Begin typing your search...

क्या है FlushShe सेनेटरी पैड? आस्था दलुजा के स्टार्टअप से 355 मिलियन लड़कियों और महिलाओं को मिलेगी पीरियड्स से राहत

भारत में करोड़ों महिलाएं हर महीने सेनेटरी पैड का इस्तेमाल करती हैं, जिससे प्लास्टिक कचरे की समस्या बढ़ती जा रही है. इसी चुनौती का समाधान लेकर आई हैं नोएडा की आस्था दलुजा. उन्होंने अपने स्टार्टअप बायोकेयर वेंचर्स एलएलपी के तहत FlushShe नाम का फ्लश होने वाला सेनेटरी पैड तैयार किया है. यह पैड पूरी तरह प्राकृतिक फाइबर से बना है और 8–10 घंटे में पानी में घुल जाता है. दिल्ली में आयोजित एक इवेंट में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस इनोवेशन को सराहते हुए 10 लाख रुपये का पुरस्कार दिया. यह पैड महिलाओं और पर्यावरण दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.

क्या है FlushShe सेनेटरी पैड? आस्था दलुजा के स्टार्टअप से 355 मिलियन लड़कियों और महिलाओं को मिलेगी पीरियड्स से राहत
X
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय

Published on: 15 Jan 2026 2:12 PM

हमारे देश में बहुत बड़ी संख्या में लड़कियां और महिलाएं हर महीने पीरियड्स (मासिक धर्म) के दौर से गुजरती हैं. अनुमान के मुताबिक, करीब 35 करोड़ (355 मिलियन) से ज्यादा लड़कियां और महिलाएं इस प्रक्रिया से जुड़ी हुई हैं. आमतौर पर लड़कियों को पीरियड्स 15-16 साल की उम्र में शुरू हो जाते हैं और ये लगभग 50 साल की उम्र तक चलते रहते हैं यानी एक महिला को अपने जीवन में कई सालों तक हर महीने सेनेटरी पैड या इसी तरह की चीजों की जरूरत पड़ती है.

अभी बाजार में ज्यादातर सेनेटरी पैड प्लास्टिक और केमिकल से बने होते हैं. इनमें कई बार खुशबू डाली जाती है या ऐसे केमिकल इस्तेमाल किए जाते हैं जो स्किन के लिए अच्छे नहीं होते. सबसे बड़ी समस्या ये है कि ये पैड आसानी से सड़ते-गलते नहीं हैं. इन्हें फेंकने के लिए महिलाएं इन्हें प्लास्टिक की पन्नी (पॉलीथीन) में लपेटकर कूड़े में डालती हैं. नतीजा ये होता है कि ये पैड कूड़े के ढेर में सालों-साल, बल्कि सैकड़ों साल तक पड़े रहते हैं. ये पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं- कूड़े के पहाड़ तो बढ़ते ही जा रहे हैं, साथ ही इनसे मिट्टी, पानी और हवा भी दूषित होती है.

आस्था दलुजा की पहल

इसी समस्या को देखते हुए एक बहादुर और समझदार महिला ने एक शानदार काम शुरू किया है. इनका नाम है आस्था दलुजा, ये नोएडा की रहने वाली हैं, लेकिन हाल ही में दिल्ली में एक बड़ा इवेंट हुआ था- कैंपस टू मार्केट नाम का ये कार्यक्रम डिपार्टमेंट ऑफ ट्रेनिंग एंड टेक्निकल एजुकेशन, गवर्नमेंट ऑफ एनसीटी ऑफ दिल्ली की ओर से यूथ फेस्टिवल स्टार्टअप के तहत अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित किया गया था.

रेखा गुप्ता ने दिया 10 लाख रुपये का इनाम

इसी इवेंट में आस्था अपनी इनोवेशन लेकर आईं थी. सबसे खास बात ये रही कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आस्था के इस शानदार आइडिया को बहुत सराहा. उन्होंने आस्था को 10 लाख रुपये का इनाम और सम्मान दिया. इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने उनसे व्यक्तिगत मुलाकात की और जल्द से जल्द उनके प्रोडक्ट को बाजार में लाने के लिए पूरा सहयोग देने का वादा किया. उन्होंने प्लानिंग भी शुरू कर दी है कि सरकार की मदद से इसे बड़े स्तर पर उपलब्ध कराया जाए.

क्या है FlushShe?

आस्था दलुजा ने अपना स्टार्टअप शुरू किया है जिसका नाम है बायोकेयर वेंचर्स एलएलपी. उनके इस खास सेनेटरी पैड का नाम है फ्लशशी (FlushShe) ये पैड पूरी तरह से प्राकृतिक तरीके से बनाए गए हैं. इन्हें अलग-अलग पेड़ों से निकले प्राकृतिक फाइबर (जैसे बांस, केला आदि से मिलने वाले फाइबर) से तैयार किया गया है. इसमें कोई हानिकारक केमिकल या प्लास्टिक नहीं है. इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि इस्तेमाल करने के बाद इसे टॉयलेट या नाली में ही फ्लश कर दिया जा सकता है. ये पैड पानी में 8 से 10 घंटे के अंदर पूरी तरह घुल जाता है और डीकंपोज हो जाता है. इससे न तो वायु प्रदूषण होता है और न ही जल प्रदूषण. कई बार टेस्टिंग की गई है कि जब ये पानी में घुलता है तो पानी बिल्कुल साफ रहता है, कोई गंदगी या केमिकल नहीं फैलता. महिलाओं को अब इसे प्लास्टिक पॉलीथीन में लपेटकर कूड़े में फेंकने की जरूरत नहीं पड़ेगी. ये खुद-ब-खुद पर्यावरण में मिल जाएगा और कूड़े का बोझ नहीं बढ़ाएगा.

लॉकडाउन में शुरू किया था काम

आस्था ने बताया कि उन्होंने ये आइडिया 2020 में लॉकडाउन के समय शुरू किया था. तब से लगातार मेहनत की, रिसर्च की, टेस्टिंग की और अब 2026 में ये प्रोडक्ट पूरी तरह तैयार हो चुका है. जल्द ही ये बाजार में आने वाला है. सबसे अच्छी बात ये है कि इसकी कीमत बाजार के बाकी सेनेटरी पैड से काफी कम रखी जाएगी. ताकि ये पैड शहरों के साथ-साथ गांवों तक आसानी से पहुंच सके. हर महिला और लड़की, चाहे वो किसी भी आर्थिक स्थिति की हो, इसे आराम से खरीद सके और इस्तेमाल कर सके.

आस्था का बड़ा कदम

आस्था दलुजा का ये प्रयास न सिर्फ महिलाओं की सेहत और सुविधा के लिए अच्छा है, बल्कि पूरे पर्यावरण को बचाने में भी बहुत बड़ा कदम है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का सहयोग मिलने से उम्मीद है कि ये प्रोडक्ट जल्दी ही हर जगह उपलब्ध हो जाएगा और हमारा देश कूड़े के पहाड़ों से थोड़ा मुक्त हो सकेगा. ऐसे इनोवेटिव और पर्यावरण के प्रति जागरूक स्टार्टअप की बहुत जरूरत है। आस्था दलुजा जैसी महिलाएं हमें दिखा रही हैं कि छोटे-छोटे बदलाव से भी बड़ा फर्क लाया जा सकता है.

UP NEWS
अगला लेख