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UP SIR में बड़ा खुलासा! ECI के ERONET सॉफ्टवेयर ने खुद बनाए 85,854 डिलीशन फॉर्म, वजह क्यों नहीं बताई?

उत्तर प्रदेश में SIR के दौरान 85,854 Form 7 में नाम हटाने की वजह दर्ज नहीं होने का दावा The Reporters’ Collective के मुताबिक, ERONET सॉफ्टवेयर, समयसीमा के बाद स्वीकार किए गए आवेदनों और कुछ क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाताओं के खिलाफ दर्ज आपत्तियों का भी जिक्र है.

UP SIR में बड़ा खुलासा! ECI के ERONET सॉफ्टवेयर ने खुद बनाए 85,854 डिलीशन फॉर्म, वजह क्यों नहीं बताई?
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देशभर में SIR और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन के बीच अब यूपी SIR को लेकर नया खुलासा हुआ है. उत्तर प्रदेश में Special Intensive Revision (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे हैं. The Reporters Collective में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग के ERONET सॉफ्टवेयर ने 85,854 ऐसे फॉर्म-7 अपने आप तैयार किए, जिनमें मतदाताओं के नाम हटाने की वजह दर्ज नहीं थी. जबकि नियमों के मुताबिक, नाम हटाने के लिए कारण बताना जरूरी है.

रिपोर्ट के अनुसार, इन फॉर्म पर विधानसभा स्तर के अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर भी पहले से मौजूद थे. कई फॉर्म ERONET सॉफ्टवेयर के जरिए तैयार हुए और अधिकारियों के लॉगिन से डिजिटल हस्ताक्षर किए गए. अधिकारियों की भूमिका इन फॉर्म को मंजूरी के लिए आगे भेजने तक सीमित थी. ऐसे में SIR के दौरान इस्तेमाल हुई प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए हैं.

85,854 फॉर्म में नाम हटाने की वजह नहीं

The Reporters’ Collective ने उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर मौजूद Form 7 के आंकड़ों का विश्लेषण किया. रिपोर्ट के मुताबिक, वेबसाइट पर 4.3 लाख से ज्यादा ऐसे फॉर्म मिले, जिनका इस्तेमाल वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए किया जाता है. इनमें से 87,127 फॉर्म निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (AERO) के नाम से दाखिल हुए थे. रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से 85,854 फॉर्म यानी करीब 98.5 प्रतिशत में नाम हटाने की वजह दर्ज नहीं थी. रिपोर्ट में बताया गया है कि 62 फॉर्म में वजह की जगह A, N, H और E जैसे अक्षर लिखे थे, जबकि 1,211 फॉर्म में 'अनुपस्थित/स्थानांतरित' का कारण दर्ज था. ये आवेदन 15 मार्च से 2 अप्रैल 2026 के बीच दाखिल किए गए थे.

ERONET सॉफ्टवेयर ने अपने आप बनाए फॉर्म

The Reporters’ Collective ने इस मामले में चार चुनाव अधिकारियों से भी बात की. रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि SIR की सुनवाई के दौरान जब किसी मतदाता का सत्यापन नहीं हो पाता था, तो ERONET सॉफ्टवेयर अपने आप Form 7 तैयार कर देता था. एक चुनाव अधिकारी ने बताया कि सिस्टम में मतदाता को मंजूरी नहीं देने पर फॉर्म अपने आप जनरेट हो जाता था. चूंकि यह प्रक्रिया अधिकारियों के लॉगिन से जुड़ी थी, इसलिए फॉर्म पर उनके डिजिटल हस्ताक्षर भी आ जाते थे. रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों का कहना था कि सॉफ्टवेयर की प्रक्रिया के चलते वे ऐसे फॉर्म पर हस्ताक्षर करने वाले बन गए, जिनमें नाम हटाने की वजह दर्ज नहीं थी.

समयसीमा के बाद 1,10,476 आवेदन स्वीकार किए जाने का दावा

The Reporters’ Collective की पड़ताल में यह भी दावा किया गया है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए व्यक्तियों की ओर से दाखिल किए गए 1,10,476 आवेदन तय कानूनी समयसीमा के बाद स्वीकार किए गए. रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, नाम हटाने के लिए आपत्ति दर्ज करते समय निर्धारित कारण बताना जरूरी है. ऐसे में बिना वजह वाले फॉर्म और समयसीमा के बाद स्वीकार किए गए आवेदनों को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

तरबगंज और पीलीभीत में मुस्लिम मतदाताओं के खिलाफ 90% आपत्तियां

The Reporters’ Collective ने अपनी रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश की तरबगंज और पीलीभीत विधानसभा सीटों के आंकड़ों का भी जिक्र किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, इन दोनों क्षेत्रों में नाम हटाने के लिए दाखिल करीब 90 प्रतिशत आपत्तियां मुस्लिम मतदाताओं के खिलाफ थीं. रिपोर्ट में तरबगंज का उदाहरण देते हुए बताया गया कि ‘रेशमा’ नाम से 188 आपत्तियां दाखिल की गईं. ये सभी आपत्तियां एक ही तारीख को और एक ही बूथ के मतदाताओं के खिलाफ दर्ज की गई थीं. हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग की वेबसाइट पर आपत्ति दाखिल करने वालों की पहचान से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं थी.

चुनाव आयोग से मांगा गया जवाब

The Reporters’ Collective के मुताबिक, उसने उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा और दिल्ली स्थित चुनाव आयोग को इस मामले में सवाल भेजे थे, लेकिन रिपोर्ट प्रकाशित होने तक जवाब नहीं मिला था. इस पड़ताल के बाद सवाल उठ रहा है कि जब किसी मतदाता का नाम हटाने के लिए वजह दर्ज करना जरूरी है, तो हजारों फॉर्म में यह जानकारी क्यों नहीं थी? साथ ही, ERONET सॉफ्टवेयर ने ये फॉर्म किस प्रक्रिया के तहत तैयार किए और इनके आधार पर कितने मतदाताओं के नाम हटाए गए? यह खबर The Reporters’ Collective की पड़ताल पर आधारित है. रिपोर्ट में सामने आए आंकड़ों ने उत्तर प्रदेश में SIR की प्रक्रिया और वोटर लिस्ट से नाम हटाने के तरीके पर सवाल खड़े किए हैं.

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