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स्कूल में कराना है बच्चे का एडमिशन नहीं है आधार कार्ड तो नो टेंशन, योगी सरकार ने सिस्टम में किए ये बदलाव

अगर आपके बच्चे का स्कूल में एडमिशन कराना है और उसके पास आधार कार्ड नहीं है, तो अब घबराने की जरूरत नहीं. योगी सरकार ने RTE एक्ट के तहत एडमिशन नियमों में बड़ा बदलाव किया है. अब निजी अनुदान रहित स्कूलों में दाखिले के लिए बच्चे का आधार अनिवार्य नहीं होगा. सरकार का मकसद वंचित और गरीब परिवारों को राहत देना और दस्तावेज़ों के कारण किसी भी बच्चे को शिक्षा से वंचित न होने देना है. आधार अब केवल आर्थिक सहायता के लिए जरूरी होगा.

स्कूल में कराना है बच्चे का एडमिशन नहीं है आधार कार्ड तो नो टेंशन, योगी सरकार ने सिस्टम में किए ये बदलाव
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( Image Source:  Sora_ AI )
सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी

Published on: 10 Jan 2026 6:59 PM

उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत स्कूल एडमिशन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए बच्चों के आधार कार्ड की अनिवार्यता खत्म कर दी है. सरकार का यह फैसला खासतौर पर उन परिवारों के लिए राहत लेकर आया है, जिन्हें दस्तावेज़ों की कमी के कारण अब तक दाखिले में दिक्कतों का सामना करना पड़ता था. इस कदम का मकसद नामांकन प्रक्रिया को सरल बनाना और वंचित तबकों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ना है.

नई व्यवस्था के तहत अब आरटीई के अंतर्गत निजी (अनुदान रहित) स्कूलों में दाखिले के लिए बच्चे का आधार कार्ड जरूरी नहीं होगा. पहले ऑनलाइन आवेदन के दौरान बच्चे और माता-पिता- तीनों का आधार अनिवार्य था, जिससे कई पात्र परिवार प्रक्रिया से बाहर हो जाते थे.

RTE एडमिशन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव

सरकार ने आरटीई अधिनियम के तहत प्रवेश स्तर (प्री-प्राइमरी या कक्षा 1) में अनुदान रहित निजी स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया को नए सिरे से संरचित किया है. अधिकारियों के मुताबिक, यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि कोई भी पात्र बच्चा केवल दस्तावेज़ी अड़चनों के कारण शिक्षा से वंचित न रहे.

केवल आर्थिक सहायता के लिए जरूरी होगा आधार

नई गाइडलाइंस के अनुसार, अब आधार कार्ड की जरूरत सिर्फ आर्थिक सहायता (रिइम्बर्समेंट) के लिए होगी. आरटीई के तहत दी जाने वाली राशि सीधे माता-पिता के आधार से जुड़े बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी. आवेदन करते समय अभिभावकों को आधार-लिंक्ड बैंक अकाउंट की जानकारी देनी होगी. इस प्रक्रिया में कम से कम एक अभिभावक का आधार जरूरी होगा, लेकिन बच्चे का आधार अनिवार्य नहीं होगा.

सरकार का बयान: ‘Ease of Living’ पर जोर

इस फैसले पर टिप्पणी करते हुए बेसिक और सेकेंडरी शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि “वंचित वर्गों के लिए ‘ईज़ ऑफ़ लिविंग’ को हकीकत बनाना हमारा लक्ष्य, RTE की भावना के अनुरूप काम जारी”

एडमिशन की सीमा और स्कूलों की क्षमता

जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, RTE अधिनियम की धारा 12(1)(c) के तहत अनुदान रहित निजी स्कूलों में दाखिले की सीमा प्रवेश स्तर की कुल सीटों का अधिकतम 25% तय की गई है. हर जिले में स्कूलों की क्षमता के आधार पर जिला-स्तरीय वार्षिक प्रवेश लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे.

आयु सीमा क्या होगी? (Eligibility Criteria)

संशोधित नियमों में बच्चों की उम्र के अनुसार पात्रता भी स्पष्ट की गई है:

  • नर्सरी- 3 वर्ष या उससे अधिक, लेकिन 4 वर्ष से कम
  • एलकेजी (LKG): 4 वर्ष या उससे अधिक, लेकिन 5 वर्ष से कम
  • कक्षा 1: 6 से 7 वर्ष तक के बच्चे

वेरिफिकेशन और स्कूल आवंटन की प्रक्रिया

दस्तावेज़ों का सत्यापन खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) और बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) स्तर पर किया जाएगा. स्कूल आवंटन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन लॉटरी सिस्टम से होगी, जिसे दो चरणों में पूरा किया जाएगा. पहला चरण (Randomisation): सभी सत्यापित आवेदनों को डिजिटल रूप से शफल कर लॉटरी नंबर दिए जाएंगे. दूसरा चरण: माता-पिता की प्राथमिकता और लॉटरी नंबर के आधार पर 100-100 आवेदनों के बैच में स्कूल आवंटित किए जाएंगे. अंतिम आवंटन सूची को जिलाधिकारी (DM) की मंजूरी मिलेगी.

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