पहाड़, जंगल, नदी... हर जगह तलाश जारी, आखिर उत्तरकाशी के जंगलों में कहां गायब हो गई 24 साल की बबिता?
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में ट्रेकिंग पर गई 24 साल बबिता पांडे के लापता होने का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है. युवती को गायब हुए छह दिन से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन अब तक उसका कोई पता नहीं चल पाया है. पुलिस, सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अन्य एजेंसियां लगातार उसकी तलाश में जुटी हैं.
उत्तराखंड के उत्तरकाशी में 24 साल की बबिता पांडेय के रहस्यमय तरीके से लापता होने का मामला लगातार उलझता जा रहा है. दयारा बुग्याल ट्रेक पर अपने दो दोस्तों के साथ गई बाबिता 29 मई की रात गोई बेस कैंप में टेंट से बाहर निकली थीं, लेकिन इसके बाद उनका कोई पता नहीं चल सका. घटना को कई दिन बीत चुके हैं, फिर भी उनका मोबाइल बंद है और कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है.
बाबिता की तलाश में पुलिस, सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी और वन विभाग समेत करीब 150 जवान जुटे हुए हैं. ड्रोन से पहाड़ों की निगरानी की जा रही है, डॉग स्क्वॉड जंगलों को खंगाल रहे हैं और गोताखोर नदियों व जलाशयों में खोजबीन कर रहे हैं. इसके बावजूद यह रहस्य बरकरार है कि आखिर बाबिता कहां और कैसे गायब हो गईं. परिवार ने उनके साथ गए दोनों दोस्तों पर शक जताया है, जबकि पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है.
कब शुरू हुई थी यात्रा?
पुलिस के अनुसार बबिता पांडे अपने दोस्तों हरमनपाल सिंह और हरमनप्रीत सिंह के साथ 25 मई को रामनगर से निकली थीं. उसी दिन तीनों देहरादून पहुंचे और रात वहीं बिताई. 26 मई को वे हर्षिल पहुंचे और अगले दो दिनों तक आसपास के इलाकों में घूमे. इस दौरान उन्होंने गंगोत्री भी देखा. 28 मई को तीनों रैथल पहुंचे और 29 मई को गोई बेस कैंप में टेंट लगाकर रुके.
लापता होने वाली रात क्या हुआ?
पुलिस जांच में सामने आया है कि 29 मई की रात बबिता टेंट के अंदर गाने सुन रही थीं. उनके साथ मौजूद दोनों दोस्तों ने कथित तौर पर उनसे आवाज कम करने को कहा. इसके बाद बबिता टेंट से बाहर निकल गईं. दोनों युवकों का कहना है कि वे बाद में सो गए. सुबह उठने पर बबिता वहां नहीं थीं. उन्होंने आसपास काफी खोजबीन की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. इसके बाद उन्होंने परिवार को इस घटना के बारे में बताया. 30 मई की रात करीब 8 बजे पुलिस को इस संबंध में इमरजेंसी कॉल मिली.
परिवार ने क्या आरोप लगाए?
बबिता के भाई हर्षित पांडे ने 31 मई को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने बताया कि परिवार को यह जानकारी नहीं थी कि बबिता इन दोनों युवकों के साथ ट्रेकिंग पर गई थीं. परिवार ने आशंका जताई कि बबिता के साथ कोई अनहोनी हुई हो सकती है. शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी.
लड़की की तलाश के लिए क्या-क्या किया जा रहा है?
बबिता की तलाश के लिए बड़े लेवल पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है. करीब 150 से अधिक जवान और अधिकारी अलग-अलग टीमों में खोजबीन कर रहे हैं. तलाशी अभियान में पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना, वन विभाग, जिला आपदा प्रबंधन टीम और स्थानीय लोग शामिल हैं. इसके अलावा:
- ड्रोन की मदद से पहाड़ी इलाकों की निगरानी की जा रही है.
- डॉग स्क्वॉड को लगाया गया है.
- घने जंगलों में विशेष पर्वतीय बचाव दल भेजे गए.
- भगीरथी नदी और अन्य जल स्रोतों में गोताखोरों को उतारा गया.
- आसपास के गांवों और ट्रेकिंग रूट पर लगातार सर्च अभियान चल रहा है.
- हालांकि इतने बड़े अभियान के बावजूद अभी तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है.
क्या जंगली जानवरों के हमले की भी जांच हो रही है?
पुलिस इस संभावना को भी नजरअंदाज नहीं कर रही है कि बबिता पर किसी जंगली जानवर ने हमला किया हो. जिस क्षेत्र में वह लापता हुईं, वहां घने जंगल और वन्यजीवों की मौजूदगी है. इसलिए जांच इस दिशा में भी आगे बढ़ रही है.
दोस्तों से लगातार पूछताछ
पुलिस दोनों साथियों हरमनपाल और हरमनप्रीत से लगातार पूछताछ कर रही है. अधिकारियों के अनुसार दोनों का कहना है कि उनकी बबिता से मुलाकात इसी साल मार्च में हुई थी और वे इससे पहले भी साथ घूमने जा चुके थे. फिलहाल पुलिस को पूछताछ से कोई बड़ा सुराग नहीं मिला है और दोनों को गिरफ्तार नहीं किया गया है.
ट्रेकिंग परमिट में भी सामने आई गड़बड़ी
जांच के दौरान ट्रेकिंग परमिट को लेकर भी एक बड़ा खुलासा हुआ है. अधिकारियों के मुताबिक जिस एजेंसी ने ट्रेक का इंतजाम किया था, उसने परमिट लेने के दौरान कथित तौर पर अन्य लोगों के दस्तावेज अपलोड किए थे. जब परमिट के क्यूआर कोड की जांच की गई तो उसमें दूसरे लोगों के नाम सामने आए. बाद में बबिता और उनके दोनों साथियों के नाम जोड़े जाने की आशंका जताई गई. अब इस मामले की भी अलग से जांच की जा रही है.
अब तक क्या स्थिति है?
छह दिन से ज्यादा समय गुजरने के बावजूद बाबिता पांडे का कोई पता नहीं चल पाया है. उनका मोबाइल फोन भी बंद है और आखिरी लोकेशन गोई क्षेत्र के आसपास की मिली थी. पुलिस, प्रशासन और बचाव एजेंसियां लगातार तलाश में जुटी हैं, जबकि परिवार उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है.




