तो क्या राम मंदिर में नहीं हुई चंदा चोरी, 3,300 करोड़ रुपये कहां हुए खर्च... 6 पॉइंट्स में जानें अब क्या-क्या आया सामने
अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी को लेकर सरकारी सूत्रों ने बताया कि ट्रस्ट में पैसे के लेन-देन, भ्रष्टाचार को लेकर जो भी आरोप लग रहे हैं वो मौजूदा रिकॉर्ड और जांच में सामने आए सबूतों से मेल नहीं खाते.
Ram Mandir Donation Case
पिछले कुछ समय से अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी को लेकर सरकार सवालों के घेरे में है. संसद में भी इसको लेकर विपक्षी पार्टी केंद्र सरकार पर जमकर हमलावार हो रही है. हालांकि एसटीएफ और यूपी पुलिस लगातार मामले की हर एंगल से जांच कर रही है और 6 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है. लेकिन अब इस मामले को लेकर नई जानकारी सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक इन अटकलों के बीच सरकारी सूत्रों ने जानकारी साझा करते हुए कहा है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़े पैमाने पर पैसे के लेन-देन या व्यवस्थित भ्रष्टाचार के लगाए जा रहे आरोप उपलब्ध रिकॉर्ड और जांच के तथ्यों से मेल नहीं खाते.
उच्च स्तरीय अधिकारियों के अनुसार, मंदिर निर्माण और उससे जुड़े सभी प्रमुख वित्तीय लेनदेन निर्धारित बैंकिंग व्यवस्था के तहत किए गए हैं. सूत्रों का कहना है कि दान राशि के उपयोग से लेकर भूमि अधिग्रहण तक की पूरी प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराया गया है और जांच एजेंसियां भी मामले की निगरानी कर रही हैं.
6 पॉइंट्स में जानें क्या-क्या आया सामने
1. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, श्रद्धालुओं के स्वैच्छिक योगदान से प्राप्त कुल 3,300 करोड़ रुपये की राशि का स्वतंत्र थर्ड पार्टी एक्सटर्नल ऑडिटर्स और मेसर्स वी शंकर अय्यर एंड कंपनी द्वारा विस्तृत ऑडिट किया गया है. अधिकारियों का कहना है कि ऑडिट के दौरान दान की प्राप्ति और उसके उपयोग से जुड़े सभी वित्तीय दस्तावेजों का टेस्ट किया गया.
2. सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट ने मंदिर निर्माण पर लगभग 1,800 करोड़ रुपये और भूमि अधिग्रहण पर करीब 400 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. अधिकारियों का दावा है कि सभी भुगतान सख्त वित्तीय और बैंकिंग प्रोटोकॉल के अनुरूप किए गए तथा किसी भी स्तर पर नकद लेनदेन नहीं किया गया.
3. आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह मामला मशीन द्वारा नकदी की छंटाई से पहले हुई एक अलग-थलग चोरी की घटना से जुड़ा था. भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की अनुबंधित एजेंसी सैनिक सुरक्षा सेवा (एसएसएस) द्वारा नियुक्त छह बाहरी कर्मचारियों की पहचान सीसीटीवी फुटेज के आधार पर की गई और उन्हें तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तार किए गए किसी भी आरोपी का मंदिर प्रशासन से कोई संबंध नहीं था.
4. सरकारी सूत्रों का कहना है कि मामले की जांच एसआईटी कर रहा है, जिसकी निगरानी भारत का सुप्रीम कोर्ट कर रहा है. जांच की जिम्मेदारी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को सौंपी गई है ताकि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे.
5. भूमि अधिग्रहण को लेकर लगाए गए आरोपों पर अधिकारियों ने कहा कि मंदिर परिसर के आसपास खरीदी गई भूमि के लिए 100 प्रतिशत भुगतान अधिकृत खातों से सीधे बैंक-टू-बैंक ट्रांसफर के माध्यम से किया गया.
6. सरकारी सूत्रों के अनुसार, जून 2026 की घटना के बावजूद श्रद्धालुओं का विश्वास बना हुआ है. उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में औसत मासिक हुंडी संग्रह लगभग 5 करोड़ रुपये पर स्थिर रहा और दान में किसी प्रकार की गिरावट दर्ज नहीं की गई.




