चारधाम यात्रा के दौरान अब हेलिकॉप्टर से नहीं कर पाएंगे सफर? DGCA के नए नियमों के खिलाफ ऑपरेटरों ने खोला मोर्चा, सेवा बंद करने की दी धमकी
बद्रीनाथ हेलिकॉप्टर हादसे में छह लोगों की मौत के बाद DGCA ने चार्टर हेलिकॉप्टर उड़ानों में दो पायलट अनिवार्य कर दिए हैं. इस नियम से बढ़ने वाले खर्च को देखते हुए 11 ऑपरेटरों ने 2 नवंबर 2026 से चारधाम चार्टर सेवाएं रोकने का प्रस्ताव दिया है.
चारधाम यात्रा के दौरान हेलिकॉप्टर से सफर करने वाले श्रद्धालुओं के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं. हेलिकॉप्टर चार्टर सेवाएं देने वाली 11 कंपनियों ने 2 नवंबर 2026 से अपनी सेवाएं निलंबित करने का प्रस्ताव दिया है. ऑपरेटरों ने यह कदम नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के उस नए नियम के विरोध में उठाने की बात कही है, जिसके तहत चार्टर हेलिकॉप्टर की हर उड़ान में दो पायलटों की तैनाती अनिवार्य की गई है.
यह नियम 30 अक्टूबर को बद्रीनाथ में हुए हेलिकॉप्टर हादसे के बाद लागू किया गया. इस दुर्घटना में पायलट समेत छह लोगों की मौत हो गई थी.
11 ऑपरेटरों ने नए नियम पर गंभीर आपत्ति जताई
31 अक्टूबर को DGCA के महानिदेशक वीर विक्रम यादव को भेजे गए सामूहिक पत्र में 11 ऑपरेटरों ने नए नियम पर गंभीर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि इस फैसले से पहले न तो ऑपरेटरों के साथ पर्याप्त विचार-विमर्श किया गया और न ही इसके व्यावसायिक और परिचालन प्रभावों का आकलन किया गया. कंपनियों के मुताबिक, मौजूदा चार्टर दरों और सीमित मुनाफे के बीच हर उड़ान में दो पायलट रखना उनके लिए आर्थिक रूप से संभव नहीं होगा.
ऑपरेटरों ने साफ कहा है कि नियम के मौजूदा स्वरूप में सेवाएं जारी रखना उनके लिए वित्तीय रूप से अव्यावहारिक हो जाएगा. इसलिए उन्होंने 2 नवंबर से चारधाम चार्टर सेवाएं रोकने का प्रस्ताव रखा है. उनका कहना है कि सेवाएं तब तक निलंबित रहेंगी, जब तक संबंधित अधिकारी ऑपरेटरों के साथ बातचीत करके कोई ऐसा समाधान नहीं निकालते, जो सुरक्षा और कारोबार दोनों के लिहाज से व्यावहारिक हो.
दो पायलट के नियम से क्यों नाराज हैं हेलिकॉप्टर ऑपरेटर?
ऑपरेटरों के मुताबिक, हर चार्टर उड़ान में दो पायलटों की तैनाती से संचालन का खर्च काफी बढ़ जाएगा. इससे न केवल अतिरिक्त क्रू की जरूरत होगी, बल्कि उनके रहने, ठहरने, परिवहन और दूसरी लॉजिस्टिक व्यवस्थाओं पर भी खर्च बढ़ेगा. कंपनियों का कहना है कि मौजूदा व्यावसायिक ढांचे और चार्टर सेवाओं की दरों में इतना अतिरिक्त खर्च उठाने की गुंजाइश नहीं है. वहीं, पूरा अतिरिक्त खर्च यात्रियों से वसूलना भी व्यावसायिक रूप से संभव नहीं है. ऐसे में उनके पास सेवाएं जारी रखने का कोई टिकाऊ विकल्प नहीं बचेगा.
अपने पत्र में ऑपरेटरों ने यह भी कहा कि वे DGCA के मौजूदा नियमों का लगातार पालन करते आए हैं और हिमालय के चुनौतीपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र में सुरक्षित, भरोसेमंद और प्रभावी हेलिकॉप्टर सेवाएं देने के लिए पर्याप्त संसाधन खर्च कर चुके हैं. उनका मानना है कि सुरक्षा बढ़ाने के लिए उठाए जाने वाले किसी भी नए कदम को व्यावहारिक, जरूरत के अनुपात में और आर्थिक रूप से टिकाऊ होना चाहिए. इसके लिए ऑपरेटरों से बातचीत भी जरूरी है.
कंपनियों ने DGCA और उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) से दो पायलट की अनिवार्यता पर दोबारा विचार करने, सभी हितधारकों के साथ तत्काल बैठक करने और सुरक्षा के साथ व्यावसायिक व्यवहार्यता बनाए रखने वाला वैकल्पिक परिचालन ढांचा तैयार करने की अपील की है.




