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बैंक की तिजोरी में 17.29 करोड़ के नकली नोट! PNB मैनेजर गिरफ्तार, आखिर बैंकिंग सिस्टम में कौन चला रहा था ये बड़ा खेल?

PNB की तिजोरी में मिले 17.29 करोड़ रुपये के कथित नकली नोटों के मामले में NIA ने मैनेजर अमित कुमार को गिरफ्तार किया है. जानें जांच, बैंकिंग नेटवर्क और संभावित नेपाल कनेक्शन से जुड़ी पूरी जानकारी.

बैंक की तिजोरी में 17.29 करोड़ के नकली नोट! PNB मैनेजर गिरफ्तार, आखिर बैंकिंग सिस्टम में कौन चला रहा था ये बड़ा खेल?
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समी सिद्दीकी
Edited By:समी सिद्दीकी6 Mins Read

Updated on: 9 Sept 2026 11:20 AM IST

उत्तर प्रदेश में नकली नोटों की बड़ी बरामदगी के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की कार्रवाई के बाद जांच और तेज हो गई है. NIA ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के एक अधिकारी को गिरफ्तार किया है. जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि बैंक के करेंसी चेस्ट में मिले 17.29 करोड़ रुपये के नकली नोट क्या किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा थे और क्या इस नकली करेंसी को बैंकिंग सिस्टम के जरिए आगे पहुंचाया जा रहा था.

NIA ने सोमवार को जगाधरी करेंसी चेस्ट के मैनेजर अमित कुमार को गिरफ्तार किया. वह इस मामले में नामजद प्रमुख आरोपियों में से एक हैं. नकली भारतीय करेंसी मिलने के बाद PNB के तीन अधिकारी जांच एजेंसियों के रडार पर आए थे. यह नकली करेंसी सहारनपुर के सोफिया मार्केट इलाके में स्थित बैंक के करेंसी चेस्ट में मिली थी.

इस मामले को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि नकली नोट किसी व्यक्ति, कुरियर, ठिकाने या सीमा पार करते हुए बरामद नहीं हुए, बल्कि बैंक के करेंसी चेस्ट के अंदर मिले. इससे जांच एजेंसियों के सामने बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि कथित तौर पर नकली नोट बैंकिंग सिस्टम के अंदर तक कैसे पहुंचे.

किस बात की हो रही है जांच?

जांच यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या नकली नोटों का कुछ हिस्सा वैध बैंकिंग चैनल के जरिए आगे भेजा गया था. NIA के मुताबिक, मामला PNB के करेंसी चेस्ट में नकली करेंसी से जुड़ी साजिश का है. एजेंसी ने कहा है कि जांच जारी है और पूरी साजिश का पता लगाने के साथ-साथ अन्य आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी की कोशिश की जा रही है.

कौनसे अधिकारी जांच के घेरे में?

इस मामले में PNB के तीन अधिकारियों के नाम सामने आए हैं. इनमें सीनियर डिविजनल मैनेजर रवि कुमार कांसे, सोफिया मार्केट करेंसी चेस्ट के मैनेजर सुशील कुमार और जगाधरी करेंसी चेस्ट के मैनेजर अमित कुमार शामिल हैं. शुरुआती जांच में कथित भूमिका सामने आने के बाद बैंक ने तीनों अधिकारियों को निलंबित कर दिया था. पुलिस ने तीनों के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया था. अधिकारियों को आशंका थी कि वे नेपाल भाग सकते हैं.

इसके बाद SIT और क्राइम ब्रांच ने तीनों अधिकारियों के घरों की तलाशी ली. तलाशी के दौरान इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और कई दस्तावेज जब्त किए गए. जांचकर्ता इन सामानों की जांच कर रहे हैं, ताकि तीनों अधिकारियों के संपर्कों, उनकी गतिविधियों और दूसरे लोगों से संभावित संबंधों का पता लगाया जा सके.

कौनसी एजेंसी कर रही हैं जांच?

इस मामले की जांच अब NIA कर रही है. एजेंसी ने 3 सितंबर को केस को दोबारा दर्ज करते हुए जांच अपने हाथ में ली. इससे पहले 29 अगस्त को सहारनपुर के सदर बाजार थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 178 के तहत FIR दर्ज की गई थी.

NIA अब नकली नोटों की पूरी सप्लाई और करेंसी की आवाजाही की कड़ी को जोड़ने में जुटी है. जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि नकली नोट बैंक के करेंसी चेस्ट तक पहुंचने से पहले किन-किन हाथों से होकर गुजरे.

111 करोड़ रुपये की करेंसी भेजी गई थी जयपुर

जांच के दौरान करेंसी की एक बड़ी खेप का भी पता चला है. सामने आई जानकारी के मुताबिक, 6 जुलाई को सहारनपुर से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के जयपुर कार्यालय के लिए करेंसी हैंडलिंग नेटवर्क के जरिए 111 करोड़ रुपये भेजे गए थे. इस खेप में 500 रुपये के नोटों की 1,900 गड्डियां और 200 रुपये के नोटों की 800 गड्डियां शामिल थीं.

जांचकर्ता अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि इस रकम की पैकिंग और उसे भेजने की पूरी प्रक्रिया कैसे हुई थी. बताया गया है कि इस खेप की जिम्मेदारी एक पार्ट-टाइम हाउसकीपर को सौंपी गई थी. जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि करेंसी की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान किस स्तर पर कथित नकली नोट करेंसी चेन में शामिल हुए.

बैंक की शाखाओं और ATM तक पहुंचने की भी जांच

जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि क्या करेंसी चेस्ट से नकली नोट बैंक की दूसरी शाखाओं और ATM तक पहुंचे थे. एजेंसियां इस संभावना की जांच कर रही हैं कि गड़बड़ी सामने आने से पहले कुछ नकली नोट करेंसी चेस्ट से निकालकर बैंकिंग नेटवर्क में वितरित किए गए हों.

यही वजह है कि जांचकर्ताओं के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कथित नकली करेंसी का दायरा आखिर कितना बड़ा था. अभी यह तय नहीं हो पाया है कि करेंसी चेस्ट से बाहर कितनी नकली करेंसी गई होगी. जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस रकम का कोई हिस्सा पहले ही चलन में आ चुका था.

नेपाल कनेक्शन की भी जांच

इस मामले की जांच में संभावित सीमा पार कनेक्शन का एंगल भी सामने आया है. पुलिस तीनों आरोपियों के संपर्कों और उनकी गतिविधियों की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनके संबंध नेपाल की सीमा के पास या सीमा पार सक्रिय किसी व्यक्ति या समूह से थे या नहीं.

तीनों अधिकारियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी करने की एक वजह यह आशंका भी थी कि वे देश छोड़कर नेपाल जा सकते हैं. हालांकि, अभी तक नेपाल से जुड़े किसी कनेक्शन की पुष्टि नहीं हुई है. जांच एजेंसियां फिलहाल इसे सिर्फ जांच के एक एंगल के तौर पर देख रही हैं. सहारनपुर के SSP अभिनंदन ने इससे पहले तलाशी के दौरान महत्वपूर्ण सबूत मिलने और तीनों आरोपियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किए जाने की पुष्टि की थी.

अब NIA की जांच का फोकस इस बात पर है कि PNB के करेंसी चेस्ट में 17.29 करोड़ रुपये की कथित नकली करेंसी कैसे पहुंची, क्या यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा है और क्या नकली नोट बैंकिंग सिस्टम के जरिए आगे तक पहुंचाए गए. एजेंसी इस पूरी कथित साजिश की कड़ियों को जोड़ने और मामले में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है.

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