दिल्ली का रामलीला मैदान सिर्फ रामलीला और धार्मिक आयोजनों की जगह नहीं, बल्कि देश के राजनीतिक और ऐतिहासिक बदलावों का भी गवाह रहा है. कभी तालाब रहे इस मैदान को 1930 में रामलीला के आयोजन के लिए तैयार किया गया था. इसी मंच से महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल जैसे नेताओं ने जनसभाएं कीं. लता मंगेशकर ने यहीं 'ऐ मेरे वतन के लोगों' गीत गाया, तो लाल बहादुर शास्त्री ने 'जय जवान, जय किसान' का नारा दिया. जेपी आंदोलन से लेकर अन्ना आंदोलन तक, जानिए इस मैदान का पूरा इतिहास और क्यों यह एक बार फिर विरोध-प्रदर्शनों का अहम केंद्र बनने जा रहा है.