धूमधाम शादी के बीच पुलिस ने मारी Entry, दुल्हन का उठाया घूंघट तो उड़ गए होश; फिर जो हुआ...
उत्तराखंड के किच्छा में 15 साल की किशोरी की शादी 27 वर्षीय युवक से कराई जा रही थी. पुलिस और NGO की त्वरित कार्रवाई से बाल विवाह रुकवाया गया और किशोरी को सुरक्षित संरक्षण में लिया गया.
उत्तराखंड के किच्छा से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने 21वीं सदी के समाज पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. जहां बेटियां आज हर क्षेत्र में नाम कमा रही हैं, वहीं कुछ लोग अब भी उन्हें बोझ समझकर बचपन में ही शादी के बंधन में बांधने पर उतारू हैं.
गांव अंजनिया में 15 साल की किशोरी की शादी उससे लगभग दोगुनी उम्र के 27 वर्षीय युवक से कराई जा रही थी. लेकिन ऐन वक्त पर पुलिस और एक स्वयंसेवी संस्था की एंट्री ने पूरा खेल बिगाड़ दिया. जैसे ही घूंघट उठा और सच्चाई सामने आई, वहां मौजूद लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई.
क्या आज भी नहीं बदली सोच?
कभी समाज में कम उम्र में शादी आम बात थी, लेकिन कानून बनने के बाद भी बाल विवाह की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रहीं. शिक्षा की कमी और सामाजिक दबाव आज भी कई परिवारों को ऐसे फैसले लेने पर मजबूर कर देता है.
किच्छा में भी कुछ ऐसा ही हुआ, जहां पूरे धूमधाम से नाबालिग लड़की की शादी की तैयारियां की गईं. शहनाइयां बज रही थीं, बारात सज चुकी थी और मासूम को हरियाणा के 27 वर्षीय युवक के साथ फेरे दिलाने की तैयारी थी.
पुलिस को कैसे लगी भनक?
सोमवार रात को स्वयंसेवी संस्था इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल डेवलपमेंट (आईएसडी) को सूचना मिली कि गांव अंजनिया में नाबालिग की शादी हो रही है. सूचना मिलते ही आईएसडी की परियोजना निदेशक बिन्दुवासिनी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचीं. वहां माहौल पूरी तरह शादी वाला था. बैंड-बाजा, मेहमान और वीडियोग्राफी तक चल रही थी. लेकिन जब टीम ने बच्ची का आधार कार्ड मांगा, तो घरवाले कोई दस्तावेज नहीं दिखा पाए.
स्कूल रिकॉर्ड ने कैसे खोली पोल?
परिवार की आनाकानी के बाद प्रशासन ने स्कूल के दस्तावेज खंगाले. जूनियर हाईस्कूल के रिकॉर्ड में किशोरी की उम्र 15 वर्ष 11 महीने दर्ज थी. यही वह सबूत था जिसने पूरे मामले का सच उजागर कर दिया. इसके बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए बारात को वापस लौटा दिया और किशोरी को सुरक्षित कस्टडी में ले लिया.
आगे क्या कार्रवाई हुई?
आईएसडी के अध्यक्ष डॉ अमित कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि नाबालिग को वन स्टॉप सेंटर में दाखिल कराया गया है. दोनों पक्षों के परिजनों को काउंसलिंग के लिए बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया है. निदेशक बिंदुवासिनी ने बताया कि विवाह की तैयारी पूरे धूमधाम से की गई थी और पूरे कार्यक्रम की वीडियोग्राफी कराई गई है. मौके पर मौजूद बैंड बाजा और कैटरर को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी वैवाहिक कार्य का कांट्रेक्ट लेने से पहले दूल्हा-दुल्हन के बालिग होने की पुष्टि जरूर करें.
क्यों नहीं रुक रहा बाल विवाह?
कानून सख्त है, सजा का प्रावधान भी है, फिर भी शिक्षा की कमी और सामाजिक दबाव कई बार ऐसी घटनाओं को जन्म दे देता है. यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि जागरूकता और शिक्षा ही इस समस्या का स्थायी समाधान हैं.





