SIR को लेकर क्या बोले गौतमबुद्ध नगर वोटर्स? किसी का नाम सूची में शामिल, तो किसी का अब तक नहीं जुड़ा वोट- पढ़िए Exclusive रिपोर्ट
State Mirror की ग्राउंड रिपोर्ट में नोएडा के अलग-अलग इलाकों के मतदाताओं ने SIR को लेकर अपने अनुभव बताए. किसी ने इसे जरूरी प्रक्रिया बताया तो किसी ने नाम नहीं जुड़ने और दस्तावेजों की परेशानी साझा की.
देशभर में SIR को लेकर बहस छिड़ी हुई है. विपक्ष की ओर से वोटरों के नाम काटे जाने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. वहीं, इस पूरी प्रक्रिया के बीच मतदाताओं को किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और गौतमबुद्ध नगर में SIR को लेकर लोगों की क्या प्रतिक्रिया है, इसे जानने के लिए हमने नोएडा के अलग-अलग इलाकों में वोटर्स से बातचीत की.
उत्तर प्रदेश में SIR की अंतिम मतदाता सूची अप्रैल महीने में जारी हुई थी. गौतमबुद्ध नगर में तीन विधानसभा क्षेत्र हैं. SIR से पहले जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर कुल 18,65,673 मतदाता थे, जबकि अंतिम सूची में यह संख्या घटकर 15,05,082 रह गई. यानी करीब 3.60 लाख मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं हैं. हालांकि, जिन लोगों से बातचीत की गई, उनमें SIR को लेकर अलग-अलग राय सामने आई. कुछ लोगों ने इसे जरूरी प्रक्रिया बताया, तो कुछ ने दस्तावेजों और नाम जोड़ने की प्रक्रिया में आ रही परेशानियों पर सवाल उठाए.
SIR पर लोगों की जुबानी
एक वरुण नाम के एक शख्स ने बताया कि उनका नाम SIR की अंतिम सूची में शामिल है. हालांकि, उनका कहना है कि इसका मतलब यह नहीं है कि लोगों को कोई परेशानी नहीं हुई. उन्होंने कहा कि कई लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए.
वोटर ID होने के बावजूद नहीं जुड़ा नाम; SIR पर हरि
नोएडा के सेक्टर-27 में रहने वाले हरि ने बताया कि उनका नाम SIR की अंतिम सूची में शामिल नहीं है. उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए BLO की ओर से अलग-अलग प्रक्रिया बताई जा रही है, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद अभी तक उनका नाम नहीं जुड़ पाया है. हरि ने बताया कि उनके माता-पिता मूल रूप से दूसरे राज्य से थे और काफी समय पहले नोएडा आकर रहने लगे थे. वे किराए के मकान में रहते थे और कई बार मकान बदलने की वजह से शुरुआत में उनका पहचान पत्र नहीं बन पाया. उन्होंने बताया कि उनका पहचान पत्र वर्ष 2005 में बना था, जबकि उनकी बहन और मां का बाद में बना.
हरि के मुताबिक, अब उनका नाम मतदाता सूची से हट गया है क्योंकि उनके पास पुराने दस्तावेज नहीं हैं. उन्होंने कहा कि वह मूल रूप से कलकत्ता के रहने वाले हैं और वर्ष 2002 में यहां उनकी वोटर लिस्ट में एंट्री नहीं थी. BLO ने नाम जुड़वाने के लिए कई प्रक्रियाएं बताईं, जिन्हें उन्होंने पूरा किया, लेकिन अभी तक नाम नहीं जुड़ पाया है.
SIR में दस्तावेजों का सत्यापन जरूरी, तभी तय हो वोटर लिस्ट में नाम
एक संदीप नाम के शख्स ने बताया कि उनका नाम SIR में शामिल है क्योंकि उनके पास सभी जरूरी दस्तावेज और प्रमाण मौजूद थे. उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार SIR को लेकर सवाल उठा रहा है, लेकिन उनके मुताबिक यह जरूरी प्रक्रिया है. संदीप ने कहा कि नोएडा में बड़ी संख्या में प्रवासी लोग रहते हैं. कई लोगों का नाम उनके मूल राज्य की मतदाता सूची में भी हो सकता है और यहां भी, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा होती है. उनके मुताबिक SIR के जरिए इसी तरह की स्थिति को खत्म करने की कोशिश की गई है, ताकि वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची में रहें और अपात्र या दो जगह दर्ज नामों को हटाया जा सके.
उन्होंने कहा कि BLO ने उनसे जो दस्तावेज मांगे थे, उन्होंने उपलब्ध करा दिए और उनका नाम सूची में आ गया. हालांकि, उनका कहना था कि बाहर से आकर रहने वाले बहुत से लोगों के पास पूरे दस्तावेज नहीं हो सकते. ऐसे में यह भी देखा जाना चाहिए कि उनका वोटर कार्ड और आधार कार्ड किस दस्तावेज के आधार पर बनाया गया था. उसी दस्तावेज की जांच और सत्यापन के बाद उनका नाम मतदाता सूची में शामिल किया जा सकता है.
भतीजे का नाम नहीं आया तो दस्तावेजों की जांच जरूरी, SIR को बताया जरूरी
एक युवक सुमित राजपूत ने बताया कि उनका नाम SIR की अंतिम सूची में शामिल है, लेकिन उनके भतीजे का नाम सूची में नहीं आया है. उन्होंने बताया कि कुछ देर पहले ही उनकी अपने बड़े भाई से इस बारे में बात हुई थी. सुमित ने कहा कि भतीजे का नाम सूची में नहीं आने का मतलब यह नहीं है कि SIR की प्रक्रिया खराब है. हो सकता है कि उसके दस्तावेजों में कोई त्रुटि रह गई हो, जिसकी वजह से नाम शामिल नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि दस्तावेज उपलब्ध कराकर बाद में नाम जुड़वाया जा सकता है.
उन्होंने SIR को जरूरी बताते हुए कहा कि किसी भी व्यवस्था का शुद्धिकरण जरूरी है और यह प्रक्रिया उसी दिशा में है. साथ ही उन्होंने कहा कि इस मामले के दूसरे पहलू को भी देखना जरूरी है और यह जांच होनी चाहिए कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कहीं दूसरे देशों से आए लोगों के नाम तो मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं.
SIR में लोगों को हुई परेशानी, BLO को भी दस्तावेजों की जानकारी नहीं
नोएडा के सेक्टर-82 निवासी प्रमोद दीक्षित ने बताया कि उनका नाम SIR की अंतिम सूची में शामिल है और उन्हें व्यक्तिगत तौर पर कोई परेशानी नहीं हुई. हालांकि, उन्होंने दावा किया कि उनके सेक्टर में बड़ी संख्या में लोगों को परेशानी हुई है. प्रमोद दीक्षित के मुताबिक, उनके सेक्टर में जब BLO SIR के लिए आए तो कई ऐसे लोग थे, जो बीजेपी के सदस्य भी थे, लेकिन उनमें से कुछ के वोट अंतिम सूची में नहीं आए. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों का यह पहला वोट था, लेकिन अब उनका नाम कट गया है.
उन्होंने यह भी कहा कि कई मामलों में BLO को खुद यह जानकारी नहीं थी कि लोगों से कौन-कौन से दस्तावेज मांगे जाने हैं. जिन कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी, वे भी परेशान दिखाई दे रहे थे और लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा.
लोगों को कह रहे नाम...प्रमोद दीक्षित
प्रमोद दीक्षित ने दावा किया कि सेक्टर-82 में कम से कम 200 लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कट गए हैं और वे लोग परेशान हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सेक्टर में आधे से ज्यादा लोग दूसरे राज्यों से आकर बसे हुए हैं. ऐसे में संभव है कि कुछ लोगों का नाम उनके मूल राज्य में भी मतदाता सूची में हो और इसी वजह से यहां उनका नाम हटाया गया हो. लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि पहले उनका वोट था और अब कट गया है, इसलिए इस पर विचार किया जाना चाहिए.
एक अन्य शख्स अरुण ने कहा कि गौतमबुद्ध नगर में करीब 3.60 लाख मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में नहीं हैं. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यह मान लेना सही नहीं होगा कि ये सभी लोग बांग्लादेश से आए हैं. उन्होंने कहा कि हाल में ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें आप देख लीजिए कि दिल्ली में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को नोटिस दिया गया था और विदेशी मंत्री को भी नोटिस दिया गया है. उनके मुताबिक इससे यह सवाल उठता है कि सिस्टम में भी त्रुटि तो कही न कही है.
भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए कौन सा दस्तावेज चाहिए
अरुण ने कहा कि SIR की प्रक्रिया कर रहे लोगों से भी पूछा जाना चाहिए कि भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए कौन सा दस्तावेज मान्य होगा. उन्होंने कहा कि पासपोर्ट होने और आधार कार्ड या वोटर आईडी भी अपने आप में नागरिकता का प्रमाण नहीं हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को स्पष्ट करना चाहिए कि कौन से दस्तावेज प्रस्तुत करने पर किसी व्यक्ति को भारतीय नागरिक माना जाएगा. अरुण के मुताबिक, BLO के सामने भी यह एक बड़ी चुनौती है.
उन्होंने कहा कि उनके पास सभी जरूरी दस्तावेज थे और उनके पूरे परिवार का नाम पहले से मतदाता सूची में था, इसलिए उनका नाम अंतिम सूची में शामिल हो गया और उन्हें परेशानी नहीं हुई. लेकिन सभी लोगों के पास पुराने दस्तावेज हों, यह जरूरी नहीं है. अरुण ने कहा कि बहुत से लोग दूसरे राज्यों से माइग्रेट होकर नोएडा आए हैं. ऐसे में यह कहना उचित नहीं होगा कि SIR में जिन करीब 3.60 लाख लोगों के नाम नहीं हैं,कई लोगों के दूसरे राज्यों में वोट हो सकते हैं या दस्तावेजों की वजह से समस्या आई हो सकती है.
उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले पर विचार करना चाहिए और जरूरत हो तो प्रक्रिया में बदलाव किया जाना चाहिए. साथ ही ऐसा स्पष्ट दस्तावेज तय किया जाना चाहिए, जिसके आधार पर भारतीय नागरिकता साबित होने पर व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल किया जा सके.




