Sambhal: जमीन सरकारी तो क्यों बेची गई, टूटे मकान का कौन देगा मुआवजा? मस्जिद टूटने पर छलका लोगों का दर्द
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन की बड़ी कार्रवाई शुक्रवार को देखने को मिली, जब एक मस्जिद की 35 फीट ऊंची मीनार को गिरा दिया गया.
संभल मस्जिद
Sambhal Mosque Demolition: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन की बड़ी कार्रवाई शुक्रवार को देखने को मिली, जब एक मस्जिद की 35 फीट ऊंची मीनार को गिरा दिया गया. दोपहर करीब डेढ़ बजे शुरू हुई इस कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा और पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए. इससे पहले सुबह से ही मस्जिद के आसपास स्थित दुकानों को तोड़ने की कार्रवाई जारी थी. प्रशासन ने इसे सरकारी जमीन पर बने अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान का हिस्सा बताया है.
मौके पर अधिकारियों की मौजूदगी में बुलडोजर और हाइड्रा मशीनों के जरिए पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया. इस बीच जिन लोगों के घर टूटे हैं उनका भी दर्द छलका है. लोगों का कहना है कि उन्होंने तो ये जमीन पैसे देकर खरीदी थी, अब मकान टूटने पर कौन उनको मुआवजा देगा? लोगों ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अगर जमीन सरकारी थी तो प्रधानों ने इसको क्यों बेचा था और उनको मुआवजे का पैसा मिलना चाहिए.
कैसे गिराई गई मीनार?
मस्जिद की ऊंची मीनार को गिराने के लिए प्रशासन ने विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया. एक मजदूर को मीनार पर चढ़ाकर रस्सी बांधी गई, जिसके दूसरे सिरे को दो हाइड्रा मशीनों से जोड़ा गया. इसके बाद दोनों मशीनों ने खींचकर मीनार को नीचे गिरा दिया. कार्रवाई के पहले चरण में सुबह करीब साढ़े 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक मस्जिद के बाहर बनी पांच दुकानों को तोड़ा गया. इन दुकानों का कुछ हिस्सा पहले की कार्रवाई में बच गया था, जिसे अब पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया.
क्यों की गई भारी पुलिस बल की तैनाती?
संभावित विरोध को देखते हुए प्रशासन ने इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे. डीएम राजेंद्र पेंसिया और एसपी केके बिश्नोई की मौजूदगी में 50 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया. जैसे ही ग्रामीण मौके पर जुटने लगे, पुलिस ने उन्हें वहां से हटा दिया.
5 अप्रैल को क्यों टली थी कार्रवाई?
इससे पहले 5 अप्रैल को भी मस्जिद पर कार्रवाई की योजना बनाई गई थी, लेकिन उस दिन बुलडोजर चालक ने मीनार गिराने से इनकार कर दिया था. उसका कहना था कि मीनार गिरने से उसकी जान को खतरा हो सकता है. हालांकि उस दिन मदरसा, मस्जिद का गेट और कुछ दुकानें तोड़ी गई थीं.
कब बनी थी मस्जिद?
प्रशासन के अनुसार, मुबारकपुर बंद गांव में करीब 15 साल पहले सरकारी जमीन पर मस्जिद का निर्माण किया गया था. यह जमीन मूल रूप से खेल मैदान के लिए निर्धारित थी, जिस पर करीब 150 वर्गमीटर में निर्माण किया गया. इसके अलावा, उसी जमीन पर पांच दुकानें और आठ मकान भी बना लिए गए थे. खास बात यह है कि इस क्षेत्र में दो सरकारी प्राइमरी स्कूल भी मौजूद हैं.
सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की। तहसीलदार कोर्ट ने 28 मार्च को नोटिस जारी किया और उसी दिन जमीन की नाप कराई गई. 30 मार्च से अवैध निर्माण हटाने का काम शुरू हुआ. 31 मार्च से स्थानीय लोगों ने खुद ही कुछ हिस्सों को तोड़ना शुरू किया, लेकिन काम अधूरा रह गया.
क्या है ग्रामीणों की मांग?
ग्राम प्रधान हाजी मुनव्वर और मस्जिद कमेटी के अनुरोध पर 5 अप्रैल को प्रशासन ने शुल्क लेकर मदरसा और दुकानों को ध्वस्त कराया था. हालांकि ग्रामीणों ने मस्जिद को खुद नहीं तोड़ा और प्रशासन से इसे हटाने की मांग की थी. ग्राम प्रधान का कहना है कि स्कूलों को छोड़कर बाकी सभी अवैध निर्माण हटाए जाने चाहिए.




