहां तक दावा ठोंका है कि इस मामले की सीबीआई द्वारा ईमानदारी से कर ली गई जांच में कई सफेदपोशों को भी भविष्य ‘द़ागी’ हो सकते हैं.