Begin typing your search...

देहरादून में शादी का संकट! 35,000 से ज्यादा लड़के अब तक कुंवारे, लड़कियों के भी आकड़ें कुछ कम नहीं

देहरादून में लिंगानुपात बिगड़ने से शादी का बड़ा संकट सामने आया है, जहां 3 लड़कों पर सिर्फ 1 लड़की उपलब्ध है. 35 हजार से ज्यादा युवक शादी के इंतजार में हैं, जबकि विशेषज्ञ इसे सामाजिक असंतुलन का परिणाम मान रहे हैं.

उत्तराखंड में क्यों बढ़ रहा है शादी का संकट
X
उत्तराखंड में क्यों बढ़ रहा है शादी का संकट
( Image Source:  AI Sora )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय3 Mins Read

Updated on: 9 April 2026 2:52 PM IST

उत्तराखंड अब देश-दुनिया के लिए एक नया और वेडिंग डेस्टिनेशन बनता जा रहा है. खूबसूरत पहाड़, नदियां, जंगल और शांत वातावरण की वजह से कई जोड़े यहां शादी करने आ रहे हैं. लेकिन इसी प्रदेश के अपने युवाओं के लिए जीवनसाथी ढूंढना दिन-ब-दिन बहुत मुश्किल होता जा रहा है. खासकर राजधानी देहरादून में इस समस्या ने काफी गंभीर रूप ले लिया है.

देहरादून में कुंवारे युवाओं के आंकड़े देखकर हैरानी होती है. यहां 25 साल से ऊपर के लगभग 35,000 युवक शादी के इंतजार में हैं, जबकि इस उम्र की लड़कियों की संख्या सिर्फ 11,836 ही है. मतलब साफ है कि तीन लड़कों पर महज एक लड़की उपलब्ध है. रिपोर्ट के अनुसार 25 से 29 साल की उम्र के युवकों की संख्या 35,000 से ज्यादा है. वहीं इस उम्र की लड़कियां केवल 11,836 हैं. 30 से 34 साल के युवक 10,103 हैं, जबकि लड़कियां सिर्फ 3,031 हैं. 35 साल से ऊपर के 7,025 युवक अभी भी शादी नहीं कर पाए हैं, जिनमें से 3,281 युवक तो 40 साल पार कर चुके हैं.

बुजुर्गों की स्थिति भी चिंताजनक

सिर्फ युवा ही नहीं, बुजुर्गों की स्थिति भी चिंताजनक है. देहरादून में 60 से 80 साल की उम्र के 5,714 पुरुष अकेला जीवन बिता रहे हैं, जबकि ऐसी महिलाओं की संख्या मात्र 2,968 है. पहाड़ी इलाकों में यह समस्या और भी गंभीर है. पिथौरागढ़ और चम्पावत जैसे सीमांत जिलों में विवाह योग्य लड़कियों की कमी इतनी ज्यादा हो गई है कि कई परिवारों ने नेपाल से रिश्ते जोड़ने शुरू कर दिए थे. अब यही संकट राजधानी देहरादून तक पहुंच गया है. बहुत से लोग इस समस्या का दोष लड़कियों पर डालते हैं. वे कहते हैं कि आजकल की लड़कियां शादी के लिए न सिर्फ अच्छी नौकरी वाले लड़के चाहती हैं, बल्कि देहरादून या हल्द्वानी जैसे शहरों में घर या प्लॉट भी मांगती हैं.

थक गए माता-पिता

लेकिन जिला अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग की रिपोर्ट इस आरोप को गलत बताती है. असल समस्या लिंगानुपात (सेक्स रेशियो) में बहुत बड़ा अंतर है. पहाड़ के कई गांवों में माता-पिता अपने जवान बेटों के लिए लड़कियां ढूंढते-ढूंढते थक चुके हैं. गांवों में बेटे तो हैं, लेकिन शादी योग्य बेटियां बहुत कम हैं. इस रिपोर्ट से साफ पता चलता है कि उत्तराखंड के युवाओं की शादी का संकट बढ़ता जा रहा है. खासकर देहरादून जैसे शहर में तीन लड़कों पर सिर्फ एक लड़की का अनुपात बेहद चिंताजनक है. अगर समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में यह और भी गंभीर रूप ले सकता है.

अगला लेख