उत्तराखंड में आपदा के खतरे की घंटी! माणा-बदरीनाथ पर मंडरा रहा संकट; NGT ने भेजा नोटिस
उत्तराखंड के संवेदनशील इलाकों में ग्लेशियर टूटने का खतरा बढ़ गया है, जिससे बड़े हिमस्खलन की आशंका है. NGT ने केंद्र और संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, वहीं सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही फेक खबरों पर भी सख्ती बढ़ी.
मध्य हिमालय की ऊंची और बहुत खतरनाक ढलानों पर कई अस्थिर ग्लेशियर लटक रहे हैं. ये ग्लेशियर अब बड़े खतरे की चेतावनी दे रहे हैं. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने इन ग्लेशियरों से हो सकने वाले भयंकर हिमस्खलन (glacier burst) और उससे नीचे वाले इलाकों में पड़ने वाले भारी जोखिम को बहुत गंभीरता से लिया है. एनजीटी ने इस मामले में केंद्र सरकार और कई महत्वपूर्ण सरकारी संस्थाओं से जवाब मांगा है. उपग्रह की तस्वीरों और वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर पता चला है कि उत्तराखंड के माणा, बदरीनाथ और हनुमान चट्टी जैसे संवेदनशील इलाकों पर यह खतरा मंडरा रहा है. अगर ये अस्थिर ग्लेशियर फटे या गिरे तो बड़े पैमाने पर हिमस्खलन हो सकता है, जो नीचे बसे इलाकों के लिए बहुत विनाशकारी साबित हो सकता है.
एनजीटी ने खुद संज्ञान लिया
एक अखबार में छपी रिपोर्ट के आधार पर एनजीटी ने इस मामले पर खुद-ब-खुद संज्ञान लिया और सुनवाई शुरू की. रिपोर्ट में वैज्ञानिक अध्ययन का जिक्र करते हुए पर्यावरण की गंभीर चिंताओं को उठाया गया था. रिपोर्ट में साफ कहा गया कि मध्य हिमालय की पर्वतीय ढलानों पर लटके हुए ये अस्थिर ग्लेशियर कभी भी भारी हिमस्खलन का कारण बन सकते हैं और नीचे के इलाकों में बड़ी आपदा पैदा कर सकते हैं.
सैटेलाइट इमेज से पता चला खतरा
24 अप्रैल को एनजीटी की पीठ जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद कर रहे थे, ने इस रिपोर्ट पर गौर किया. पीठ ने बताया कि रिसर्चर्स ने सॅटॅलाइट इमेजेज और ऊंचाई वाले डिजिटल मॉडल (elevation model) का इस्तेमाल करके यह पता लगाया कि हिमस्खलन कितनी दूर तक जा सकता है और उसका कितना बड़ा प्रभाव पड़ सकता है. उनके अध्ययन के अनुसार, सबसे खराब स्थिति में हिमस्खलन का पानी और बर्फ का प्रवाह उत्तराखंड के माणा, बदरीनाथ और हनुमान चट्टी जैसे प्रमुख क्षेत्रों तक पहुंच सकता है. इससे इन इलाकों में रहने वाले लोगों, मंदिरों और पर्यटक स्थलों को भारी नुकसान हो सकता है.
केंद्र सरकार और कई विभागों को नोटिस
एनजीटी ने इस मामले में कई अहम संस्थाओं को प्रतिवादी बनाया है. इनमें शामिल हैं:
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
स्वच्छ गंगा राष्ट्रीय मिशन
उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड
राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान
पीठ ने सभी को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई, जो 6 अगस्त को होनी है, उससे कम से कम एक हफ्ता पहले अपना लिखित जवाब दाखिल करें.
बदरीनाथ तप्त कुंड का वायरल वीडियो
दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इसमें दावा किया जा रहा है कि यह बदरीनाथ के तप्त कुंड का वीडियो है, जिसमें महिलाएं और पुरुष एक साथ स्नान कर रहे हैं और महिलाओं के साथ छेड़छाड़ भी हो रही है. चमोली पुलिस ने इस पर साफ कहा कि यह वीडियो बदरीनाथ तप्त कुंड का बिल्कुल नहीं है. यह किसी और जगह का वीडियो है जिसे गलत तरीके से बदरीनाथ का बताकर फैलाया जा रहा है. पुलिस ने कहा कि जो लोग इस वीडियो को बदरीनाथ का बता रहे हैं, उन्हें चिह्नित किया जा रहा है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. पुलिस ने यह भी बताया कि बदरीनाथ तप्त कुंड में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग स्नान करने के स्थान हैं. वहां पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रहती है, इसलिए ऐसी कोई घटना वहां संभव नहीं है. यह पूरा मामला पर्यावरण सुरक्षा और सोशल मीडिया पर फैल रही गलत खबरों दोनों को लेकर चिंता बढ़ा रहा है.




