कश्मीर के इतिहास और 1947 के भारत-पाक युद्ध को लेकर स्टेट मिरर हिंदी के साथ बातचीत में कश्मीरी एक्टिविस्ट और राजनीतिक विश्लेषक सुशील पंडित ने कई बड़े दावे किए. उन्होंने कहा कि 1947 में कश्मीर पर हमला केवल कबायली हमला नहीं, बल्कि पाकिस्तान की सेना का सुनियोजित सैन्य आक्रमण था. दावा किया गया कि संयुक्त राष्ट्र आयोग और जस्टिस ओवन डिक्सन की रिपोर्ट में भी पाकिस्तान की सैन्य मौजूदगी का उल्लेख है. सुशील पंडित ने कहा कि महाराजा हरि सिंह पहले ही भारत में विलय चाहते थे, लेकिन विलय में देरी हुई. तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने सेना भेजने में देर की. उन्होंने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल के हस्तक्षेप के बाद भारतीय सेना कश्मीर भेजी गई. सुशील पंडित ने शेख अब्दुल्ला और नेहरू के संबंधों का भी जिक्र किया गया और 1946 के 'क्विट कश्मीर' आंदोलन पर टिप्पणी की . उन्होंने दवाा किया कि युद्ध के दौरान भारतीय सेना बढ़त बना चुकी थी, लेकिन 1 जनवरी 1949 को युद्धविराम लागू कर दिया गया. वक्ता ने आरोप लगाया कि युद्धविराम के कारण कश्मीर का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में रह गया.