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इलाज के दौरान महिला की मौत, परिजनों से छिपाई सच्चाई; जिंदा समझकर 3 अस्पतालों में भटकता रहा परिवार

देहरादून में 25 वर्षीय महिला की मौत के बाद भी परिवार को इसकी जानकारी नहीं दी गई और वे उसे जिंदा समझकर कई अस्पतालों में इलाज के लिए भटकते रहे. घंटों बाद दूसरे अस्पताल में सच्चाई सामने आई, जिसके बाद गांव में हंगामा और जांच शुरू हो गई.

Major negligence of hospital exposed in Dehradun
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( Image Source:  AI Grok )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय3 Mins Read

Published on: 23 March 2026 1:31 PM

देहरादून के विकासनगर इलाके में एक बहुत ही दुखद और हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां अस्पतालों की बड़ी लापरवाही के कारण एक परिवार को अपनी 25 साल की बहू की मौत का सच बहुत देर से पता चला, और वे घंटों तक उसे जिंदा समझकर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकते रहे.

सहसपुर कोतवाली क्षेत्र के बैरागीवाला गांव में रहने वाली 25 वर्षीय महिला की रविवार को अचानक तबीयत बहुत खराब हो गई. परिजन घबराकर उसे तुरंत पास के हरबर्टपुर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराने ले गए. अस्पताल में इलाज शुरू हुआ, लेकिन आरोप है कि उपचार के दौरान ही महिला की मौत हो गई.

अस्पताल ने नहीं दी जानकारी

अस्पताल वाले ने इसकी जानकारी परिजनों को बिल्कुल नहीं दी. बल्कि, उन्होंने चुपचाप पुलिस को मौत की सूचना दे दी. परिजन सोच रहे थे कि महिला अभी जिंदा है और बेहतर इलाज की जरूरत है. इसलिए उन्होंने उसे अस्पताल से अपने साथ ले लिया और इलाज के लिए आसपास के तीन अन्य अस्पतालों में ले गए. लेकिन उन तीनों अस्पतालों ने भी महिला को देखकर या तो इलाज करने से मना कर दिया या कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी कि महिला की मौत हो चुकी है. आखिरकार, परिजन करीब 20 किलोमीटर दूर झाझरा स्थित एक अस्पताल पहुंचे. वहां डॉक्टरों ने ठीक से जांच की और साफ-साफ बताया कि महिला की काफी पहले ही मौत हो चुकी है. तब जाकर परिवार को सच का पता चला. वे बहुत दुखी होकर शव लेकर गांव लौट आए और अंतिम संस्कार की तैयारी करने लगे.

शाम को पुलिस पहुंची और हंगामा हुआ

दोपहर में हुई मौत की सच्चाई परिजनों को शाम करीब 7 बजे पता चली. उसी बीच हरबर्टपुर अस्पताल की सूचना पर सहसपुर पुलिस गांव पहुंच गई. पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए मांगा. लेकिन परिजनों और गांव वालों ने बहुत गुस्सा किया. उन्होंने पोस्टमार्टम कराने से साफ मना कर दिया. बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठा हो गए और काफी हंगामा करने लगे.

ढाई घंटे तक चला मामला

पूर्व ब्लॉक प्रमुख जसविंदर सिंह बिट्टू और प्रशासन के कुछ अधिकारी मौके पर पहुंचे. उन्होंने ग्रामीणों को बहुत समझाया। करीब ढाई घंटे की मशक्कत के बाद नायब तहसीलदार की मौजूदगी में शव का पंचनामा भरा गया. परिजनों ने फिर भी पोस्टमार्टम नहीं कराने दिया. आखिरकार एसडीएम की अनुमति से शव परिवार को सौंप दिया गया.

अब क्या?

एसडीएम ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है. खासकर पहले अस्पताल की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की बात हो रही है, क्योंकि उन्होंने परिजनों को मौत की जानकारी छिपाई और पुलिस को सूचना देकर अपना पक्ष बचाने की कोशिश की. यह घटना दिखाती है कि अस्पतालों को कितनी जिम्मेदारी से काम करना चाहिए. परिवार को इतना बड़ा सदमा लगा कि वे घंटों तक उम्मीद में भटकते रहे, जबकि सच कुछ और था.

उत्तराखंड न्‍यूज
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