जाम का शहर बन गई 'पहाड़ों की रानी' मसूरी, 7 से 8 घंटों के जाम ने घूमने का मजा किया किरकिरा; पर्यटक बेहाल
पहाड़ों की रानी मसूरी में इन दिनों रिकॉर्ड संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं, लेकिन ट्रैफिक व्यवस्था चरमराने से लोगों को घंटों जाम में फंसना पड़ रहा है. स्थानीय लोग और व्यापारी भी प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं.
इन दिनों देशभर में तेज गर्मी पड़ रही है. लोग अपनी परिवार के साथ ठंडी हवा, हरे-भरे पहाड़ों और शांत वादियों का मजा लेने के लिए मसूरी पहुंच रहे हैं. मसूरी को 'पहाड़ों की रानी' कहा जाता है. लेकिन इस बार पर्यटकों का स्वागत ठंडी हवा की बजाय लंबे-लंबे ट्रैफिक जाम ने किया है. दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, चंडीगढ़ और दूसरे शहरों से हजारों पर्यटक हर रोज मसूरी आ रहे हैं. दिल्ली से देहरादून तक का सफर तो सिर्फ ढाई से तीन घंटे में पूरा हो जाता है. लेकिन देहरादून से मसूरी की छोटी सी 31 किलोमीटर की दूरी तय करने में 4 से 5 घंटे, कभी-कभी तो 7-8 घंटे भी लग जा रहे हैं. वीकेंड के दिनों में तो स्थिति और भी खराब हो जाती है. मसूरी की सड़कें अब पर्यटन स्थल जैसी नहीं, बल्कि जाम का शहर जैसी दिख रही हैं. टिहरी बाईपास रोड, गांधी चौक, लाइब्रेरी चौक, पिक्चर पैलेस, माल रोड और कैम्पटी फॉल जाने वाले रास्तों पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहती हैं. कई बार गाड़ियां इंच-इंच करके आगे बढ़ती हैं. घंटों इंतजार के बाद पर्यटक थककर चूर हो जाते हैं.
पर्यटकों की व्यथा
नवभारत टाइम्स के मुताबिक, एक पर्यटक ने बताया हम परिवार के साथ अच्छी छुट्टियां मनाने आए थे. दिल्ली से देहरादून पहुंचने में तीन घंटे लगे, लेकिन देहरादून से मसूरी पहुंचने में पूरे आठ घंटे लग गए. लगता था कि हमारी सारी छुट्टियां सड़क पर ही निकल गईं. ठंडी वादियों का मजा लेने से पहले ही हमारी सारी एनर्जी खत्म हो गई.' बहुत से पर्यटक कह रहे हैं कि उन्होंने सुकून और आराम की उम्मीद की थी, लेकिन प्रशासन की खराब व्यवस्था ने उनकी सारी खुशी छीन ली. वे कहते हैं कि इतने सारे पर्यटक आ रहे हैं, फिर भी ट्रैफिक को संभालने की कोई अच्छी तैयारी नहीं दिख रही है.
पुलिस कम, लोग खुद ट्रैफिक संभाल रहे
जिन जगहों पर सबसे ज्यादा जाम लग रहा है, वहां पुलिस की मौजूदगी बहुत कम है. कई चौराहों पर स्थानीय लोग और खुद पर्यटक गाड़ियों को व्यवस्थित करने की कोशिश कर रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्यटन सीजन शुरू होने से पहले प्रशासन बड़े-बड़े वादे करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है. सबसे ज्यादा परेशानी टिहरी बाईपास रोड पर हो रही है. धनोल्टी, कनाताल और टिहरी की ओर जाने वाले वाहनों की संख्या बहुत ज्यादा है. सड़क संकरी होने के कारण जाम दिन भर बना रहता है. गांधी चौक और आसपास के इलाकों में सड़क किनारे गाड़ियां पार्क कर दी जाती हैं, जिससे समस्या और बढ़ जाती है. स्थानीय लोग कहते हैं कि अवैध पार्किंग पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो रही है.
व्यापारियों पर भी बुरा असर
जाम का असर सिर्फ पर्यटकों तक ही नहीं, बल्कि मसूरी के स्थानीय व्यापारियों पर भी पड़ रहा है. घंटों जाम में फंसे पर्यटक बाजारों तक पहुंचने से कतराते हैं. दुकानें, होटल और रेस्तरां कम ग्राहक मिलने से परेशान हैं. व्यापारी चिंता जता रहे हैं कि अगर यह स्थिति रही तो मसूरी की अच्छी छवि खराब हो जाएगी. पर्यटक आगे चलकर दूसरे पहाड़ी जगहों को पसंद करने लगेंगे.
स्थायी समाधान की जरूरत
स्थानीय नागरिक, सामाजिक संगठन और पर्यटन विशेषज्ञ अब सरकार से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि मसूरी में पर्यटकों की संख्या हर साल बढ़ रही है, लेकिन शहर की सुविधाएं और सड़कें उस हिसाब से नहीं बढ़ पाई हैं.
लोग क्या मांग कर रहे हैं?
बहुमंजिला पार्किंग कॉम्प्लेक्स
वैकल्पिक रास्ते (अल्टरनेटिव रूट)
शटल बस सेवा
स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम
सख्त पार्किंग नियमों का पालन
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते इन समस्याओं का हल नहीं निकाला गया तो मसूरी अपनी सुंदरता और ठंडी वादियों के लिए नहीं, बल्कि ट्रैफिक जाम के लिए मशहूर हो जाएगी.




