कौन थे 'फरसा वाले बाबा' जिनकी मथुरा में गाड़ी से कुचलकर कर दी गई हत्या, अब जमकर मचा है बवाल
यूपी के मथुरा में गौ-रक्षक बाबा फरसा वाले गाड़ी से कुचलकर हत्या कर दी गई. इस घटना को लेकर पूरे इलाके में तनाव फैल गया है और हाइवे पर हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस तैनात कर दी गई है.
मथुरा में आज सुबह हुई फरसा वाले बाबा की हत्या ने पूरे इलाके में सनसनी मचा दी है. बाबा की मौत की खबर फैलते ही गुस्साए लोग सड़कों पर उतर आए, जहां दिल्ली-कोलकाता हाईवे जाम कर दिया. दरअसल सुबह करीब 4 बजे बाबा को खबर मिलने के बाद वह बाइक पर सवार होकर गौ तस्करों का पीछा कर रहे थे.
जहां आरोपियों ने उनकी गाड़ी को कुचल दिया और बाबा की मौके पर ही मौत हो गई. ऐसे में लोग जानना चाहते हैं कि आखिर फरसा वाले बाबा कौन हैं. उनका यह नाम कैसे पड़ा.
कौन थे फरसा वाले बाबा?
चंद्रशेखर को लोग फरसा वाले बाबा के नाम से जानते हैं. वह ब्रज क्षेत्र में गौ-सेवक के रूप में प्रसिद्ध थे, जो मथुरा और आसपास के इलाकों में अवैध गौ-तस्करी को रोकने का काम करते थे. वह कई बार गौ-तस्करी करने वालों को पकड़ चुके हैं.
कैसे पड़ा बाबा का नाम फरसा?
चंद्रशेखर अपने खास अंदाज और हमेशा साथ रखी कुल्हाड़ी की वजह से इलाके में ‘फरसा वाले बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध थे. उनकी हत्या की खबर के बाद पूरे इलाके में शोक और गुस्से की लहर फैल गई. आगरा-दिल्ली हाईवे पर लोगों के गुस्से में पथराव के कारण लंबा ट्रैफिक जाम लग गया.
हिंदूवादी संगठनों से जुड़ाव
चंद्रशेखर बाबा कुछ हिंदूवादी संगठनों से भी जुड़े हुए थे. उनका नाम सिर्फ निडर स्वभाव के कारण ही नहीं बल्कि गायों की सुरक्षा और संरक्षण में उनके सक्रिय योगदान की वजह से भी लोगों के बीच मशहूर था.
अब तक मामले में क्या-क्या हुआ?
चंद्रशेखर बाबा का शव उनके गांव अंजनोख स्थित गोशाला में पहुंचाया जा चुका है. जैसे ही उनकी हत्या की खबर फैली, हिंदूवादी संगठन और स्थानीय गौ-सेवक गुस्से में आ गए. गुस्साई भीड़ आगरा-दिल्ली हाईवे पर उतर आई और पथराव करने लगी, जिससे वहां भगदड़ मच गई और ट्रैफिक पूरी तरह से ठप हो गया. इस दौरान एसडीएम और पुलिस की गाड़ियां भी क्षतिग्रस्त हो गईं. भारी तनाव को देखते हुए सेना की एक टुकड़ी को मौके पर तैनात किया गया ताकि स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सके.
एक्सप्लेन: सरल शब्दों में कहें तो, बाबा की हत्या की खबर सुनते ही इलाके में लोग बहुत गुस्से में आ गए। उनका गुस्सा सड़क पर फैल गया, जिससे ट्रैफिक रुक गया और पुलिस व प्रशासन को स्थिति संभालने के लिए सेना तक बुलानी पड़ी। यह घटना यह दिखाती है कि उनका इलाके और समुदाय में कितना प्रभाव था और उनकी हत्या से लोगों में कितनी आक्रोश और दुख की भावना पैदा हुई।




