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कालिया नाग यमुना में जिस कुंड में छुपा था वो था शपित, गरुड़ के प्रकोप से बचने का था यही राज

वृंदावन के पास यमुना नदी में एक शापित कुंड है. उसक नाम है कालिया कुंड. यमुना नदी यमुना का वही शापित कुंड बना था, कालिया नाग की शरणस्थली. जिसकी वजह से गरुड़ उसे नहीं मार पाए. गरुड़ के प्रकोप से बचने का क्या था रहस्य? जानिए कालिया कुंड, ऋषि का शाप और श्रीकृष्ण की कालिया-मर्दन लीला की पूरी कथा डिटेल में.

कालिया नाग यमुना में जिस कुंड में छुपा था वो था शपित, गरुड़ के प्रकोप से बचने का था यही राज
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( Image Source:  brajrasik.org/govind_roy015 )

उत्तर प्रदेश में ब्रज की पावन भूमि, यमुना की शीतल धारा और उसी के बीच छुपा एक ऐसा शापित कुंड, जहां मौत का साया मंडराता था. कालिया नाग ने वहीं पर अपना डेरा जमा लिया था. उस जगह पर न गरुड़ पहुंच सकते थे, न कोई जीव जीवित लौटता था. यानी कालिया नाग कोई साधारण नाग नहीं था. वह जानता था कि गरुड़ नागों के काल हैं, इसलिए उसने अपना निवास एक ऋषि के शाप से अभिशप्त कुंड को चुनाव था. न गरुड़ वहां आएगा, नहीं मुझे कोई मार पाएगा. लेकिन होनी कौन रोक सकता है? गरुड़ तो कालिया को नहीं मार पाए, पर कालिया के आतंक से ब्रज में हाहाकार मच गया. तभी प्रकट हुए भगवान श्रीकृष्ण. उन्होंने कालिया-मर्दन किया, जिसने इस शापित कुंड को भी इतिहास बना दिया. यह सिर्फ एक पौराणिक कथा नहीं, बल्कि धर्म, करुणा और संतुलन का ऐसा संदेश है, जो आज भी यमुना, वृंदावन और गोवर्धन की हवा में घुला हुआ है.

दरअसल, कालिया नाग यमुना नदी के 'कालिया कुंड' (कालिया ह्रद) में रहता था. यह कुंड आज के वृंदावन–गोवर्धन क्षेत्र से जोड़ा जाता है. ब्रज परिक्रमा में आने वाले श्रद्धालु आज भी इस स्थान को श्रद्धा से देखते हैं. जैसे यमुना, वृंदावन और गोवर्धन हर कण में कृष्ण-कथा समाए हुए हैं.

कालिया कुंड क्यों था शापित?

कालिया कुंड को शापित बनने के पीछे एक प्रचलित कथा है. कभी सौभरि ऋषि यमुना के उसी कुंड में तपस्या कर रहे थे. देवताओं के वाहन गरुड़ जब भी नागों का शिकार करते हुए उस क्षेत्र में आते, ऋषि की तपस्या भंग होती. क्रोधित होकर सौभरि ऋषि ने गरुड़ को शाप दे दिया कि यदि तुम इस कुंड में आए तो तुम्हारी तत्काल मृत्यु हो जाएगी.

ऋषि के शाप के कारण गरुड़ ने उस क्षेत्र में जाना छोड़ दिया. कुंड विषैला, निर्जन और भयावह बन गया. बाद में कालिया नाग ने इसे अपना ठिकाना बना लिया. कालिया के विष से यमुना का जल तक काला पड़ गया. मछलियां मरने लगीं. गायें-पशु दम तोड़ने लगे. यही कारण है कि ब्रजवासियों के लिए यह कुंड मृत्यु का प्रतीक बन गया था.

गरुड़, कालिया नाग को क्यों नहीं मार सका?

यह सवाल सबसे रोचक है, क्योंकि गरुड़ तो नागों के स्वाभाविक शत्रु माने जाते हैं. फिर गरुड़ की मां विनता को ऋषि कश्यप से वरदान मिला था कि कौद्रू की सभी संतानों को वो मारेगा. गरुड़ ने सभी संतानों को तो मार दिया, पर कालिया नाग बच गया. ऐसा इसलिए कि सौभरि ऋषि का शाप था कि गरुड़ उस कुंड में प्रवेश नहीं कर सकता, अगर किया तो वो खुद मर जाएगा. शाप का उल्लंघन करने पर गरुड़ की मृत्यु निश्चित थी. यही कारण है कि कलिया बच गया. कालिया ने उसी कुंड में डेरा जमा लिया.

जिस कुंड में था कालिया का वास, वहीं हुआ मर्दन

कालिया जानता था कि गरुड़ वहां नहीं आ सकता, इसलिए उसने निडर होकर उसी कुंड को अपना अड्डा बनाया. दैवी पौराणिक मान्यता के अनुसार, गरुड़ का न मार पाना ही कृष्ण लीला का मार्ग प्रशस्त करता है. यदि गरुड़ ही कालिया को मार देते, तो भगवान श्रीकृष्ण की कालिया-मर्दन लीला संभव नहीं होती.

कृष्ण की लीला का संदेश

जब यमुना का जल विषैला हो गया और ब्रज संकट में आया. उससे बृजवासियों को बचाने के लिए बाल गोपाल श्रीकृष्ण ने यमुना में कूदकर कालिया नाग के फनों पर नृत्य किया. उसके अहंकार को कुचल दिया, लेकिन, कृष्ण ने कालिया को मारा नहीं, बल्कि सुधारा. कालिया की पत्नियों (नाग पत्नियों) की प्रार्थना पर, उसे यमुना छोड़कर रमणक द्वीप जाने का आदेश दिया. उसके बाद कालिया रमणीक द्वीप पर जाकर रहने लगा. वैसे भी भारतीय संस्कृति में कालिया नाग का अर्थ अहंकार और विष है. वहीं, यमुना को जीवन की धारा और भगवान कृष्ण को कृष्ण धर्म, करुणा और संतुलन का पर्याय माने जाते हैं.

कालिया मर्दन के बाद हुआ रहस्य का खुलासा

जब यमुना का जल काला पड़ने लगा, मछलियां मरने लगीं और वृंदावन की धरती भय से कांप उठी. शुरू में ब्रजवासी यह समक्ष नहीं पाए कि ऐसा क्यों हो रहा है, लेकिन लगातार जानवरों व लोगों के मरने के बाद लोग यह समझ गए कि यह कोई साधारण संकट नहीं है. बाद में खुलासा हुआ कि यमुना के बीचों-बीच बसे एक कुंड में कालिया नाग रहता था. वह बहुत ही जहरीला, अहंकारी और निर्दयी था. उसके विष से न केवल जल बल्कि हवा तक जहरीली हो गई थी.

कालिया नाग कौन था?

भारतीय परंपरा में कथाओं में कालिया नाग का नाम आते ही श्रीकृष्ण की बाल-लीलाएं, यमुना तट और विष से भरी नदी का दृश्य जेहन में आ जाता है. यह कथा आज भी नाग पंचमी, जन्माष्टमी, भागवत कथा और गांव–कस्बों की कथावाचन परंपरा में उतनी ही जीवंत है. इसकी चर्चा हम इसलिए कर रहे हैं कि हाल ही में यमुना में कालिया नाग जैसा विशाल, काला और जहरीला नाग दिखा है. जानें कालिया नाग की शास्त्र और पुरानों में क्या है सबको आतंकित करने वाली कहानी, जिसका अंत भगवान श्रीकृष्ण ने किया था.

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