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क्या इंसेफेलाइटिस की चपेट में है राजस्थान? 8 दिन में 8 बच्चों की मौत; जानें लक्षण और बचाव

सलूंबर जिले में वायरल इंसेफेलाइटिस के कारण बच्चों की मौतों ने प्रशासन को अलर्ट कर दिया है. स्वास्थ्य विभाग ने बड़े स्तर पर सर्वे, स्क्रीनिंग और रोकथाम अभियान शुरू कर दिया है.

सलूंबर में दिमागी बुखार का कहर
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सलूंबर में दिमागी बुखार का कहर
( Image Source:  AI Sora )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय6 Mins Read

Published on: 9 April 2026 3:12 PM

राजस्थान के सलूंबर जिले के लसाड़िया ब्लॉक में एक के बाद एक बच्चों की मौत की घटनाओं ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है. सिर्फ पिछले 8 दिनों के अंदर घाटा, लालपुरा और आस-पास के अन्य गांवों में कुल 8 बच्चों की मौत हो चुकी है. मेडिकल विभाग की प्राथमिक जांच में इन मौतों का मुख्य कारण दिमागी बुखार यानी वायरल इंसेफैलाइटिस बताया जा रहा है.

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत अलर्ट मोड पर आ गया है. उदयपुर संभाग के सभी जिलों में अब बड़े स्तर पर सर्वे शुरू कर दिया गया है. 7 और 8 अप्रैल को स्वास्थ्य विभाग की 3,690 टीमें पूरे क्षेत्र में सक्रिय हुईं. इन टीमों ने 52,276 घरों का घर-घर जाकर सर्वे किया. इस सर्वे में कुल 275 बच्चों में दिमागी बुखार के लक्षण पाए गए हैं. उदयपुर लोकसभा सांसद डॉ. मन्नालाल रावत खुद अस्पताल पहुंचे और भर्ती हुए बच्चों की सेहत के बारे में विस्तार से जानकारी ली. उन्होंने बच्चों के रक्त नमूनों की जांच रिपोर्ट को लेकर भी अधिकारियों से चर्चा की और जरूरी मदद का आश्वासन दिया.

क्या कर रहे हैं स्वास्थ्य अधिकारी?

सभी जिलों के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट मोड पर रख दिया गया है. बुखार, उल्टी, और ऐंठन जैसे लक्षण दिखने वाले हर बच्चे की तुरंत गहन जांच करने और रिपोर्ट भेजने के सख्त निर्देश दिए गए हैं. लसाड़िया ब्लॉक के प्रभावित गांवों में जयपुर और उदयपुर से विशेष डॉक्टरों की टीमें पहुंची हुई हैं. स्वास्थ्यकर्मी गांव-गांव और घर-घर जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग कर रहे हैं. संक्रमण फैलने से रोकने के लिए घरों में फॉगिंग (धुआं छोड़ना) भी की जा रही है.

प्रशासन की सख्ती

जिला कलेक्टर मुहम्मद जुनेद पीपी ने सीएमएचओ डॉ. महेंद्र परमार को साफ निर्देश दिए हैं कि वायरल इंसेफैलाइटिस की रोकथाम के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं. को-मॉर्बिड (एक से ज्यादा बीमारियां एक साथ) और हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी (जोखिम भरी गर्भावस्था) वाले मामलों पर विशेष नजर रखी जा रही है. ग्रामीण और शहरी इलाकों में झोलाछाप डॉक्टरों और बिना प्रमाण के इलाज करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी गई है. उनके क्लिनिक सीज किए जा रहे हैं. स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले सभी बच्चों की स्क्रीनिंग के लिए शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग को स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं.

इंसेफेलाइटिस क्या है?

इंसेफेलाइटिस को आम भाषा में दिमागी बुखार कहा जाता है. यह दिमाग के टिशूज में सूजन की एक गंभीर स्थिति है. ज्यादातर मामलों में यह वायरस इन्फेक्शन से होता है, इसलिए इसे वायरल इंसेफेलाइटिस भी कहते हैं. कभी-कभी बैक्टीरिया, फंगस या इम्यून सिस्टम की गलती से भी यह समस्या हो सकती है. यह बीमारी बच्चों में ज्यादा खतरनाक होती है क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है. अगर समय पर इलाज न हो तो यह कोमा, दौरे, स्थायी विकलांगता या मौत का कारण बन सकती है.

इंसेफेलाइटिस के मुख्य लक्षण

शुरुआती लक्षण सामान्य बुखार जैसे लगते हैं, लेकिन जल्दी ही गंभीर हो जाते हैं:

  • तेज बुखार (अचानक बहुत ज्यादा)
  • तेज सिरदर्द
  • उल्टी और जी मचलना
  • बच्चे में चिड़चिड़ापन, सुस्ती या बेहोशी जैसी स्थिति
  • दौरे पड़ना बच्चों में यह बहुत आम है
  • गर्दन में अकड़न
  • भ्रम (confusion), व्यवहार में बदलाव या बोलने-समझने में दिक्कत
  • कमजोरी, लकवा जैसी स्थिति या शरीर का अकड़ जाना
  • गंभीर मामलों में कोमा
  • सलूंबर (उदयपुर) के हालिया मामलों में भी बच्चों में मुख्य लक्षण थे तेज बुखार, उल्टी और दौरे. स्वास्थ्य विभाग इन्हें वायरल इंसेफेलाइटिस से जोड़कर देख रहा है.

इंसेफेलाइटिस के कारण

वायरस: सबसे आम कारण जैसे हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस (HSV), एंटरोवायरस, या मच्छर से फैलने वाले वायरस (जैसे जापानी इंसेफेलाइटिस वायरस - JEV).

मच्छर के काटने से: कुछ प्रकार के वायरस मच्छरों के जरिए फैलते हैं.

अन्य: कभी-कभी बैक्टीरिया या ऑटोइम्यून समस्या से भी.

भारत में बच्चों में कभी-कभी चंदीपुरा वायरस (Chandipura virus) भी वायरल इंसेफेलाइटिस का कारण बनता है, जो तेजी से फैलता है और बच्चों में खतरनाक होता है.

इंसेफेलाइटिस से बचाव और सावधानियां

इस बीमारी का कोई खास इलाज नहीं है, इसलिए रोकथाम सबसे जरूरी है:

मच्छरों से बचाव: घर में मच्छरदानी का इस्तेमाल करें. बच्चों को लंबी बाजू के कपड़े और पैंट पहनाएं. मच्छर भगाने वाली क्रीम (repellent) लगाएं (DEET वाली, लेकिन बच्चों पर डॉक्टर की सलाह से).

स्वास्थ्य विभाग की सलाह: बुखार, उल्टी या दौरे जैसे लक्षण दिखते ही तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाएं। देरी न करें. झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज न करवाएं. बच्चों की नियमित स्क्रीनिंग करवाएं, खासकर स्कूल और आंगनबाड़ी में.

टीकाकरण:जापानी इंसेफेलाइटिस (JE) का टीका उपलब्ध है. जहां JE का खतरा हो, वहां बच्चों को लगवाएं (राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल). अन्य सामान्य टीके (खसरा, पोलियो आदि) समय पर लगवाएं क्योंकि वे भी कुछ प्रकार की इंसेफेलाइटिस से बचाते हैं.

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